फेसबुक ने एक बार फिर से गलत तरीके से यूजर डेटा का इस्तेमाल करने की बात स्वीकारी है. कंपनी द्वारा जारी किए गए ब्लॉग में इसे गलती बताया गया है. फेसबुक के मुताबिक उसके सिस्टम की एक खामी के कारण लगभग 5000 थर्ड पार्टी ऐप डेवलपर्स को इनैक्टिव फेसबुक यूजर्स का डेटा निर्धारित समय से ज्यादा वक्त तक मिलता रहा. हालांकि फेसबुक ने प्रभावित होने वाले यूजर्स की संख्या नहीं बताई है, लेकिन यह जरूर साझा किया गया है कि इस डेटा में लोगों की पब्लिक इफॉर्मेशन जैसे ई-मेल आईडी, जन्मदिन, जेंडर और भाषा जैसी जानकारियां शामिल हैं. इन जानकारियों को साझा करने की अनुमति यूजर किसी डेवलपर को तब देता है जब वह ऐप या वेबसाइट को फेसबुक अकाउंट से लिंक/लॉग-इन कर रहा होता है.

फेसबुक की पॉलिसी कहती है कि अगर कोई यूजर किसी थर्ड पार्टी ऐप को लॉग-इन करने के बावजूद 90 दिनों तक उसका इस्तेमाल नहीं करता है तो यह समय बीतने के बाद डेवलपर यूजर की पब्लिक इंफॉर्मेशन को एक्सेस नहीं कर सकेगा. ताज़ा मामले में यह अवधि बीतने के बाद भी हजारों डेवलपर्स को यह जानकारी लगातार मिल रही थी. इसे गलती बताते हुए फेसबुक ने सफाई दी है कि इसके पकड़ में आने के दूसरे ही दिन इसे ठीक कर दिया गया था.

फेसबुक की इस सफाई से भी उसका पक्ष बहुत स्पष्ट नहीं हो पाता है और न ही यह पता चल पाता है कि इससे कितने और किस तरह के यूजर्स प्रभावित हुए हैं या उनके डेटा का किस तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसा तब है जब 90 दिन तक डेटा शेयर करने की सीमा फेसबुक के पिछले प्राइवेसी विवाद के बाद तय की गई थी. साल 2018 में फेसबुक द्वारा पॉलिटिकल कंसल्टिंग फर्म, कैम्ब्रिज एनालिटिका को लगभग नौ करोड़ लोगों का डेटा अनाधिकारिक तौर पर उपलब्ध करवाने का मामला सामने आया था. बाद में खुलासा हुआ कि इस जानकारी का इस्तेमाल 2017 में अमेरिका के आम चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया था.