मॉरीशस की संसद ने 2001 में एक कानून बनाकर रामायण सेंटर की स्थापना की थी जो अब हिंदू धर्म और रामायण अध्ययन का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है. भारत सरकार का कहना है कि अयोध्या में प्रस्तावित राम संग्रहालय इसी संस्थान की थीम पर बनेगा.
जून में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि वह रामायण के नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में एक विशाल और अत्याधुनिक राम संग्रहालय बनाएगी. उस समय चर्चा थी कि संग्रहालय दिल्ली के मशहूर अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनेगा. तब इस घोषणा पर विवाद भी हुआ क्योंकि पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा था कि संग्रहालय विवादित ‘राम जन्मभूमि’ पर नहीं बनेगा, लेकिन उसके आसपास 70 एकड़ की खाली जमीन है जो इसके लिए उपयोग में लाई जा सकती है. इसपर कई मुस्लिम संगठनों ने यह कहकर आपत्ति भी जताई थी इस निर्माण से सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ेगा.
विवाद बढ़ने के साथ इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने चुप्पी साध ली थी, लेकिन अब स्पष्ट हो गया है सरकार राम संग्रहालय के काम पर काफी आगे बढ़ चुकी है. दिलचस्प बात है कि पर्यटन मंत्रालय ने प्रस्तावित संग्रहालय की एक थीम को हाल ही में मंजूरी दी है जिसके मुताबिक इसका निर्माण मॉरीशस के रामायण सेंटर की तर्ज पर किया जाएगा. पिछले हफ्ते ही केंद्रीय पर्यटनमंत्री महेश शर्मा मॉरीशस की यात्रा से लौटे हैं और इसके बाद उन्होंने राम संग्रहालय के बारे में यह घोषणा की है.
मॉरीशस की संसद में मुस्लिम, ईसाई सहित दूसरे संप्रदाय के लोगों ने एकसुर से रामायण सेंटर बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था.
मॉरीशस का रामायण सेंटर आज से डेढ़ दशक पहले तब चर्चा में आया था जब यहां की संसद ने बाकायदा कानून बनाकर इस संस्थान के निर्माण को मंजूरी दी थी. संसद ने कानून 2001 में बनाया था और अगले साल इसका निर्माणकार्य भी शुरू हो गया. मॉरीशस दुनिया के उन गिनेचुने देशों में है जहां तकरीबन आधी आबादी (52 प्रतिशत) आबादी हिंदू है. लेकिन यहां दूसरे धर्म के लोग भी अच्छी-खासी तादाद में रहते हैं. तकरीबन 30 प्रतिशत लोग ईसाई हैं और मुसलमानों की आबादी 17 प्रतिशत है. हिंद महासागर में स्थित लेकिन भौगोलिक रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के नजदीक स्थित मॉरीशस का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है. यही वजह है कि जब संसद से रामायण सेंटर के लिए कानून बनाया तो इसपर भारत सहित दुनियाभर में काफी हैरत जताई गई. सवाल यह भी उठा कि क्या मॉरीशस हिंदू राष्ट्र बनने की राह पर है?
लेकिन इस देश को समझने वाले बताते हैं कि राम और रामायण आधे मॉरीशसवासियों के लिए तो पूरी तरह से धार्मिक विषय हो सकता है लेकिन तकरीबन पूरी जनसंख्या के लिए सांस्कृतिक विरासत है. मॉरीशस के लेखक पंडित राजेंद्र अरुण एक अखबार को बताते हैं, ‘मॉरीशस की राष्ट्रीय संसद में मुस्लिम और ईसाई सहित दूसरे संप्रदाय के लोगों ने एकसुर से रामायण सेंटर बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था. यह इसबात का प्रतीक है कि रामायण की शिक्षाएं सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं.’
मॉरीशस के समाज में रामायण की शिक्षाएं इतनी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं कि इसे वहां के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बनाया गया है. हालांकि यह एक वैकल्पिक विषय है लेकिन यहां के ज्यादातर बच्चे इसे पढ़ना पसंद करते हैं. रामायण की इसी लोकप्रियता ने इस देश में रामायण सेंटर की नींव रखी है.
मॉरीशस के रामायण सेंटर की एक और खास बात है कि यह पिछले सालों में रामायण और हिंदू धर्म से जुड़े कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों को आयोजित कर चुका है
मॉरीशस में बने रामायण सेंटर का पहले चरण का काम 2007 में पूरा हो गया था और अब यह पूरे देश में एक शिक्षा केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां पांच से पंद्रह साल के बच्चों को हिंदू दर्शन और रामायण के जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाती है. यहां रामायण पर शोध के लिए संदर्भ ग्रंथों की एक विशाल लायब्रेरी भी है. विश्व में रामायण के जितने संस्करण हैं, वे सब इस संस्थान में उपलब्ध हैं. इसके अलावा रामायण की शिक्षाओं को आज के संदर्भों में समझने के लिए सेंटर में लाइट एंड म्यूजिक शो भी आयोजित किए जाते हैं. रामायण सेंटर के दूसरे चरण के निर्माणकार्य के तहत यहां एक विशाल आध्यात्मिक परिसर और हॉल का निर्माण किया गया है. इस संस्थान का निर्माण मॉरीशस में जनभावना के तहत हुआ है और शायद इसी वजह से इसके संचालन में इस बात का बहुत ध्यान रखा गया है. राजेंद्र अरुण एक अखबार के बात करते हुए कहते हैं, ‘रामायण सेंटर सिर्फ एक धर्म के लोगों लिए नहीं है. यहां आकर कोई भी रामायण के पात्रों से जीवन मूल्यों की शिक्षा ले सकता है.’
मॉरीशस के रामायण सेंटर की एक और खास बात है कि यह पिछले सालों में रामायण और हिंदू धर्म से जुड़े कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों को आयोजित कर चुका है. पिछले हफ्ते ही यहां अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन आयोजित हुआ था और पर्यटन मंत्री महेश शर्मा उसी में शामिल होने मॉरीशस पहुंचे थे. पर्यटन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं आने वाले दिनों में एक विशेष टीम मॉरीशस भेजी जाएगी जो रामायण सेंटर के संचालन का अध्ययन कर यह बताएगी कि अयोध्या के प्रस्तावित राम संग्रहालय में और क्या खास किया जा सकता है.
केंद्र सरकार की योजना अयोध्या में 2017 तक राम संग्रहालय का निर्माण पूरा करने की है. उसी साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हैं और संभावना जताई जा रही है चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बनेगा. कुल मिलाकर मॉरीशस से प्रेरणा लेकर राम संग्रहालय बनाने की दिशा में सरकार आगे तो बढ़ सकती है लेकिन मॉरीशस की तरह से इसे देश-प्रदेश की पूरी जनता का समर्थन मिलना शायद ही मुमकिन हो.