कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपित विकास दुबे की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी. इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस का बयान आया था कि एक मुठभेड़ के बाद इस खतरनाक अपराधी को घायल हालत में अस्पताल लाया गया था. लेकिन कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आरबी कमल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘विकास दुबे को चार गोलियां लगी थीं. तीन गोली सीने में और एक हाथ में. विकास दुबे को मरी हुई हालत में लाया गया था.’

उधर, कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने विकास दुबे के मारे जाने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं जिनका कानपुर के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है. उनके मुताबिक जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना की विस्तार से जानकारी दी जाएगी.

उधर, कानपुर पुलिस की ओर से घटना को लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है. इसमें कहा गया है, ‘विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस व एसटीएफ़ टीम आज दिनांक 10.07.2020 को कानपुर नगर लाया जा रहा था. कानपुर नगर भौंती के पास पुलिस का उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया, जिससे उसमें बैठे अभियुक्त व पुलिसजन घायल हो गए. इसी दौरान अभियुक्त विकास दुबे ने घायल पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की. पुलिस टीम द्वारा पीछा कर उसे घेर कर आत्मसमर्पण करने हेतु कहा गया किन्तु वह नहीं माना और पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फ़ायर करने लगा. पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की गयी, विकास दुबे घायल हो गया, जिसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान अभियुक्त विकास दुबे की मृत्यु हो गई.’

विकास दुबे की गिरफ्तारी कल मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुई थी. बताया जा रहा है कि वह सुबह करीब आठ बजे शहर के मशहूर महाकाल मंदिर में गया था. एक स्थानीय दुकानदार ने उसे पहचान लिया और पुलिस को खबर कर दी. जब वह मंदिर से बाहर निकला तो सिक्योरिटी गार्डों ने उससे पूछताछ की. इसके बाद उसे पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया. कल शाम को ही मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले किया था.

बीते हफ्ते उत्तर प्रदेश के कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों ने छापा मारने आई पुलिस की एक टीम पर हमला कर दिया था. इसमें एक डीएसपी सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. इसके बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस की 25 टीमें विकास दुबे की तलाश में जुटी थीं. बीते दो दिनों में अलग-अलग मुठभेड़ों में उसके तीन सहयोगी मारे गए थे. विकास दुबे पर हत्या सहित कई गंभीर आरोपों में 60 से भी ज्यादा मामले दर्ज थे. आरोप है कि स्थानीय थानाध्यक्ष सहित कई पुलिसकर्मियों की उसके साथ मिलीभगत थी और उनमें से ही किसी ने उसे छापे के बारे में पहले ही सूचना दे दी थी. इस घटना की वजह से पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है और 68 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच की जा रही है.