1-चीन दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. इस आबादी के रहने और आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलाने के लिए उसी अनुपात में इमारतों की भी ज़रूरत है. चीन इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रहा है. जानकारों का कहना है कि आने वाले दशक में दुनिया भर में जितनी इमारतें बनेंगी, उनमें से आधी इमारतें सिर्फ़ चीन में होंगी. बीबीसी की रिपोर्ट.

वो देश जो हर साल एक नया ‘लंदन’ बना रहा है

2-भारत और चीन के बीच तनातनी जारी है. यह टकराव 15 जून को लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुआ जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक हताहत हुए. इसके बाद से सैन्य वार्ताएं चल रही हैं ताकि सीमा पर फिर शांति बहाल हो. इस पूरे मुद्दे को लेकर द प्रिंट हिंदी पर लेफ्टिनल जनरल (सेवानिवृत्त) एचएस पनाग की टिप्पणी.

चीन एलएसी पर जमीन हथियाने के लिए नहीं बल्कि भारत को ये जताने के लिए है कि ‘बिग ब्रदर’ कौन है

3- बंगाल पहले भी बाल विवाह के लिए सुर्खियों में रहा है. बीच में यह सिलसिला कुछ थम-सा गया था. लेकिन अब लॉकडाउन और खास कर अम्फान के बाद इसमें काफी तेजी आई है. कई मामले ऐसे हैं जिनकी शिकायत ही पुलिस प्रशासन तक नहीं पहुंची है. डॉयचे वेले हिंदी पर प्रभाकर की रिपोर्ट.

लॉकडाउन और अम्फान के बाद बंगाल में बढ़ रहे हैं बाल विवाह के मामले

4- भारत में कोरोना वायरस के मामलों का आंकड़ा पांच लाख के पार निकल गया है. दो महीने के कड़े लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. द वायर हिंदी पर अपने इस लेख में हर्ष मंदर का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान सरकार ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के कोई प्रयास नहीं किए जिसका नतीजा मौजूदा हालात के रूप में नजर आ रहा है.

कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने ईमानदार कोशिश नहीं की

5-इस हफ्ते बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 83 लोगों की मौत हो गई. राज्य में ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है. हर साल ऐसी मौतें होती हैं, उन पर संवेदना प्रकट कर मुआवजे की घोषणा हो जाती है और फिर सबकुछ सामान्य ढर्रे पर चलने लगता है. डाउन टू अर्थ पर उमेश कुमार राय की रिपोर्ट.

मुआवजे और संवेदना व्यक्त करने से नहीं थमेगी आकाशीय बिजली की मार