सोमवार को लद्दाख की गलवान घाटी में हुए भारतीय और चीनी सेना के खूनी संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच का तनाव दुनियाभर में सुर्खियां बटोर रहा है. इसी दौरान चीन बांग्लादेश को लेकर एक नई आर्थिक कूटनीति अपनाने को लेकर चर्चा में आ गया है. हाल ही में आई कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबक के मुताबिक चीन ने बांग्लादेश को ट्रेड टैरिफ में 97 फीसदी तक छूट देने की बात कही है. बीते शुक्रवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है. इस घोषणा में बताया गया है कि पांच हजार से ज्यादा चीजें जिनका व्यापार चीन से होता है, उन पर यह छूट लागू होगी.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इसे लेकर एक महीने पहले चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग से फोन पर बातचीत की थी. बताया जा रहा है कि बांग्लादेश ने खुद को कम-विकसित देश बताते हुए और कोविड-19 को देखते हुए चीन से आर्थिक रियायतें देने की बात कही थी. बीती 16 जून को चीनी वित्त मंत्रालय की तरफ इसे मंजूरी दे दी गई. संयोग से इसके ठीक एक दिन पहले ही लद्दाख में चीन और भारत की सेनाओं की भिड़ंत हुई थी.

भारत के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली साबित हो सकती है क्योंकि अब तक बांग्लादेश भारत के करीबी देशों में शामिल रहा है. हालांकि पिछले दिनों एनआरसी और नए नागरिकता कानून को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ असहमतियां भी देखने को मिली थीं. जानकार मानते हैं कि चीन का यह कदम भारत को चारों ओर से घेरने की मंशा से उठाया गया हो सकता है क्योंकि हाल ही में नेपाल की संसद ने उस संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है जिसके तहत देश के नक्शे में बदलाव किया गया है. इस नक्शे में वह हिस्सा भी शामिल है जिस पर भारत दावा करता है. इसके पीछे भी नेपाल को चीन का समर्थन होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा, पाकिस्तान और श्रीलंका को सस्ती दरों पर कर्ज़ देकर चीन अपने पाले में ले चुका है.