पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के पीछे हटने की खबरों के बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीमा पर तनातनी कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं. खबरों के मुताबिक जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजिआन से सवाल किया गया कि क्या वे गलवान घाटी में अपने सैनिकों के पीछे हटने की पुष्टि कर सकते हैं तो उन्होंने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया. उनका कहना था, ‘चीनी और भारतीय सेना के बीच 30 जून को कमांडर स्तर की वार्ता का तीसरा दौर आयोजित हुआ. दोनों ही पक्षों के बीच सहमति बनी कि वे उन बातों पर अमल करेंगे जिसके लिए पिछले दो दौर की कमांडर स्तर की बातचीत में सहमति बनी थी. हमने सीमा पर तनातनी कम करने दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं. हमें उम्मीद है कि भारत भी अपनी तरफ से ऐसा ही करेगा.’

गलवान घाटी वही जगह है जहां 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई थी. इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के भी हताहत होने की खबरें आई थीं. इसके बाद से दोनों देश शांति बहाली की कोशिशों में लगे हैं. भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. इसी सिलसिले में कल खबर आई थी कि चीनी सेना ने गलवान घाटी सहित कुछ दूसरे इलाकों से टेंट हटा लिये हैं और वह पीछे हट रही है. खबरों के मुताबिक भारतीय सेना भी पीछे हटी है और दोनों पक्ष बीच में एक बफर जोन बनाने पर सहमत हुए हैं.

इससे पहले, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीते रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की थी. इस बातचीत को लेकर भारत स्थित चीनी दूतावास ने एक बयान जारी किया है. इसके मुताबिक दोनों प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू किया जाएगा जिसके तहत सीमावर्ती इलाकों में शांति के साथ विकास के लिए लंबे समय तक साथ काम करने की बात है. इसके अलावा दोनों देश आपसी समझौते के मुताबिक सीमा पर तनातनी को कम करने के लिए संयुक्त रूप से कोशिश करेंगे.

बयान में यह भी कहा गया है कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत के जरिए दोनों पक्ष आपसी संवाद को बेहतर बनाएंगे. इस दिशा में भारत-चीन के बीच सीमा मामलों में सलाह और संयोजन के लिए बनी व्यवस्था को नियमित करके उसे बेहतर बनाया जाएगा.