लद्दाख में भारत और चीन में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा तनाव के बीच पैंगॉन्ग सो और डेपसांग समेत कुछ हिस्सों में दोनों सेनाओं के पीछे हटने में अभी और वक्त लग सकता है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो दोनों पक्षों में फिलहाल पीछे हटने की चरणबद्ध प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं बन सकी है. भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच पीछे हटने के विस्तृत प्रस्ताव, विकल्पों और एक-दूसरे की चिंताओं को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं. बीते मंगलवार को हुई बैठक तो 14 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली थी.

भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर हुआ हालिया तनाव 15 जून को तब चरम पर पहुंच गया था जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी. इसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए तो चीन के भी कई सैनिकों के हताहत होने की खबरें आईं. इसके बाद चीन ने गलवान घाटी सहित कई इलाकों पर दावा किया जिसे भारत ने खारिज कर दिया. दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों के बीच कई वार्ताओं के बाद सहमति बनी है कि दोनों देशों की सेनाएं अपनी-अपनी जगहों से पीछे हटेंगी और बीच में एक नो मैंस लेंड यानी बफर जोन होगा.