पिछले पांच दशकों से एक दूसरे के साथ 36 का आंकड़ा रखने वाले अमेरिका और क्यूबा ने अब रिश्ते सुधारने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढा दिया है. दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों को बहाल करते हुए अपनी-अपनी राजधानियों में स्थित एक-दूसरे के दूतावासों के दरवाजे खोल दिए हैं. इस फैसले का औपचारिक ऐलान करते हुए अमेरिका और क्यूबा ने दुश्मनी खत्म करने और मिलजुल कर काम करने की सहमति जताई है. दुनियाभर के देश इस बहुप्रतीक्षित फैसले पर कई दिनों से टकटकी लगाए हुए थे.
इस घटना को ओबामा के दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति से जुड़ी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंधों की बहाली की कोशिशें लगभग दो साल पहले से चल रही थीं. बताया जाता है कि पिछले 18 महीने में ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उऩके क्यूबाई समकक्ष राउल कास्त्रो इस संबंध में कई गुप्त वार्ताएं कर चुके थे. इस घटना को ओबामा के दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति से जुड़ी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. ओबामा ने पिछले साल पहली बार सार्वजनिक तौर पर साम्यवादी देश क्यूबा के साथ 50 सालों की अनबन को बुरा अनुभव करार देते हुए आपसी सहयोग का नया दौर शुरू करने की घोषणा की थी. इसकी पहल करते हुए उन्होंने क्यूबा पर लगे तमाम आर्थिक प्रतिबंध भी हटा दिए थे. इसके बाद क्यूबा ने भी अमेरिका को लेकर अपने रूख में नरमी लानी शुरू की, जिसका नतीजा आज सामने है.
तुर्की में आतंकी हमला
तुर्की में हुए एक आतंकी हमले में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. इस हमले में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की भी खबर है. अब तक मिली सूचनाओं के मुताबिक यह हमला तुर्की और सीरिया की सीमा के करीब स्थित सुरूक इलाके में उस वक्त हुआ जब वहां एक कार्यक्रम चल रहा था. तुर्की सरकार ने इसे एक आत्मघाती हमला बताते हुए 27 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है. इस हमले के पीछे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है. आईएस पिछले साल सितंबर से इस इलाके में कई छोटे-बड़े हमलों को अंजाम दे चुका है. उसके खौफ के चलते इस इलाके से भारी पैमाने में लोगों का पलायन भी हुआ है.
अमेरिकी हमले में 14 अफगान सैनिकों की मौत
तालिबानी आतंक से जूझ रहे अफगानिस्तान को अपने 'मददगार' अमेरिका की चूक का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा है. अमेरिकी सैन्यबलों द्वारा गलती से किए गए एक हवाई हमले में उसके 14 सैनिकों की मौत हो गई. यह हादसा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के दक्षिणी इलाके लोगार में हुआ. इस इलाके में स्थित एक अफगानी सुरक्षा चौकी को तालिबानी आतंकियों का ठिकाना समझ कर अमेरिका के दो हेलिकॉप्टरों ने बम बरसा दिए जिसके बाद चौकी में आग लग गई. अमेरिकी अधिकारियों ने इस चूक को स्वीकार करते हुए इसकी जांच करने की बात कही है. पिछले साल दिसंबर में भी अमेरिका की अगुवाई वाली नाटो सेना ने इस इलाके में गलती से एक हवाई हमला कर दिया था. उस हमले में पांच अफगानी नागरिकों की मौत हो गई थी. उस हमले के बाद नाटो ने इलाके से अपनी फौज हटाते हुए तालिबान से लड़ने का जिम्मा पूरी तरह स्थानीय सुरक्षाबलों पर छोड़ दिया था. लेकिन तालिबान के बढते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका ने अफगान सेनाओं को दी जाने वाली मदद कुछ हद तक जारी रखी. इसी मदद के तहत अमेरिकी सेना तालिबान पर अक्सर हवाई हमले करती है.