गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं में हुई झड़प के बाद चाइनीज हैकर्स के भारतीय संस्थाओं पर हमले करने की खबरें सामने आ रही हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पिछले पांच दिनों में 40,000 से ज्यादा बार साइबर अटैक की कोशिशें की जा चुकी हैं. इन हमलों के निशाने पर सूचना, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां है. महाराष्ट्र पुलिस की साइबर शाखा ने इन हमलों की सूचना जुटाई और इनमें से अधिकतर चीन के चेंगदु इलाके से पाए गए हैं.

साइबर सुरक्षा पर शोध करने वाली कंपनी साइफर्मा के मुताबिक चाइनीज हैकर्स रक्षा मंत्रालय, रिलायंस जिओ, एयरटेल, बीएसएनएल, माइक्रोमैक्स, सीप्ला, सन फार्मा, एमआरएफ और एलएंडटी जैसी कंपनियों को अपना निशाना बना रहे हैं. हैकिंग का उद्देश्य इन कंपनियों की संवेदनशील सूचनाएं चुराकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उनकी छवि को खराब करना भी हो सकता है. साइफर्मा के मुताबिक आईपी एड्रेस की जांच से पता चला है कि इस हैकिंग कैंपेन के पीछे गॉथिक पांडा और स्टोन पांडा जैसे हैकिंग ग्रुप्स हैं. चीनी सरकार के लिए काम करने वाले इन समूहों का नाम पहले भारत समेत कनाडा, जापान और ब्राजील जैसे देशों में हुए कई साइबर हमलों में आ चुका है.

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो चीन में इस तरह के कई हैकर ग्रुप हैं जिनमें तीन लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. बताया जाता है कि इनमें से एक बड़ा हिस्सा पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी चीनी फौज के लिए काम करता है. भारत में इस तरह के हमलों से बचने के लिए इंटीग्रेटेड साइबर कमांड (एक तरह की साइबर सेना) बनाए जाने की मांग लंबे समय से उठ रही है लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. हालांकि पिछले दिनों नई साइबर सेक्योरिटी गाइडलाइन जारी करने बात ज़रूर कही गई थी.