फ्रांस में कैले शहर में बसा जंगल कैंप उस शरणार्थी संकट की कई परतें दिखाता है जिससे इन दिनों पूरा यूरोप परेशान है.
जहां-तहां बिखरा कूड़ा, एक पाइपलाइन से लीक होती पानी की फुहार में नहाते लोग, लकड़ियों के चूल्हे से उठता धुआं और दूर तक झोपड़ियों की कतार. यह वर्णन मुंबई की धारावी या फिर किसी गरीब देश की ऐसी ही झुग्गी बस्ती का लग सकता है, लेकिन यह जगह यूरोप में है और वह भी फ्रांस में जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां रहने का मतलब है जिंदगी आनंद से बिताना.
लेकिन कैले के बाहरी इलाके में बने जंगल कैंप में रह रहे हजारों लोगों की जिंदगी में आनंद के अलावा सब कुछ है. हालात के मारे ये लोग सीरिया, इराक, मिश्र, अफगानिस्तान, सूडान, इथियोपिया जैसे देशों से ठोकरें खाते हुए उत्तरी फ्रांस के इस शहर पहुंचे हैं. जहाजों में छिपते-छिपाते इस बंदरगाह शहर तक पहुंचे ये शरणार्थी अपनी बाकी जिंदगी फ्रांस, ब्रिटेन, इटली या यूरोप के किसी ऐसे ही देश में बिताना चाहते हैं. चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े. इसमें अपनी जान दांव पर लगाना भी शामिल है. बीते दो महीनों के दौरान ही यहां से अवैध तरीके से ब्रिटेन में घुसने की कोशिश करने वाले दर्जन भर लोगों की मौत हो चुकी है.
जहाजों में छिपते-छिपाते इस बंदरगाह शहर तक पहुंचे ये शरणार्थी अपनी बाकी जिंदगी यूरोप में बिताना चाहते हैं. चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े.
दरअसल कैले उस इंग्लिश चैनल के किनारे बसा है जहां से ब्रिटेन का फोकस्टोन कस्बा करीब 70 किमी दूर है. इस दूरी को यूरोटनल नाम की एक ट्रेन सेवा जोड़ती है. यह रास्ता लगभग 50 किमी लंबी एक समुद्री टनल के जरिये तय होता है. इस रास्ते से यात्री ट्रेनें भी जाती हैं और कार या ट्रक ढोने वाली मालगाड़ियां भी. जंगल कैंप में रहने वाले बहुत से शरणार्थियों का लक्ष्य यही मालगाड़ियां होती हैं. पुलिस से नजर बचाकर वे पहले एक बाड़ को लांघने और फिर तेज रफ्तार से दौड़तीं इन मालगाड़ियों पर सवार होने की कोशिश करते हैं. इस कोशिश में हाथ-पांव टूटने से लेकर जान जाने की घटनाएं होती रहती हैं.
बहुत से शरणार्थी उन कंटेनरों या कारों में भी छिपने की कोशिश करते हैं जिन्हें इन मालगाड़ियों में लादा जाना होता है. यही वजह है कि कुछ समय पहले इंग्लैंड ने अपने नागरिकों को एक एडवायजरी जारी की कि यूरोपीय देशों से घर वापस लौटते वक्त चौकन्ने रहें, कहीं ऐसा न हो कि कोई बिन बुलाया मेहमान उनकी गाड़ियों में छिपकर इंग्लैंड आ पहुंचे.
एक मायने में कैले पिछले कुछ सालों के दौरान अफ्रीका और मध्य पूर्व में हो रही उथल-पुथल से उपजी पेचीदगी की कहानी कहता है. दरअसल पूरा यूरोप इन दिनों शरणार्थी संकट से जूझ रहा है. खासकर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन पर तो यह दबाव कुछ ज्यादा ही है जो सीरिया, इराक या सूडान से आने वाले विस्थापितों की पहली पसंद हैं. उदार नीतियों के बावजूद इन देशों की स्थानीय आबादी शरणार्थियों की इस बाढ़ से सशंकित है.
