लगभग साढ़े चार दशक पुरानी और बेहद लोकप्रिय फेयरनेस क्रीम ‘फेयर एंड लवली’ के नाम से अब फेयर शब्द हटाया जाएगा. गुरूवार को हिंदुस्तान यूनीलीवर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने स्किन केयर उत्पादों से ‘फेयर,’ ‘व्हाइटनिंग’ और ‘लाइटनिंग’ जैसे शब्द हटाए जाने की बात कही है. कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे अपने स्किन केयर पोर्टफोलियो को अलग-अलग नस्ल के लोगों के लिए समावेशी बना रहे हैं. डाइवर्सिटी का जिक्र करते हुए कंपनी का यह भी कहना था कि वे सुंदरता के किसी एक विचार पर यकीन नहीं रखते हैं इसीलिए कैंपेन की भाषा बदलने का फैसला लिया गया है.

हिंदुस्तान यूनीलीवर ने साल 1975 में गोरापन बढ़ाने का दावा करने वाली फेयर एंड लवली क्रीम को बाजार में उतारा था. यह उत्पाद कितना लोकप्रिय है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में फेयरनेस क्रीम मार्केट के लगभग आधे से अधिक हिस्से पर इसका कब्जा है. बाज़ार के जानकार, हिंदुस्तान यूनीलीवर के इस कदम को अमेरिका में नस्लभेद के खिलाफ चल रहे आंदोलन का सकारात्मक असर बता रहे हैं.

लंबे समय से भारत समेत कई एशियाई देशों में ‘फेयर एंड लवली’ जैसे उत्पादों के विरोध में आवाज उठाई जा रही थी. कहा जा रहा था कि गोरेपन को बढ़ाने का दावा करने वाले इन उत्पादों को अक्सर सुंदरता और सफलता के प्रतीक की तरह दिखाया जाता है जो सही नहीं कहा जा सकता है. बीते हफ्ते मैट्रीमोनियल वेबसाइट शादी डॉट कॉम ने भी अपनी वेबसाइट से स्किन कलर फिल्टर हटाने की घोषणा की थी. यहां पर शादी के लिए दिए जाने वाले विज्ञापनों में लड़की की विशेषता रंग गोरा या गेंहुआ कहकर बताई जाती थी.