दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों और मौत का शिकार बनने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज्यादा है. इटली, चीन और अमेरिका जैसे देशों से आए आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं. लेकिन बीबीसी की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत के मामले में उल्टा हो रहा है. भारत समेत 56 देशों में किया गया एक शोध कहता है कि कोरोना संक्रमण के मामले में दुनियाभर में जहां पुरुषों की मृत्युदर ज्यादा है, वहीं आश्चर्यजनक रूप से भारत में महिलाओं की मृत्युदर अधिक है.

यह शोध बताता है कि बीती 20 मई तक भारत में कोविड-19 से जान गंवाने वाली महिलाओं की दर जहां 3.3 फीसदी थी, वहीं पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 2.9 फीसदी था. साथ ही, 40-49 साल आयुवर्ग में महिलाओं की मृत्युदर 3.2 फीसदी थी तो पुरुषों की मृत्युदर 2.1 फीसदी थी. इसके अलावा, 5-19 साल आयुवर्ग में कोरोना संक्रमण से मौत का शिकार बनने वाली सभी मरीज महिलाएं ही थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हाइपरटेंशन, मधुमेह और हृदय-संबंधी बीमारियां कहीं ज्यादा होती हैं. साथ ही कुछ शोध बताते हैं कि पुरुषों की धूम्रपान ज्यादा करने और हाथ कम धोने की आदत भी उनके लिए कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाने की एक वजह है. इन कारणों के चलते वैज्ञानिक यकीन करते हैं कि महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अच्छी होती है और इसीलिए दुनियाभर में कोरोना संक्रमित होने वाली महिलाओं की संख्या और मृत्युदर कम है.

लेकिन भारत के मामले में जहां सामान्यतौर पर महिलाएं पुरुषों से लंबा जीवन जीती हैं, वहां उनकी मृत्युदर अधिक होना वैज्ञानिक तबके को भी चौंकाता है. वह भी तब जब संक्रमित होने के मामले में पुरुषों की संख्या उनसे कहीं ज्यादा है. कुछ वैज्ञानिक अंदाजा लगाते हैं कि इसके पीछे भारत के सामाजिक-लैंगिक समीकरण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. यहां पर ज्यादातर महिलाएं न सिर्फ कुपोषण का शिकार होती हैं बल्कि अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज करने के साथ-साथ घरेलू इलाज पर ज्यादा भरोसा जताती हैं. हालांकि वैज्ञानिक अभी पक्के तौर पर यह नहीं बता पाते हैं कि भारत में आंकड़ों का यह उलटफेर होने के पीछे क्या कारण है लेकिन वे यह चेतावनी जरूर दे देते हैं कि यहां महिलाओं को कोरोना वायरस से ज्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है.