आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपित विकास दुबे की पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मौत के मामले की उत्तर प्रदेश सरकार जांच करेगी. 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी जांच के लिए दिशा-निर्देश तय किए थे. हालांकि इस जांच के नतीजे का अंदाजा कोई भी लगा सकता है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक रिकॉर्ड बताते हैं कि योगी सरकार के अब तक के कार्यकाल के दौरान मुठभेड़ के ऐसे 74 मामलों की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हो चुकी है जिनमें किसी न किसी की मौत हुई थी. इनमें से सभी में पुलिस को क्लीन चिट मिल चुकी है. 64 मामलों में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को अदालतें स्वीकार भी कर चुकी हैं.

विकास दुबे योगी सरकार के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच फायरिंग में मारा जाने वाला 119वां शख्स है. 2017 में मौजूदा सरकार का कार्यकाल शुरू होने के बाद से अब तक इस तरह के 6145 अभियान अंजाम दिए जा चुके हैं इनमें 119 लोगों की मौत हुई है और 2258 अन्य घायल हुए हैं. जिनकी मौत हुई है उनमें 13 पुलिसकर्मी हैं. इनमें से आठ तो बीते हफ्ते विकास दुबे के घर पर छापा मारने की कार्रवाई के दौरान ही शहीद हुए हैं. 885 पुलिसकर्मी इन घटनाओं में घायल हुए हैं.

एक हफ्ते से फरार चल रहे विकास दुबे की कल ही मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तारी हुई थी. मध्य प्रदेश पुलिस ने इस कुख्यात गैंगस्टर को शाम को उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपा था. पुलिस के मुताबिक वह उसे कानपुर ला रही थी कि रास्ते में गाड़ी पलट गई और इसी दौरान विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की. उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया लेकिन पुलिस का कहना है कि उसने फायरिंग शुरू कर दी और इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया गया.