प्रवासी मज़दूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ की घोषणा की है. इस योजना के तहत पचास हजार करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए बिहार के खगरिया ज़िले से इस योजना का शुभारंभ किया. इस मौके पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे. गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत देश के छह राज्यों- बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा के 116 ज़िलों को शामिल किया गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना को अमल में लाने के लिए 125 दिनों का लक्ष्य तय किया है.

गरीब कल्याण रोजगार अभियान की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मजदूरों को भी संबोधित किया. इसमें उन्होंने कहा, ‘देश आपकी भावनाओं के साथ आपकी ज़रूरतों को भी समझता है. अब आप लोगों को आपके घरों के नजदीक ही रोज़गार मिल सकेगा. अभी तक आप लोग अपने हुनर का इस्तेमाल शहरों का विकास करने में करते थे. लेकिन अब आप अपनी काबिलियत का उपयोग अपने और अपने आस-पास के गांवों की उन्नति के लिए कर सकेंगे.’ इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के कुछ प्रवासी मज़दूरों से भी बात की.

केंद्र सरकार का दावा है कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान की मदद से ग्रामीण भारत में सुविधाओं का ऐसा ढांचा खड़ा तैयार किया जाएगा जो मज़दूरों के जीवनस्तर को सुधारने के साथ उन्हें रोज़गार के भी अवसर मुहैया करवाएगा. वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए गुरुवार को कहा था कि इस योजना के तहत 25 अलग-अलग योजनाओं को अगले दो महीनों में जमीन पर उतारा जाएगा जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्राम सड़क योजना और जल जीवन योजना प्रमुखता से शामिल हैं.

जानकारी के अनुसार गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत फ़ाइबर ऑप्टिक्स केबल बिछाने के अलावा रेलवे, ग्रामीण मिशन, स्वच्छता व साफ़-सफ़ाई, कचरा प्रबंधन, मुर्गीपालन और तालाब निर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रवासी मज़दूरों को रोज़गार के अवसर दिए जाएंगे. इसके लिए ज़रूरत पड़ने पर मज़दूरों को कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इस अभियान को सफल बनाने के लिए बारह अलग-अलग मंत्रालयों की मदद ली जानी है. इनमें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, परिवहन, खनन, जल संसाधन, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना और कृषि मंत्रालय के साथ सीमा सड़क संगठन भी शामिल हैं.

वहीं, आलोचकों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के अगले विधानसभा चुनावों को देखते हुए गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शक्ल में बड़ा दांव खेला है. इसके लिए कोई नया बजट जारी नहीं किया जाएगा. एक अनुमान के मुताबिक़ कोरोना और उससे निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के चलते अब तक बिहार में क़रीब तीस लाख प्रवासी घरवापसी कर चुके हैं. इनमें बहुत बड़ी संख्या दिहाड़ी मज़दूरों की है जो बीते तीन महीनों के दौरान आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.