अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच1-बी वीजा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ 174 भारतीय अदालत चले गए हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कानूनी कार्रवाई की तरफ बढ़ने वाले इन 174 भारतीयों के समूह में 7 अवयस्क हैं. बीते जून में राष्ट्रपित ट्रंप ने कई तरह के कामकाजी वीजा रद्द कर दिए थे. एच-1बी वीजा भी इस में शामिल है और इसे हासिल करने वालों में 70 फीसदी भारतीय हैं. अब इस वीजा पर गए प्रवासी पेशेवरों को साल के अंत तक देश वापस आना होगा.

यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, कोलंबिया में दायर किए मामले में कहा गया है कि राष्ट्रपति की यह घोषणा गैरकानूनी है. फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मामले को देख रहे वकील वास्डेन बानियस का कहना है कि ‘एच-1बी/एच-4 वीजा से जुड़ी घोषणा यूनाइटेड स्टेट्स की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली, परिवारों को तोड़ने वाली और संसद की अवहेलना करने वाली है. इसके कुछ हिस्से जहां अमेरिका का गैरजरूरी तरीके से बचाव करते हैं वहीं कुछ सीधे कानून के खिलाफ हैं.’ इस मामले में जज ने विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो, कार्यकारी सुरक्षा मंत्री चैड एफ वोल्फ और श्रम मंत्री यूजीन स्कालिया को सम्मन जारी किया है.

बीते मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अमेरिका में पढ़ाई करने वाले प्रवासी छात्रों से जुड़े नए वीजा नियम वापस लिए थे. इनके तहत उन विदेशी छात्रों को वापस भेजा जाना था जिनकी क्लासें पूरी तरह से ऑनलाइन चल रही हैं. सरकार की इस योजना के विरोध में एमआईटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे कई संस्थान अदालत चले गए थे. गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी छात्रों का समर्थन करते हुए मामले में पक्षकार बन गई थीं. ये कंपनियां एच-1बी और एच-4 सरीखे कामकाजी वीजा रद्द किए जाने का विरोध कर रही हैं.