अखिलेश यादव, उनकी सरकार के तमाम मंत्रियों और पार्टी नेताओं को सरेआम डपट रहे मुलायम सिंह यादव आजकल केंद्र सरकार से भी इतने नाराज क्यों हैं?
‘उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार का कामकाज ठीक नहीं चल रहा. मंत्री अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे.’ यह किसी विरोधी राजनेता का आरोप नहीं है बल्कि खुद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की राय है. लखनऊ में 6 अगस्त को जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव अपनी सरकार के कामकाज से बेहद नाराज नजर आए. उन्होंने किसानों की आपदा राहत के लिए केन्द्र सरकार के सामने ठीक से पैरवी न करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी मंच पर ही डपट दिया. उन्होंने कहा केन्द्र सरकार का लिखा पत्र मुझे दीजिए मैं खुद दिल्ली में पैरवी करूंगा. अपना संबोधन ठीक से न सुनने पर भी उन्होंने अखिलेश की ओर नाराजगी से देखकर पूछा - बताइए क्या कह रहे थे हम? इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री से मुखातिब होते हुए पूछा कि 'आपके मंत्री क्या काम कर रहे हैं? मेरे पास रिपोर्ट आ रही है कि आपके ज्यादातर मंत्री चुनाव हारने वाले हैं. वे जनता से कटे हुए हैं. कुछ पूछिए उनसे, जो आपकी नहीं सुनते, हमें उनकी रिपोर्ट दीजिए.'
अपना संबोधन ठीक से न सुनने पर भी उन्होंने अखिलेश की ओर नाराजगी से देखकर पूछा - बताइए क्या कह रहे थे हम?
मुलायम इस बात से भी बहुत आहत दिखे कि प्रदेश में अपनी सरकार होने के बाद भी समाजवादी पार्टी को लोकसभा चुनाव में पांच ही सीटें मिलीं. उन्होंने कहा दिल्ली में लोग कमेंट करते हैं कि पाचों सांसद एक ही परिवार से हैं. हमें कमजोर करके दिल्ली भेजा गया. अगर हमारे तीस सांसद भी होते तो सरकार बनाने में हमारी अहम भूमिका होती. उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा, 'मैने लोकसभा चुनाव में पराजय के कारणों की समीक्षा करने को कहा था. क्या आपने हार के कारणों की समीक्षा की, क्यों समीक्षा नहीं हुई. मिनिस्टर हार के लिए जिम्मेदार हैं, इसीलिए वे हार के कारण नहीं बता रहे. अपनी कमजोरी कब तक छिपाएंगे.'
मुलायम सिंह यादव यहीं नहीं रूके. अपना संबोधन ध्यान से न सुनने के लिए अखिलेश यादव को दो से ज्यादा बार टोका और पंचायत चुनावों की तैयारी को लेकर भी काफी नाराज दिखे. पूछा पंचायत चुनावों की क्या तैयारी है? फिर खुद ही जवाब दिया. हमें लगता है कुछ भी तैयारी नहीं है. उन्होंने कहा विधानसभा चुनाव में किसी भी ऐसे आदमी को टिकट नहीं दिया जाएगा जो ठेकेदारी करता हो कमीशनखोरी करता हो. महिलाओं के समाजवादी पार्टी से कटते जाने पर भी वे चिंतित दिखे. कहा - हमारी सभाओं में महिलाएं क्यों कम हो रही हैं. कहीं उन्हें बुरी नजर से तो नहीं देखा जाता. मुख्यमंत्री जी, आप बताइए, पता कीजिए ऐसा क्यों हो रहा है?
अपनी पिछली सरकार में भी अंतिम महीनों में मुलायम इसी तरह निराश दिखते थे. तो क्या मुलायम की निराशा आसन्न पराजय का पूर्व संकेत है?
वैसे तो मुलायम पहले भी कई बार मुख्यमंत्री सहित अपने मंत्रियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को डांटते-डपटते रहे हैं, लेकिन किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में यह पहला मौका है जब उन्होंने मुख्यमंत्री सहित सबको लताड़ लगाई हो. प्रदेश सरकार के अधिकतर मंत्रियों के हार जाने की आशंका जताकर एक तरह से उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा हाल में समाजवादी प्रबुद्ध सभा में जाहिर की गई हताशा को ही आगे बढ़ाया है. ‘जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है’, ऐसे मुलायम, जनेश्वर मिश्र पार्क में जिस तरह निराश दिखे वह स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार की गाड़ी पटरियों पर ठीक से तालमेल बिठा नहीं पा रही है. अपनी पिछली सरकार में भी अंतिम महीनों में मुलायम इसी तरह निराश दिखते थे. तो क्या मुलायम की निराशा आसन्न पराजय का पूर्व संकेत है?
मुलायम सिंह ने अपने संबोधन में एक और बात पर निराशा जाहिर की. उन्होंने केन्द्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि वह सीबीआई का दुरूपयोग कर रही है. उन्होंने कहा पहले कांग्रेस ऐसा करती थी और अब बीजेपी भी वही कर रही है. हमें परेशान किया जा रहा है.
जानकार मुलायम के इस बयान को यादव सिंह प्रकरण से जोड़ कर देख रहे हैं. इस तरह की चर्चाएं हैं कि यादव सिंह के दागी साथियों में समाजवादी पार्टी के भी कुछ बड़े नाम शामिल हैं. इसीलिए समाजवादी पार्टी यादव सिंह प्रकरण में सीबीआई जांच टलवाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. इन चर्चाओं को इस बात से भी बल मिलता है कि यादव सिंह के ठिकानों पर सीबीआई छापों के बीच में ही प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी. इसमें हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के साथ-साथ केन्द्र के उस निर्देश पर भी सवाल उठाए गए थे जिसमें यादव सिंह से जुड़े सारे दस्तावेज काले धन के लिए गठित एसआईटी को सौंपने को कहा गया था.
मुलायम सिंह की नाराजगी और परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है कि यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच का आदेश हाईकोर्ट ने अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर दिया था
हालांकि मुलायम सिंह के बयान के अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच को बेहद जरूरी बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज कर दिया. बावजूद इसके कि सरकार ने इस मामले की जांच के लिए गठित वर्मा आयोग के कार्यकाल को 6 महीने और बढ़ाने के बाद उसकी अंतरिम रिपोर्ट पर यादव सिंह के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज करा दी थी. साथ ही सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी भी गठित कर दी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील कपिल सिब्बल के हर दावे को खारिज करते हुए इस याचिका को भी खारिज कर दिया.
तेजी से घट रहे इस घटनाक्रम के बीच लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में मुलायम की नाराजगी, निराशा के तार कहीं न कहीं अगले चुनाव में पराजय की आशंका के साथ-साथ यादव सिंह प्रकरण से जुड़ते भी दिखाई दे रहे हैं. मुलायम सिंह की नाराजगी और परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है कि यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच का आदेश हाईकोर्ट ने उन नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर दिया था जिनके आईपीएस पति – अमिताभ ठाकुर – को प्रदेश सरकार ने हाल ही में निलंबित किया है. अपने निलंबन से ठीक पहले अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह यादव पर उन्हें धमकाने के आरोप लगाए थे. इसीलिए लोगों को लगता है कि यादव सिंह प्रकरण में सीबीआई की ताबड़तोड़ कार्रवाई कई तरह से सपा सुप्रीमो की दुखती रगें छेड़ रही है.