अमेरिका में इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन ने सांसद कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. सुसान राइस, कैरेन बास जैसे दिग्गजों को पछाड़कर उपराष्ट्रपति की उम्मीदवार बनीं कमला हैरिस जमैकाई और भारतीय मूल की पहली अमेरिकी महिला होंगी, जो एक बड़ी राजनीतिक पार्टी से इस पद के लिए चुनाव लड़ेंगी.

बुधवार को जो बिडेन ने अपने चुनाव प्रचार से जुड़े एक मेल में कहा, ‘मुझे किसी ऐसे शख़्स का साथ चाहिए जो स्मार्ट हो, कड़ी मेहनत करे और नेतृत्व के लिए तैयार रहे. कमला वो शख़्सियत हैं.’ अमेरिकी राजनीति के जानकार भी कहते हैं कि कमला हैरिस में वे सारी खूबियां हैं जो चुनाव में पार्टी का फायदा करवा सकती हैं. वे एक प्रवासी परिवार से हैं, काली महिला हैं, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान है, एक बड़े राज्य और देश में भी उन्हें नेतृत्व का अनुभव है. इन लोगों के मुताबिक इन सारी खूबियों के चलते ही कमला हैरिस पहले दिन से ही उपराष्ट्रपति के दावेदारों में सबसे आगे नजर आ रहीं थीं.

अमेरिका में ‘फीमेल ओबामा’ के नाम से जानी जाने वाली 55 वर्षीय कमला हैरिस ने 2016 में कैलिफोर्निया से सीनेट का चुनाव जीता था. ऐसा करके वे अमेरिका में अब तक की दूसरी और पिछले 20 सालों में सीनेट पहुंचने वाली पहली अश्वेत यानी काली महिला बनी थीं.

स्वभाव से काफी तेजतर्रार हैरिस एक भारतीय ब्रेस्ट कैंसर सर्जन श्यामला गोपालन की बड़ी बेटी हैं. गोपालन 1960 में चेन्नई से अमेरिका गई थीं और फिर वहीं बस गईं. वहां उन्होंने इकनॉमिक्स के प्रोफेसर डोनाल्ड हैरिस से शादी की. हालांकि, जमैकन मूल के हैरिस के साथ उनकी यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली. जल्द ही दोनों अलग हो गए. तब कमला हैरिस की उम्र पांच साल थी. इसके बाद हैरिस और उनकी छोटी बहन माया की परवरिश उनकी मां ने ही की. इसका एक मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि उन पर जमैका से ज्यादा भारतीय संस्कृति का प्रभाव होना चाहिए.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई करने के बाद हैरिस ने कई साल तक एक वकील के तौर पर काम किया. इसके बाद 1990 में उन्हें कैलिफोर्निया के अल्मिडा शहर की उप डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी बनने का मौका मिला. 2003 में उन्हें सैन फ्रांसिस्को की ‘डिस्ट्रिक्ट गवर्नर’ चुना गया. इस मुकाम तक पहुंचने वाली वे पहली महिला थीं और इस चुनाव में उन्होंने अपने बॉस रह चुके टेरेंस हलिनन को हराकर कइयों को चौंका दिया था.

यह चुनाव भी काफी उतार-चढ़ाव भरा था. दरअसल, इस दौरान टेरेंस हलिनन ने एक गंभीर आरोप लगाया था. उनका कहना था कि कमला हैरिस ने सैन फ्रांसिस्को के तत्कालीन गवर्नर विली ब्राउन को प्रेम संबंधों में फंसाकर उनके जरिये कई अहम पद हासिल किए हैं. लेकिन इन आरोपों के बावजूद कमला हैरिस ने हलिनन पर बड़ी जीत हासिल की. जानकार कहते हैं कि उस चुनाव में ही कइयों को कमला हैरिस की राजनीतिक कुशलता का अहसास हो गया था. इन लोगों के मुताबिक तब उन्होंने हलिनन को उन्हीं के खेल में मात दे दी थी. कमला हैरिस ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बड़ी चतुराई से महिला विरोधी रंग देकर अपने पक्ष को मजबूत कर लिया था.

