विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक धारावी में कोरोना वायरस से बचाव के प्रयासों की सराहना की है. जून के महीने में हॉट-स्पॉट बन चुके धारावी में जुलाई में कोरोना संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है. डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहानम गेब्रेयेसेस ने इटली, स्पेन और साउथ कोरिया के कुछ इलाकों का जिक्र करते हुए धारावी का भी नाम लिया और कहा कि इन इलाकों ने दिखा दिया है कि अगर आक्रामक होकर लड़ा जाए तो कोरोना वायरस पर जीत पाई जा सकती है.

जेनेवा में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए टेड्रोस का कहना था कि ‘बीते छह हफ्तों में इन इलाकों में कोरोना संक्रमण के मामले दोगुने हो सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यह उदाहरण बताता है कि इस भयानक आपदा को भी सही रणनीति के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है. लोगों की आपसी मदद, टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेशन और सही समय पर इलाज के जरिए इस महामारी का फैलाव रोका जा सकता है.’ महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया है कि ‘धारावी ने कोरोना वायरस का मुकाबला जिस तरह किया, वह बड़ी बात है.’

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित धारावी 2.5 वर्ग किलोमीटर में फैली बस्ती है जहां लगभग साढ़े छह लाख लोग रहते हैं. इस बस्ती में लोग संकरी गलियों और खुले नालों-गटर के साथ जर्जर इमारतों और झोपड़ियों में रहते हैं. धारावी में पहला कोविड-19 मरीज एक अप्रैल को मिला था. वहीं, इससे करीब तीन हफ्ते पहले 11 मार्च को मुंबई में पहला संक्रमित व्यक्ति मिला था.

बीते शुक्रवार को कोविड-19 के 12 नए मामले आने के साथ ही धारावी में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,359 हो गई. बीएमसी के मुताबिक मुंबई के धारावी में इस समय केवल 166 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि 1952 मरीजों को अब तक अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है. मुंबई में कोविड-19 के कुल 88,000 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 5,129 लोगों की मौत हो चुकी है.