श्रम कानून में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में 10 ट्रेड यूनियनों से जुड़े करीब 15 करोड़ कर्मचारी आज हड़ताल पर रहे. बैकों से लेकर ऑटो और टैक्सी यूनियनों की इस हड़ताल के चलते देश भर में सामान्य जनजीवन पर काफी असर पड़ा. वाममोर्चे के प्रभाव वाले पश्चिम बंगाल और केरल में यह असर कुछ ज्यादा ही दिखा. इन दोनों राज्यों में कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठियां भांजीं. राजधानी दिल्ली में भी हड़ताल के चलते आम लोगों को परेशानी हुई. बीते दो साल के दौरान यह सबसे बड़ी हड़ताल थी. औद्योगिक संस्था एसोचैम के मुताबिक इस हड़ताल के चलते बंदरगाहों से लेकर बैंकों तक काम ठप हो जाने से करीब 25 हजार करोड़ रु का नुकसान हुआ. ट्रेड यूनियनों की मांग है कि सरकार श्रम कानून में प्रस्तावित बदलावों को वापस ले और सावर्जनिक उपक्रमों में विनिवेश और उनके निजीकरण की प्रक्रिया रोक दे. इससे पहले हड़ताल टालने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में वरिष्ठ मंत्रियों के एक समूह ने ट्रेड यूनियनों के बड़े नेताओं से बात करके उन्हें मनाने की कोशिश की थी और आश्वासन दिया था कि वे न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा जैसी उनकी मांगों पर विचार करेंगे.


'हमारी यह बात फिर से साबित हो गई है कि मोदी सरकार आरएसएस के रिमोट से चल रही है.'

दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता
संघ-भाजपा समन्वय बैठक पर



शीना बोरा हत्याकांड : पीटर और इंद्राणी से आमने-सामने पूछताछ
बहुचर्चित शीना बोरा हत्याकांड मामले में पुलिस ने स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी का बयान दर्ज किया. खबरों के मुताबिक उनकी मौजूदगी में उनकी पत्नी इंद्राणी और दो अन्य आरोपियों से पूछताछ की गई. ये दो आरोपी इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय हैं. 24 अगस्त को इंद्राणी की गिरफ्तारी के बाद पहली बार उनका इन लोगों से आमना-सामना कराया गया. इंद्राणी मुखर्जी पर आरोप है कि वित्तीय विवाद के चलते उन्होंने 2012 में पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय की मदद से शीना की हत्या कर दी थी. शीना इंद्राणी की बेटी थी. आज पुलिस की एक टीम ने पीटर मुखर्जी के घर की तलाशी भी ली. इसके अलावा संजीव खन्ना के कोलकाता स्थित आवास से उनका लैपटॉप भी जब्त किया गया.  इससे पहले, एक स्थानीय अदालत ने इस मामले के तीनों आरोपियों की पुलिस हिरासत पांच सितंबर तक बढ़ा दी थी.
सरकार तेल के 69 कुओं की नीलामी करेगी
अपनी नीतियों में एक बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के 69 तेल और गैस फील्ड्स की नीलामी करके उन्हें निजी कंपनियों को देने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है. बताया जा रहा है कि इन फील्ड्स में करीब नौ करोड़ टन और गैस का भंडार है जिसकी मौजूदा दरों के हिसाब से कीमत करीब 70 हजार करोड़ रु बैठती है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इन फील्डस को राजस्व साझा करने वाली एक नयी व्यवस्था के तहत विकसित किया जाएगा. उनके मुताबिक इस व्यवस्था से सरकार को भी फायदा होगा और कंपनियों को भी.