बीते बुधवार को चुनाव प्रचार के दौरान जो बिडेन और कमला हैरिस | फोटो : एएफपी

दो बार सैन फ्रांसिस्को की ‘डिस्ट्रिक्ट गवर्नर’ बनने के बाद कमला हैरिस ने 2011 में कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल पद के लिए दावेदारी ठोकी और कई महारथियों को पछाड़ते हुए लगातार दो बार राज्य की अटॉर्नी जनरल बनीं. कमला हैरिस इस पद पर चुनी जाने वाली पहली अश्वेत महिला थीं.

अमेरिकी पत्रकारों की मानें तो अटॉर्नी जनरल बनने के बाद कमला हैरिस ने अपने काम के दम पर तेजी से डेमोक्रेटिक पार्टी के उच्चपदस्थ लोगों के बीच अपना दबदबा बनाया. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने कार्यकाल के दौरान कई बार उनकी तारीफों के पुल बांधते नजर आए थे. अपनी पार्टी में यह कमला हैरिस का कद ही था कि जब 2016 में उन्होंने कैलिफोर्निया से सीनेटर के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया तो उन्हें किसी बड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. यहां तक कि इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी का कोई सदस्य खड़ा नहीं हुआ था. इस चुनाव में उन्होंने अपनी ही पार्टी की कद्दावर नेता और 20 साल से अमेरिकी संसद के निचले सदन - हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सदस्य रहीं - लोरट्टा संचेज़ को बहुत बड़ी शिकस्त दी थी.

कमला हैरिस की लगातार हो रही चुनावी जीतों की सबसे बड़ी वजह गरीब, अश्वेतों, अल्पसंख्यकों, प्रवासियों और समलैंगिकों के बीच बनी उनकी मजबूत पकड़ को बताया जाता है. उन्होंने इन लोगों के लिए कई बड़ी कानूनी लड़ाइयां लड़ी हैं. इन लड़ाइयों के दौरान कई बार तो वे अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गईं. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इन तबकों से आने वाले ज्यादातर लोग यह तक कहते हैं कि हैरिस उनके हक के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं.

कमजोर तबकों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने की वजह भी कमला हैरिस खुद बताती हैं. एक साक्षात्कार में वे कहती हैं, ‘बचपन से ही मैं ऐसे माहौल में पली-बढ़ी हैं जहां मैंने अन्याय के खिलाफ लोगों को लड़ते देखा ... मेरे माता-पिता भी नस्लभेद के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लिया करते थे. बर्कले शहर में हमारे रंग की वजह से गोरे पड़ोसियों के बच्चे मेरे और मेरी बहन के साथ खेला नहीं करते थे.’ कमला हैरिस के मुताबिक इन्हीं सब सामाजिक बुराइयों को देखते हुए उन्होंने वकालत के पेशे को अपनाने का निर्णय लिया था. दरअसल, उस समय वे अच्छे से जान गई थी कि अगर किसी को न्याय दिलाना है तो आंदोलनों से कहीं ज्यादा जरूरी कानूनी लड़ाई लड़ना है.

कमला हैरिस के सीनेट में पहुंचने के बाद से उन्होंने हर मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप का जमकर विरोध किया है. गन कंट्रोल और अल्पसंख्यकों सहित तमाम मुद्दों पर ये दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं. इसके अलावा जहां कमला हैरिस प्रवासियों की बड़ी हमदर्द बनी हुई हैं वहीं ट्रंप को प्रवासी फूटी आंख नहीं सुहाते. जो बिडेन द्वारा उपराष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस को चुने जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि वे सबसे ज्यादा घटिया, खराब और बिना तहज़ीब वाली सीनेटर थीं. जानकारों के मुताबिक ट्रंप को कमला हैरिस के जो बिडेन की रनिंग मेट बनने से 30 लाख से ज्यादा उन भारतीयों के डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रुख करने का डर भी सता रहा है जिन्हें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिये अपने पाले में करने की कोशिश करते रहे हैं.

अमेरिका की राजनीति में ओबामा और हिलेरी के जाने के बाद अब जो लोग ट्रंप विरोधी राजनीति के केंद्र में दिख रहे हैं उनमें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन और कमला हैरिस का नाम सबसे ऊपर नजर आता है, और यही कारण है कि अमेरिकियों के एक बड़े वर्ग की उम्मीदें अब अगले चुनाव में इन दोनों डेमोक्रेटिक नेताओं पर आकर टिक गई हैं.