मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने मंत्रिमंडल विस्तार कर दिया है. बतौर मुख्यमंत्री चौहान के चौथे कार्यकाल का यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार है. इसके तहत मध्यप्रदेश की कार्यकारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 28 विधायकों को मंत्री रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई. इनमें 20 कैबिनेट स्‍तर के और आठ राज्‍य मंत्री है. यहां खास बात ये है कि शिवराज सरकार के नए मंत्रिमंडल में उन बारह पूर्व विधायकों को जगह मिली है जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए थे. जानकारों के मुताबिक ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब किसी मंत्रिमंडल में इतनी बड़ी संख्या में गैरविधायकों को शामिल किया गया हो.

गुरुवार को शपथ लेने वाले प्रमुख मंत्रियों में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव, विजय शाह, जगदीश देवड़ा, भूपेंद्र सिंह और विश्‍वास सारंग शामिल हैं. इनके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ और भाजपा नेता यशोधरा सिंधिया को भी शिवराज कैबिनेट में शामिल किया गया है.

ग़ौरतलब है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनने के एक महीने बाद तक ख़ुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का सारा दारोमदार अपने कंधे पर ले रखा था. इसके बाद उन्होंने पांच मंत्रियों को नियुक्त किया था. और अब सत्ता में आने के करीब सौ दिन गुजरने के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने अपनी कैबिनेट का पहला विस्तार किया है. मंत्रिमंडल विस्तार में हुई देरी के पीछे पहले कोरोना और फ़िर राज्यसभा चुनावों का हवाला दिया जा रहा था. लेकिन सूत्रों की मानें तो ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही अपने-अपने करीबी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करवाने की जिद पर अड़े थे. ऐसे में हाईकमान को दोनों नेताओं के बीच सामजस्य बिठाने में समय लग गया.

करीब तीन महीने चली इस लंबी खींचतान के बाद हाल-फिलहाल सिंधिया, चौहान पर भारी पड़ते दिखे हैं. बुधवार को अपने एक बयान में शिवराज सिंह ने भी इस बात का इशारा देते हुए कहा कि ‘मंथन से तो अमृत ही निकलता है. विष तो शिव पी जाते हैं.’ हालांकि गुरुवार को मुख्यमंत्री चौहान ने सभी नए मंत्रियों को बधाई देते हुए ट्वीट किया कि ‘हम सभी साथ में काम करेंगे और मध्यप्रदेश के लोगों के हितों से जुड़े अपने साझे लक्ष्य को मिलकर हासिल करेंगे. मुझे भरोसा है कि सभी नए साथियों से पूरा सहयोग मिलेगा.’

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दुखती रग पर हाथ रखते हुए ट्वीट किया कि ‘आज के मंत्रिमंडल के गठन में कई योग्य, अनुभवी, निष्ठावान भाजपा के वरिष्ठ विधायकों का नाम नहीं पाकर मुझे व्यक्तिगत तौर पर बेहद दुःख भी है.’ साथ ही उन्होंने एक अन्य ट्वीट में 33 मंत्रियों की कैबिनेट में 14 ग़ैरविधायकों को शामिल करने को संवैधानिक व्यवस्थाओं के साथ बड़ा खिलवाड़ और प्रदेश की जनता के साथ मज़ाक बताया.