संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि वह किसी भी तरह दो लाख शरणार्थियों को अपने यहां शरण दे. गौरतलब है कि सीरिया, इराक, लीबिया जैसे देशों में अस्थिर हालात के चलते लाखों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यूरोप की तरफ पलायन कर रहे हैं. संस्था की शरणार्थी एजेंसी के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने एक बयान में कहा है कि शरणार्थी संकट ख़त्म करने के लिए यूरोपीय संघ को पूरी ताकत से काम करने की ज़रूरत है. यूएन का कहना है कि कोई भी देश इस संकट को अकेले हल नहीं कर सकता और न ही अपनी भूमिका से पल्ला झाड़ सकता है. तीन साल के मासूम अयलान की मौत और उसके शव की विचलित कर देने वाली तस्वीरों के बाद से शरणार्थियों को लेकर यूरोप के रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं. हंगरी और पोलैंड जैसे देश शरणार्थियों को शरण देने से इनकार कर रहे हैं जबकि इटली के प्रधानमंत्री ने कहा है कि शरणार्थियों के मुद्दे पर ज्यादा भावनात्मक नहीं हुआ जा सकता.


'हम पाकिस्तान के लोगों के साथ दोस्ती रखना चाहते हैं, लेकिन आईएसआई के साथ चलना अफगानिस्तान के लिए ठीक नहीं है.'

हामिद करजई, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति
अफगानिस्तान और पाकिस्तान में खुफिया सहयोग के लिए हुए समझौते से पीछे हटने के संकेत देते हुए.



यमन में यूएई के 22 सैनिकों की मौत
यमन में हथियारों के एक डिपो में हुए धमाके में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के 22 सैनिकों की मौत हो गई है. यमन में शिया हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन के बीच जंग जारी है. धमाका कैसे हुआ, इस बारे में विरोधाभासी खबरें आ रही हैं. हूती विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने हथियार डिपो पर रॉकेट से हमला किया था जबकि गठबंधन सेना का कहना है कि यह धमाका एक दुर्घटना है. इसी साल मार्च में इरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति ए मंसूर हादी को देश से खदेड़ दिया था. तब से वे रियाद में हैं. इसके बाद जारी संघर्ष में अब तक संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक साढ़े चार हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें सैकड़ों बच्चे शामिल हैं.
झुंपा लाहिड़ी को सम्मान
भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका झुंपा लाहिड़ी को साल 2014 के प्रतिष्ठित नेशनल ह्यूमैनिटीज मेडल के लिए चुना गया है. उन्हें यह सम्मान अगले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा देंगे. व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है अपने लेखन के जरिए 48 वर्षीय झुंपा लाहिड़ी ने अलगाव और लगाव के भारतीय-अमेरिकी अनुभवों को खूबसूरती से बयां किया है. झुंपा भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका हैं. उनका असली नाम नीलांजना सुदेशना है. लघु कहानियों के उनके पहले संग्रह 'इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज' को साल 2000 में काल्पनिक लेखन के वर्ग में पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया था. उनकी किताब 'द लोलैंड' को मैन बुकर प्राइज के लिए नामित किया गया था. फिलहाल वे प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं.