अमेरिका और क्यूबा की ऐतिहासिक शुरुआत | सोमवार, 20 जुलाई 2015
पिछले पांच दशकों से एक दूसरे के साथ 36 का आंकड़ा रखने वाले अमेरिका और क्यूबा ने रिश्ते सुधारने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढा दिया. दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों को बहाल करते हुए अपनी-अपनी राजधानियों में स्थित एक-दूसरे के दूतावासों के दरवाजे खोल दिए. दुनियाभर के देश इस बहुप्रतीक्षित फैसले पर कई दिनों से टकटकी लगाए हुए थे. अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंधों की बहाली की कोशिशें लगभग दो साल पहले से चल रही थीं. इस घटना को ओबामा के दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति से जुड़ी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. ओबामा ने पिछले साल पहली बार सार्वजनिक तौर पर साम्यवादी देश क्यूबा के साथ 50 सालों की अनबन को बुरा अनुभव करार देते हुए आपसी सहयोग का नया दौर शुरू करने की घोषणा की थी. इसकी पहल करते हुए उन्होंने क्यूबा पर लगे तमाम आर्थिक प्रतिबंध भी हटा दिए थे. इसके बाद क्यूबा ने भी अमेरिका को लेकर अपने रूख में नरमी लानी शुरू की.
उत्तर कोरिया ने कहा, परमाणु कार्यकम पर समझौते की अटकलें बेबुनियाद | मंगलवार, 21 जुलाई 2015
उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया के बाकी देशों के साथ किसी भी तरह के समझौते की अटकलों को खारिज किया. उसने कहा कि वह बिना किसी दबाव में आए अपने परमाणु कार्यक्रम को पहले की तरह ही आगे भी जारी रखेगा. उत्तर कोरिया ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब ईरान की तर्ज पर दुनिया के छह सबसे ताकतवर देशों द्वारा उसके साथ भी परमाणु समझौता करने की अटकलें लगाई जा रही हैं. इन अटकलों के सामने आने के बाद अपने परमाणु कार्यकम का बचाव करते हुए उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम किसी भी देश के खिलाफ नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए है. उसका कहना था, ‘उत्तर कोरिया को अमेरिका से परमाणु हमले का खतरा है. ऐसे में हम अपनी परमाणु क्षमता को सीमित नहीं कर सकते.’
बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए चीन की नई योजना | बुधवार, 22 जुलाई 2015
दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन ने इस पर लगाम लगाने के लिए यूं तो पहले ही कई तरह के नियम कायदे लागू किए हुए हैं, लेकिन इस बार उसने खास तौर से शहरी आबादी को नियंत्रित करने के लिए एक योजना बनाई है. चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली में छपी एक खबर के मुताबिक राजधानी बीजिंग समेत चीन के प्रमुख शहरों में अब किसी भी दूसरे शहर से आने वाले नागरिक को बसने की इजाजत नहीं दी जाएगी. ऐसा इन शहरों की जनसंख्या को पूरी तरह सीमित कर देने के मकसद से किया जाएगा. चीन सरकार इस साल के अंत तक राजधानी बीजिंग की जनसंख्या को 2.18 करोड़ से आगे नहीं बढ़ने देने का प्रयास कर रही है. अखबार के मुताबिक इसके लिए बीजिंग प्रशासन को हर तरह के आक्रामक कदम उठाने को कह दिया गया है. पिछले कुछ सालों से इस शहर की जनसंख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसके चलते इसके सामने संसाधनों से स्तर पर कई तरह का दबाव बढ़ता जा रहा है.
चीन के विरोध के बावजूद म्यांमार ने 153 चीनियों को उम्रकैद की सजा सुनाई | गुरूवार, 23 जुलाई 2015
म्यामांर की एक अदालत ने चीन के 153 नागरिकों को अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. दो और चीनी नागरिकों को इसी जुर्म में 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई. इन सभी पर अवैध रूप से म्यांमार में रहने का आरोप भी लगाया गया था. इससे नाराज चीन ने विरोध जताते हुए म्यांमार से इस फैसले को निरस्त करने और सभी नागरिकों को उसे वापस सौंपने को कहा. चीनी मीडिया का कहना है कि म्यांमार ने चीन के प्रति दुराग्रह के चलते इतना कठोर फैसला सुनाया है. वहीं म्यांमार का कहना है कि सजा पाने वाले चीनी नागरिकों के पास फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाने का विकल्प खुला है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन लोगों को म्यांमार के उतरी राज्य काचिन के एक इलाके से इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था. चीन ने तब भी म्यांमार से इन लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग की थी, लेकिन उसने यह मांग ठुकरा दी थी.
जापान और चीन के बीच टकराव की नौबत | शुक्रवार, 24 जुलाई 2015
जापान की आपत्ति को दरकिनार करते हुए चीन ने दक्षिणी चीन सागर के विवादित इलाके में ईंधन की खोज के लिए खुदाई जारी रखने की बात कही. उसका कहना है कि उसे तेल तथा गैस की खोज के लिए इस इलाके में खुदाई करने का पूरा अधिकार है. जापान को दो टूक शब्दों में जवाब देते हुए चीन ये यह भी कहा कि वह जापान द्वारा अपने और उसके बीच निर्धारित की गई विभाजन रेखा को स्वीकार नहीं करता. कुछ दिन पहले ही जापान ने चीन के खोजी अभियान पर आपत्ति जताते हुए उससे दक्षिणी चीन सागर के विवादित जल क्षेत्र में ईंधन की खोज के लिए बनाए जा रहे प्लेटफार्म का निर्माण कार्य रोकने को कहा था. जापान ने चीन के इस कदम को साल 2008 में हुए उस समझौते के खिलाफ भी बताया था जिसके तहत दोनों देश इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का संयुक्त रूप से उपयोग करने के लिए राजी हुए थे. लेकिन चीन के इस जवाब के बाद उसके और जापान के बीच टकराव तेज होने की नौबत आ गई है. दक्षिणी चीन सागर स्थित इस विवादित क्षेत्र को लेकर इन दोनों देशों के बीच पिछले कई सालों से स्थितियां तनावपूर्ण बनी हुई हैं.
यमन में युद्धविराम | शनिवार, 25 जुलाई 2015
बीते मार्च से यमन पर बम बरसा रहे सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन ने पांच दिन के एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की. इसका मकसद सहायता एजेंसियों की वहां राहत पहुंचाने में मदद करना है. शिया हूती विद्रोहियों ने यमन के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया है. वहां के राष्ट्रपति ए मंसूर हादी ने सऊदी अरब में शरण ले रखी है. इस कब्जे को अवैध करार देते हुए सऊदी अरब सहित कई देशों का गठबंधन हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है. दोनों पक्षों के बीच हो रहे इस टकराव में अब तक कई बच्चों सहित सैकड़ों बेगुनाहों की जान जा चुकी है. युद्धविराम के ऐलान ऐन पहले हुए सऊदी अरब के हमले में 80 लोगों की मौत की खबर है. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ ने दो बार युद्धविराम करवाने की कोशिश की थी लेकिन यह असफल रही.