पूरा यूरोप इन दिनों शरणार्थी संकट से जूझ रहा है. खासकर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन पर तो यह दबाव कुछ ज्यादा ही है जो सीरिया या इराक से आने वाले विस्थापितों की पहली पसंद हैं.
कैले से अवैध घुसपैठ न हो, इसके लिए सुरक्षा इंतजाम करने में ब्रिटेन अब तक करीब 100 करोड़ रु से भी ज्यादा की रकम खर्च कर चुका है. फ्रांस भी हरसंभव तरीके से कोशिश कर रहा है कि यह मसला काबू से बाहर न हो. इसके बावजूद कैले से अवैध घुसपैठ का मसला दोनों देशों में तनातनी का सबब बनता रहता है. कुछ समय पहले कैले की मेयर ने कहा था कि ब्रिटेन में घुसने की इच्छा रखने वाले प्रवासियों की बढ़ती भीड़ से स्थानीय पर्यटन को नुकसान हो रहा है और इसके लिए ब्रिटेन को हर्जाना देना चाहिए. दरअसल 75,000 की आबादी वाला कैले पर्यटन के लिहाज से काफी मशहूर है. यहीं से यूरोस्टार ट्रेन यूरोप की मुख्य भूमि को ब्रिटेन से जोड़ती है.
लेकिन फ्रांस की पुलिस इन शरणार्थियों को रोके भी तो कैसे? वह ब्रिटेन में अवैध घुसपैठ की कोशिश में बाड़ फांदने या सुरंग में घुसने की कोशिश करने वालों पर नियमों के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा आंसूगैस या फिर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल ही कर सकती है. ट्रेन में सवार होने की कोशिश करता हुआ कोई शरणार्थी उसके हाथ लग जाए तो पुलिस को उसे फिर से बाड़ के उस पार छोड़ना होता है. शरणार्थियों को भी पता है कि इससे ज्यादा कुछ नहीं होना सो वे लगातार कोशिश करते रहते हैं.
ऐसा नहीं है कि सारे शरणार्थी यूरोप में अवैध रूप से रहना चाहते हैं. कैले में रहने वालों को यूरोप में शरण देने के लिए एक प्रक्रिया भी बनाई गई है. उन्हें अलग-अलग देशों में शरण के लिए आवेदन करना होता है. लेकिन भीड़ के चलते दबाव इतना ज्यादा है कि इसमें महीनों लग सकते हैं. बीते साल फ्रांस ने करीब 700 शरणार्थियों को अपने यहां शरण दी. आधिकारिक रूप से शरण मिलने के बाद ये लोग सरकार द्वारा दी जाने वाली सामाजिक सुरक्षा के हकदार हो जाते हैं. भीड़ के चलते बहुत से लोगों को वापस भी भेजना पड़ता है. पिछले साल फ्रांस ने करीब 1200 लोगों को कैले से उनके देश वापस भेजा.
फ्रांस, ब्रिटेन या जर्मनी देशों के सिर से शरणार्थियों का यह बोझ कम करने के लिए यूरोपीय संघ एक नई योजना के बारे में भी सोच रहा है.
फ्रांस, ब्रिटेन या जर्मनी देशों के सिर से शरणार्थियों का यह बोझ कम करने के लिए यूरोपीय संघ एक नई योजना के बारे में भी सोच रहा है. इसके तहत यूरोप में बसने की इच्छा रखने वाले इन लोगों को और भी देशों में बसाने का बंदोबस्त किया जाएगा. इस शरण की शर्त यह होगी कि ये लोग वहीं बसे रहें. लेकिन जिन लोगों को इस योजना के बारे में पता चल रहा है उनमें से ज्यादातर इससे सहमत नहीं, फिर भले ही इसमें मुफ्त घर मिलने जैसा फायदा क्यों न हो. एक पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में बल्गारिया में रह चुका एक शरणार्थी कहता है, 'मैं पहले ही एक गरीब देश छोड़कर आया हूं. फिर किसी दूसरे गरीब देश में क्यों रहना चाहूंगा?'
साफ है कि कैले के जंगल कैंप में रहने वालों और पुलिस के बीच चूहे-बिल्ली का खेल अभी लंबा चलने वाला है.