नए नागरिकता कानून का विरोध करने वाली एक्टविस्ट और जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफ़ूरा ज़रगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है. अदालत ने उन्हें दस हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही उन्हें जांच के दौरान दिल्ली ना छोड़ने के लिए भी कहा गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मानवीय आधार पर ज़मानत का विरोध नहीं किया, जिसके कारण अदालत ने ज़मानत दे दी.

सीएए-एनआरसी के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग से शुरू हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं सफूरा ज़रगर 23 हफ्ते की गर्भवती हैं. उन्हें 10 अप्रैल को दिल्ली दंगो की साजिश रचने के आरोप में गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था. बीती फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए-एनआरसी के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे.

सफूरा ज़रगर को चौथी कोशिश के बाद जमानत मिल सकी है. इससे पहले दिल्ली हाइकोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने ज़रगर के अपराध की गंभीरता और जांच को प्रभावित किए जाने की आशंका के चलते हुए उन्हें जमानत न दिए जाने की बात कही थी. सफूरा ज़रगर की तीसरी जमानत याचिका 4 जून को रद्द की गई थी. चौथी बार भी उनकी याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस का कहना था कि बीते 10 सालों में दिल्ली की जेलों में 39 महिला कैदियों ने बच्चों को जन्म दिया है, इसलिए सफूरा ज़रगर कोई अपवाद नहीं होंगी.