सीमा पर चल रहे तनाव के बीच भारत ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए चीन से ऊर्जा संबंधी उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने राज्यों के अपने समकक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई एक बैठक में कहा, ‘कोई देश हमारी सीमा में घुसपैठ करे, यह हम बर्दाश्त नहीं कर सकते...हम चीन और पाकिस्तान से कुछ भी नहीं लेंगे.’

आरके सिंह का कहना था कि भारत ने बीते साल 71 हजार करोड़ रु के उर्जा उपकरण आयात किए और इनमें से 21 हजार करोड़ रु का आयात चीन से हुआ. ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि देश में सब कुछ बन रहा है. उनके मुताबिक चीन से आने वाले सामान में एक खतरा यह भी है कि उसमें कोई ‘मैलवेयर’ हो सकता है जिसे दूर से ही सक्रिय करके भारत के ऊर्जा तंत्र पर हमला किया जा सकता है.

इससे पहले सरकार ने 59 चीनी एप्स पर बैन लगा दिया था. इनमें टिकटॉक जैसे लोकप्रिय एप्स भी शामिल हैं. उधर, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया था कि आगे से चीनी कंपनियों या उनकी साझीदार फर्मों को भारत में हाईवे निर्माण का कोई ठेका नहीं दिया जाएगा. नितिन गडकरी का कहना था कि उन्हें सूक्ष्म, लघु या मंझोले उद्योगों में निवेश की इजाजत भी नहीं मिलेगी. सरकार के ये फैसले पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 15 जून को हुई एक भिड़ंत पर उभरे तनाव के बीच आए हैं. इस टकराव में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौर किया और इस भिड़ंत में घायल हुए सैनिकों से मुलाकात की. उन्होंने बिना नाम लिए चीन पर निशाना साधा. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘विस्तारवाद की उम्र खत्म हो गई है. यह विकास की उम्र है. इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गई हैं या वापस लौटने के लिए मजबूर हो गई हैं.’ इस पर चीन का बयान भी आया. उसका कहना था कि उसे विस्तारवादी कहना आधारहीन बात है.