बीते हफ्ते कराची स्थित पाकिस्तानी स्टॉक एक्सचेंज (पीएसई) पर कुछ आतंकियों ने हमला बोल दिया. खबरों के मुताबिक भारी गोला-बारूद के साथ आए चार आतंकियों ने ताबड़-तोड़ फायरिंग करते हुए पीएसई में घुसने की कोशिश की. हालांकि, सभी आतंकी पीएसई के मुख्य दरवाजे पर ही मारे गए. इस हमले में कराची पुलिस के एक जवान और स्टॉक एक्सचेंज के दो गार्ड्स की भी मौत हो गयी.

इस हमले की जिम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है. बीएलए पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में सक्रिय एक अलगाववादी संगठन है. यह दशकों से एक अलग देश की मांग कर रहा है. पाकिस्तान की सरकार और अमेरिका ने इसे आतंकी संगठन भी घोषित कर रखा है.

बीएलए इससे पहले भी पाकिस्तान की औद्योगिक राजधानी कराची में हमले को अंजाम दे चुका है. नवंबर 2018 में इस संगठन ने कराची स्थित चीन के वाणिज्यक दूतावास पर हमला किया था. हमले में दो पुलिस अधिकारियों और वीजा लेने आए पाकिस्तान के दो नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. बीते कुछ सालों से बीएलए और उससे जुड़े संगठन लगातार चीन के नागरिकों और उसकी परियोजनाओं से जुड़े लोगों को ही निशाना बना रहे हैं. पिछले चार सालों में बीएलए ऐसे एक दर्जन से ज्यादा हमलों को अंजाम दे चुका है.

बीते साल मई में बीएलए ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर के एक पांच सितारा होटल पर हमला किया था. हमले में होटल के चार कर्मचारियों और पाकिस्तानी सेना के एक जवान की मौत हुई थी. हमले के दौरान आतंकियों का निशाना होटल में रुके चीनी नागरिक थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया था. बीते साल ही मार्च में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में कार्यरत चीनी इंजीनियरों को ले जा रहे 22 वाहनों के काफिले पर कराची में हमला किया गया था. इसमें भी कुछ चीनी कर्मचारियों सहित कई लोग घायल हुए थे. इससे पहले फरवरी में बलूचिस्तान में सीपीईसी के अंतर्गत बन रहे एक मार्ग पर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. इसमें नौ लोग मारे गए थे. इस हमले को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ने वाले तीन संगठनों - बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट और बलूच रिपब्लिकन गार्ड ने - संयुक्त रूप से अंजाम दिया था.

बीएलए जिस तरह से बीते कुछ सालों से केवल चीन से जुड़े लोगों और संस्थाओं को निशाना बना रहा है. उसे देखते हुए यह सवाल उठ रहा कि इस संगठन ने आखिर पाकिस्तानी शेयर बाजार पर हमला क्यों किया. बीएलए की तरफ से कहा गया है कि इस हमले का मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और चीन को बड़ा नुकसान पहुंचाना था. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पीएसई पर हमले से चीन को किस तरह नुकसान पहुंचता?

इस सवाल का जवाब पाकिस्तान के कुछ जानकार देते हैं. इनके मुताबिक बीते सालों में चीन ने पाकिस्तानी शेयर बाजार (पीएसई) में बहुत बड़ा निवेश किया है. पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन के मुताबिक चीन ने 2016 में पीएसई के 40 फीसदी शेयर खरीद लिए थे जिसके बाद से पीएसई के मैनेजमेंट पर उसी का कब्जा हो गया है. पीएसई के 30 फीसदी शेयर शंघाई स्टॉक एक्सचेंज, शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंज और चाइना फाइनेंशियल फ्यूचर्स एक्सचेंज के पास हैं. जबकि, पांच-पांच फीसदी शेयर पाकिस्तान की दो कंपनियों के पास हैं जिनमें चीन का ही निवेश है.

यह भी बताया जाता है कि चीन पीएसई के जरिये सीपीईसी से जुडी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए अरबों डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है. पीएसई के निदेशक आबिद अली हबीब ने डॉन को पुष्टि भी की कि भारी चीनी निवेश की वजह से शेयर बाजार को धमकियां मिल रही थीं.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी चीन के खिलाफ क्यों?

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) हमेशा से अपनी मांगों को लेकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ती आई है. लेकिन, पिछले चार सालों में यह संगठन पूरी तरह से चीन के खिलाफ हो गया है.

पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों के मुताबिक इसकी वजह चीन द्वारा पाकिस्तान में किया जा रहा भारी निवेश (60 अरब डॉलर का) है. चीन के इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान में ही खर्च किया जा रहा है. दरअसल, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का सबसे अहम भाग ग्वादर बंदरगाह है, जो बलूचिस्तान में ही आता है. यही वजह है कि चीन इस प्रांत में गलियारे के साथ-साथ कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है. वह बलूचिस्तान में बुनियादी ढांचे, परिवहन और ऊर्जा परियोजनाओं जैसे एलएनजी टर्मिनल और गैस पाइपलाइन में भी निवेश कर रहा है. ग्वादर बंदरगाह के करीब ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र का भी निर्माण किया जा रहा है, जिसमें करीब पांच लाख चीनियों के रहने की व्यवस्था होगी. देखा जाए तो बलूचिस्तान चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट की रीढ़ जैसा है.

पाकिस्तानी मीडिया से जुड़े कुछ जानकार बताते हैं कि चीन के इस प्रोजेक्ट को पाकिस्तान की सरकार देश का भाग्य बदलने वाली आर्थिक गतिविधि बताती है. लेकिन, बलूचिस्तान जो इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा है, वहां के लोगों को इसका कोई फायदा नहीं हो रहा. इन जानकारों के मुताबिक चीन के इतने बड़े निवेश के बाद बलूचिस्तान के लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार आदि की उम्मीद जगी थी. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. चीनी प्रोजेक्ट्स में मैन पॉवर से लेकर मटीरियल और मशीनरी तक सब चीन के ही इस्तेमाल हो रहे हैं. प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट भी चीनी ठेकेदारों को ही दिए गये हैं.

इसके अलावा स्थानीय लोग गलियारे के लिए जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर भी खासे नाराज हैं. साथ ही बलूचिस्तान में सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता के अभाव और भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे हैं. ब्रिटेन में रह रहे चर्चित बलूच राष्ट्रवादी नेता मेहरान मिर्र एक साक्षात्कार में बलूचिस्तान के लोगों को आगाह करते हुए कहते हैं, ‘चीनियों से सावधान रहो क्योंकि ये आपके बच्चों का भविष्य खाने के लिए आ रहे हैं.’ पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सीपीईसी की घोषणा से लेकर अब तक किसी भी सरकारी दस्तावेज में यह नहीं कहा गया है कि बलूचियों को इस निवेश का कोई लाभ होगा या दिया जाएगा.

कुछ जानकार यह भी बताते हैं कि जब से बलूचिस्तान में चीन की परियोजनाओं की घोषणा हुई है, तब से वहां व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए अन्य प्रांतों के लोगों ने बड़े स्तर पर निवेश करना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब प्रांत के लोग बलूचिस्तान के ग्रामीण इलाकों में बहुत कम दामों पर जमीनें खरीद रहे हैं.

जानकारों की मानें तो बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठनों के साथ वहां के आम लोगों को भी लगता है कि चीन की सीपीईसी परियोजना की वजह से उनके यहां जो कुछ हो रहा है, वह बलूच समुदाय के लिए बड़ी तबाही जैसा होगा. इनका मानना है कि इससे न सिर्फ वे प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों की प्रचुरता वाली अपनी जमीन खो देंगे बल्कि बाहरी लोगों के बड़ी संख्या में उनके यहां बसने से वे अपनी पहचान भी खो देंगे. यही वजह है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी सहित इस प्रांत के सभी अलगाववादी संगठन चीन के खिलाफ हो गए हैं.

बीते साल बीएलए ने एक हमले के बाद पाक प्रधानमंत्री इमरान खान और चीनी सरकार के लिए एक संदेश जारी किया था. इसमें बीएलए कमांडर जीयन बलूच ने कहा था, ‘हमारे लड़ाके अपनी जमीन की रक्षा करने में सक्षम हैं. बीएलए की नीति साफ़ है कि वह चीन या किसी भी अन्य बाहरी ताकत को अपने क्षेत्र की धन-संपदा लूटने नहीं देगा. पाकिस्तान सरकार और चीन दोनों ही बलूचिस्तान में बलूचों की ही पहचान खत्‍म करना चाहते हैं... इस तरह के हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक चीन पाकिस्तान के साथ अपनी सांठगांठ को खत्म नहीं कर देता.’