1981 की बात है. लोकसभा उपचुनाव का मौका था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए ये चुनाव दो कारणों से महत्वपूर्ण था. एक तो इससे यह आकलन होना था कि उन्हें दिल्ली की गद्दी वापस देने के एक साल बाद जनता उनके बारे में क्या सोच रही है. दूसरा, यह उपचुनाव उनके एक नए राजनीतिक उत्तराधिकारी की भी अहम परीक्षा साबित होने जा रहा था. ये उत्तराधिकारी थे राजीव गांधी, जो अमेठी से मैदान में उतरे थे.

समाचार एजेंसी एपी की डॉक्यूमेंटरी अमेठी लोकसभा उपचुनाव में राजीव गांधी की जीत के साथ ही शुरू होती है. करीब साढ़े 12 मिनट के इस वीडियो को जुलाई 2016 में यूट्यूब पर जारी किया गया है. इसमें इंदिरा, राजीव और संजय गांधी से जुड़ी उस दौर की कई दुर्लभ झलकियां हैं. डॉक्यूमेंट्री अंग्रेजी में है और शायद तकनीकी वजहों के चलते इसका वॉयस ओवर बहुत स्पष्ट नहीं है.

डॉक्यूमेंट्री की शुरुआत में राजीव गांधी अमेठी की इस जीत पर जनता की बधाई स्वीकार करते दिखते हैं. पायलट से नेता बने राजीव की राजनीति को लेकर शुरुआती हिचक इसमें साफ नजर आती है. दरअसल 1980 में यहां से उनके भाई संजय गांधी चुनकर आए थे. उनके बारे में साफ हो चुका था कि वे ही अपनी मां की राजनीतिक विरासत संभालेंगे. राजनीति से ज्यादा परिवार को तरजीह देने वाले राजीव गांधी तब पायलट हुआ करते थे. लेकिन कुछ समय बाद ही एक हवाई हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई और राजीव को राजनीति में आना पड़ा.

इस डॉक्यूमेंट्री में अमेठी में प्रचार करते संजय गांधी की भी झलकियां हैं. इसके बाद इंदिरा गांधी अपने बेटे के अंतिम दर्शन करते दिखती हैं. यह उनके लिए बड़ा झटका था क्योंकि संजय को न सिर्फ उनका स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था बल्कि वे अपनी मां के सबसे विश्वस्त सहयोगी और सलाहकार भी कहे जाते थे. डॉक्यूमेंट्री में संजय की शवयात्रा और उनके अंतिम संस्कार के दृश्य हैं जिनमें तब गांधी परिवार के निकट रहे विवादित गुरू धीरेंद्र ब्रह्मचारी भी दिखते हैं.

वीडियो में आगे अमेठी में राजीव गांधी के लिए प्रचार करती इंदिरा गांधी के भी दृश्य हैं जो दिखाते हैं कि कैसे इंदिरा गांधी लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया करती थीं. संजय गांधी की मौत के बाद यह उनके लिए एक नई राजनीतिक विरासत का पौधा रोपने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा था. डॉक्यूमेंट्री में राजीव गांधी का एक छोटा सा साक्षात्कार भी है जिसमें वे अमेठी के लिए अपनी तीन प्राथमिकताएं गिनाते हैं. सड़क, सिंचाई और ऊसर जमीन का कायाकल्प.

इससे पहले कि वीडियो खत्म हो, अमेठी में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ शरद यादव के पक्ष में धुआंधार चुनाव प्रचार करते जवानी के मुलायम सिंह यादव भी दिख जाते हैं. 1981 के अमेठी उपचुनाव में राजीव गांधी के खिलाफ चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से शरद यादव ने चुनाव लड़ा था.

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एपी आर्काइव / यूट्यूब