इस समय चीन के साथ तनाव पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि लद्दाख में गलवान घाटी का प्रकरण बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है कि इस घटना को मोदी सरकार की नाकामी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि गश्त के दौरान भारतीय सैनिक चौकन्ने थे.

बीती 15 जून को गलवान घाटी में चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. पीटीआई के मुताबिक शनिवार को इस मसले पर महाराष्ट्र के सतारा में शरद पवार ने मीडिया से खुलकर बातचीत की. उन्होंने कहा, ‘यह पूरा प्रकरण संवेदनशील प्रकृति का है. गलवान घाटी में चीन ने उकसावे वाला रुख अपनाया. उन्होंने हमारी सड़क पर अतिक्रमण करने की कोशिश की और धक्कामुक्की की. यह किसी की नाकामी नहीं है.’ देश के पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने आगे कहा, ‘हम यह नहीं कह सकते कि यह दिल्ली में बैठे रक्षा मंत्री की नाकामी है, (क्योंकि) वहां भारतीय जवान गश्त कर रहे थे. झड़प हुई इसका मतलब है कि हमारे जवान चौकन्ने थे. अगर आप वहां नहीं होते तो आपको पता भी नहीं चलता कि कब चीनी सैनिक आए और गए. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस समय नाकामी का आरोप लगाना सही है.’

बीते हफ्ते कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की आक्रामकता के चलते भारतीय क्षेत्र को उसके हाथों में सौंप दिया. राहुल गांधी के इस आरोप पर जवाब देते हुए शरद पवार का कहना था कि यह कोई नहीं भूल सकता कि 1962 के युद्ध के बाद चीन ने भारत की करीब 45,000 वर्ग किलोमीटर की जमीन पर कब्जा कर लिया था. उनके मुताबिक, ‘यह जमीन अब भी चीन के पास है. मुझे नहीं मालूम कि क्या उन्होंने (चीन) अब फिर से कुछ क्षेत्र पर अतिक्रमण कर लिया. लेकिन जब मैं आरोप लगाता हूं तो मुझे यह भी देखना चाहिए कि जब मैं सत्ता में था तो क्या हुआ था. अगर इतनी बड़ी जमीन अधिग्रहीत की जाती है तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और मुझे लगता है कि इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.’