जॉन कैरी ने परमाणु समझौते पर खाड़ी देशों से बात की | सोमवार, 3 अगस्त 2015
ईरान के साथ हुए परमाणु कार्यक्रम समझौते को लेकर खाड़ी देशों की शंकाओं को दूर करने कतर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि इस समझौते से उन्हें किसी तरह का खतरा नहीं होगा. उन्होंने इन देशों के शीर्ष नेताओं से बात करते हुए कहा कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना है न कि उसे किसी भी तरह की दूसरी ताकत देना. खाड़ी सहयोग परिषद के इन सदस्य देशों को आशंका है कि परमाणु समझौते के बाद ईरान इस पूरे इलाके में अपना दखल बढ़ा सकता है. कैरी ने कहा कि खाड़ी देशों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि समझौते के बाद भी अमेरिका ईरान की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेगा.
ब्रिटेन 2017 तक इराक में हवाई हमले जारी रखेगा | मंगलवार, 4 अगस्त 2015
ब्रिटेन ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ इराक में चल रहे अपने हवाई अभियान को विस्तार देने की बात कही है. इस फैसले की जानकारी देते हुए ब्रिटिश रक्षा मंत्री माइकल फैलन ने कहा कि इराक में मौजूद ब्रिटिश सैन्य दल इस्लामिक स्टेट के खिलाफ मार्च 2017 के आखिर तक हवाई हमले जारी रखेगा. इराक की राजधानी बगदाद पहुंचे माइकल फैनल ने एक साक्षात्कार में यह बात कही. हालांकि फैनल ने साफ किया कि उनकी सेना आईएस के खिलाफ किसी भी तरह की जमीनी लड़ाई में भाग नहीं लेगी. 6 साल तक इराक में सैन्य अभियान चलाने के बाद ब्रिटेन ने साल 2009 में यहां से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाया था. लेकिन 2014 में अमेरिका की अपील के बाद वह फिर से वहां पहुंच गया है.
रूस ने उत्तरी ध्रुव और अंटार्कटिक महासागर के बड़े हिस्से पर दावा ठोका | बुधवार, 5 अगस्त 2015
रूस ने उत्तरी ध्रुव समेत अंटार्कटिक महासागर के बड़े हिस्से (लगभग 12 लाख वर्ग मीटर) पर नये सिरे से अपना आधिकारिक दावा ठोक दिया है. न्यूयार्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक उसने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की समुद्री सीमाओं संबंधी मामला देखने वाली समिति के सामने 4 अगस्त को ऐसा दावा किया है. यदि यह समिति रूस के दावे को मान लेती है तो उत्तरी ध्रुव और अंटार्कटिक महासागर के इस क्षेत्र में होने वाली आर्थिक गतिविधियों पर रूस का नियंत्रण स्थापित हो जाएगा. रूस ने 1982 में बने उस अंतर्राष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए यह दावा किया है. इस कानून के मुताबिक कोई भी संप्रभु देश अपने तटीय क्षेत्रों में होने वाली आर्थिक गतिविधियों पर अधिकार मांग सकता है. उसने साल 2002 में पहली बार यह दावा किया था, लेकिन तब इसे यूएन ने खारिज कर दिया था.
दक्षिणी चीन सागर में निर्माण कार्य बंद कर दिया है : चीन | गुरुवार, 6 अगस्त 2015
चीन ने कहा है कि उसने दक्षिण चीन सागर में चल रहे सारे निर्माण कार्य रोक दिए हैं. उसकी यह प्रतिक्रिया इस विवादित इलाके में निर्माण संबंधी गतिविधियों पर अमेरिका द्वारा रोक लगाए जाने की मांग पर आई है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि ‘चीन बाकी देशों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह के विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाने के लिए प्रतिबद्ध है.' दक्षिण चीन सागर के इस जलक्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर चीन अपना दावा जताता आया है. दूसरी तरफ फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान, ब्रुनेई औऱ जापान जैसे देश भी हैं जो चीन के इस दावे का विरोध कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चीन अपनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करने के उद्देश्य से इस जलक्षेत्र में हैलीपैड, एयर स्ट्रिप्स और प्लेटफार्मों का निर्माण कर रहा है.
यूएन ने रासायनिक हथियारों के हमलावरों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया | शुक्रवार, 7 अगस्त 2015
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया में हुए गृहयुद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का प्रयोग करने वाले हमलावरों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का प्रस्ताव पास कर दिया है. इस प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद के सभी 15 देशों ने एकमत से सहमति की मुहर लगाई है. अमेरिका और रूस के बीच इस मुद्दे पर हाल ही में बनी सहमति के बाद रासायनिक हथियारों की रोकथाम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र का यह बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे पहले सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-बशद भी इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दे चुके हैं. सीरिया में चार साल तक चले आंतरिक संघर्ष के दौरान सरकार और विद्रोही एक दूसरे पर बड़े पैमाने पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं.
इजरायल ने ईरान के वैज्ञानिकों को धमकी दी | शनिवार, 8 अगस्त 2015
'यदि ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों के साथ कुछ अप्रिय घटता है तो उसकी जिम्मेदारी इजरायल की नहीं होगी' इजरायल के रक्षामंत्री मोशे यालोन ने एक जर्मन पत्रिका ‘डेर स्पीगल’ को दिए इंटरव्यू में यह धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि, ‘हम हर कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए हमें जो कुछ भी जरूरी लगेगा हम वैसा करने से पीछे नहीं हटेंगे.’ उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इजरायल के लिए बड़ा खतरा बताते हुए उसके और 6 देशों के बीच हुए समझौते को ऐतिहासिक गलती बताया. उन्होंने कहा कि ‘इसके जरिए पश्चिमी देशों ने परमाणु हमले के खतरे को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसे महज कुछ वक्त के लिए टाल दिया है.’ हालिया समय में यह पहला मौका है जब इजरायल ने इरान के परमाणु वैज्ञानिकों को लेकर इतनी गंभीर धमकी दी है. इससे पहले ईरान उस पर अपने पांच वैज्ञानिकों की हत्या करने का आरोप लगा चुका है.