पतंजलि द्वारा लॉन्च की गई ‘दिव्य कोरोनिल टैबलेट’ पर छिड़ी बहस के बीच केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि ‘योगगुरू रामदेव ने देश को एक नई दवा देकर अच्छा काम किया है. लेकिन इसके लिए उन्हें आयुष मंत्रालय की इज़ाजत लेनी होगी.’ इस बयान में आयुष मंत्री ने यह भी कहा, ‘पतंजलि ने संबंधित कागज़ों को मंगलवार को ही मंत्रालय में भिजवा दिया था. इन्हें जांचने के बाद ही इस दवाई को अनुमति दी जाएगी.’ बकौल श्रीपद नाइक, ‘कोई भी व्यक्ति दवा बना सकता है. लेकिन इसके लिए उसे आयुष मंत्रालय के दिशा निर्देशों का पालन करना होगा. दवा तैयार करने वाले को अपने शोध से जुड़ी जानकारी आयुष मंत्रालय को सौंपनी होगी. और उस दवाई को मंत्रालय की मंजूरी न मिलने तक उसका प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता है.’

ग़ौरतलब है कि कोरोनिल को पतंजलि के सह-संस्थापक बाबा रामदेव ने मंगलवार को लॉन्च किया था. इस मौके पर उन्होंने दावा किया था कि कोरोनिल के इस्तेमाल से 69 प्रतिशत मरीज़ों को तीन दिन में और सौ प्रतिशत मरीज़ों को सप्ताह भर में ठीक किया जा चुका है. साथ ही बाबा रामदेव ने इस दवा को हफ़्तेभर में भारतीय बाज़ार में उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी. लेकिन इसके थोड़ी देर बाद ही देशभर में कोरोनिल की विश्वसनीयता पर बड़ी बहस छिड़ गई.

इस पर केंद्र सरकार ने संज्ञान लेते हुए पतंजलि को ‘दिव्य कोरोनिल टैबलेट’ से जुड़े सभी वैज्ञानिक शोधों की जानकारी आयुष मंत्रालय को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए. वहीं आयुष मंत्रालय ने भी स्पष्ट कर दिया कि उसकी मंजूरी के बिना कोरोनिल टैबलेट को कोरोना वायरस के मामले में सौ फीसदी कारगर बताना, ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून 1954 का उल्लंघन माना जाएगा. मंत्रालय ने पतंजलि से इस दवा से जुड़े ट्रायल के सैंपल, स्थान, ट्रायल के नतीजे और अस्पताल जहां शोध किया गया, के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ दवा के पंजीकरण और इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी द्वारा दवा की मंजूरी के दस्तावेज भी मांगे. साथ ही आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की कंपनी को दवा के उन घटकों का नाम भी बताने को कहा, जिनके आधार पर कोरोना के इलाज का दावा किया जा रहा है.