कंगना और दीपिका की लड़ाई बड़ी फिल्मी है
कंगना रनोट फिल्मों में अतिव्यस्त हैं इसलिए उनके पास प्रेम के लिए वक्त नहीं है. लेकिन लड़ाई-झगड़े के लिए है. दीपिका पादुकोण भी अति व्यस्त हैं लेकिन उनके पास प्रेम के लिए भी वक्त है और लड़ाई-झगड़े के लिए भी. क्योंकि जबसे दीपिका की ‘हीरोइन नम्बर 1’ की पोजीशन को कंगना रनोट नाम का प्रबल दावेदार मिला है, इन दोनों के बीच का युद्ध महाभारत के स्तर का होता जा रहा है. पहले शांति से हमले होते थे लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों ही कैंप एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर नकारात्मक खबरें प्रसारित करवा रहे हैं. जैसे ही कंगना के कैंप ने ये खबर हवा में उछाली कि उनको विशाल भारद्वाज की रंगून के लिए 11 करोड़ मिलेंगे, दूसरी तरफ से आवाजें आने लगीं कि ये सरासर झूठ है और सबसे ज्यादा कमाने वाली हीरोइन आज भी दीपिका ही हैं. फिर आवाज आई कि बाजीराव मस्तानी के लिए दीपिका को 10 करोड़ मिल रहे हैं और इससे ज्यादा फीस आज तक किसी भारतीय हीरोइन को नहीं मिली. अगली खबर थी कि कंगना अपने को इस स्तर का प्रतिभावान समझती हैं कि विशाल भारद्वाज जैसी प्रतिभा के साथ रंगून में ‘को-डायरेक्टर’ का क्रेडिट मांग रही हैं. यह भी अफवाह उड़ी कि कंगना की इन्हीं हरकतों से तंग आकर विशाल उनकी जगह किसी और को लेने पर विचार कर रहे हैं. ये सब खबरें झूठ निकलीं और सच यही निकला कि कंगना रंगून की तैयारियों में पूरी तरह डूबी हुईं हैं. अब देखना है कि आगे कंगना और दीपिका में से कौन दूसरे के खिलाफ पहले और कैसी नकारात्मक खबरें फैलाएगा.


'लोगों को लगता है कि सोशल मीडिया पर कुछ भी ऊटपटांग बोला जा सकता है. लेकिन असल जिंदगी में कोई भी समझदार इंसान ऐसी बातें करने की हिम्मत नहीं करेगा.'

सोनाक्षी सिन्हा




कॉफी विद शाहिद कपूर
शाहिद कपूर को कॉफी इतनी पसंद है कि हमेशा उनके हाथ में एक स्टाइलिश कप नजर आता है. एक दिन में आठ-दस कप काफी और ढेर सारी सिगरेट पीने वाले शाहिद हर तरह की कॉफी बनाने की कला में भी माहिर हैं. सुना है कि वे अपनी कॉफी खुद बनाते हैं. हालांकि इस बात पर विश्वास करना जरा मुश्किल है, लेकिन विदेश से आने वाली अपनी बेहद महंगी काफी को भी वे दर्जन भर लोगों को पिलाने में कंजूसी नहीं करते. हाल ही में जब वे अपनी पत्नी मीरा राजपूत के साथ हनीमून मनाने लंदन गए तो अपनी पसंद की एक्सपेंसिव कॉफी का जखीरा साथ लेकर आए और उस जखीरे में से एक हिस्सा ‘झलक दिखला जा रिलोडेड’ के सेट पर ले गए. उस डांस रिएलिटी शो में भाग लेने वालों के लिए. इस शो की शूटिंग दिन-रात चलती है और नाचने वाले कंटेस्टेंट्स को रात में नींद को भगाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. शाहिद की भी हालत नींद से खराब रहती है. इसलिए सेट पर वे न सिर्फ अपने लिए कॉफी बनाते हैं, बल्कि जजों और बाकी लोगों को भी बना-बनाकर पिलाते रहते हैं.


फ्लैशबैक: इंग्लिश बाबू पलट हाथ-रिक्शा वाले बलराज साहनी
बलराज साहनी
बलराज साहनी
रवींद्रनाथ टैगोर की एक कविता से अपना नाम लेने वाली 1953 में आई निर्देशक बिमल रॉय की ‘दो बीघा जमीन’ एक महान फिल्म है. इटली की ‘बाइसिकल थीव्स’ का संदर्भ लेकर उसे देसी जमीन पर रोपने वाली यह फिल्म संगीतकार और वामपंथी सलिल चौधरी की बंगाली कहानी ‘रिक्शावाला’ पर आधारित थी. इस फिल्म में किसान और रिक्शा खींचने वाले शंभू के रोल ने बलराज साहनी को हमेशा के लिए अजर-अमर कर दिया. लेकिन मजेदार बात यह है कि पहले उन्हें इस रोल के काबिल ही नहीं समझा गया था.
एक निरीह किसान की भूमिका के लिए बलराज साहनी ने अपना वजन घटाया, फिल्म खत्म होने तक पुराने कपड़े ही पहने और कलकत्ता के रिक्शेवालों से हाथ-रिक्शा चलाना सीखा
बीबीसी के साथ लंदन में काम कर चुके बलराज साहनी जब पहली बार इस फिल्म के सिलसिले में बिमल रॉय से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे तो सूट-बूट में बिलकुल इंग्लिश जेंटलमैन बने हुए थे. उन्हें देखकर बिमल दा अवाक रह गए. वे अपने सहायकों से बंगाली में बोले, ’ये आदमी काम करेगा मेरी फिल्म में? किस तरह का मजाक कर रहे हो तुम लोग मेरे साथ’. लेकिन बलराज साहनी को पहले से जानने वाले सलिल चौधरी और शोंभू मित्रा ने उस समय बड़ी मुश्किल से बिमल रॉय को मनाया था. इसके बाद बलराज साहनी ने अपने काम से उन्हें पहले से जानने वालों को भी हैरान कर दिया.
बंगाल के अकाल से जूझ रहे किसान की भूमिका के लिए बलराज साहनी ने अपना वजन घटाया, फिल्म खत्म होने तक पुराने कपड़े ही पहने और कलकत्ता के रिक्शेवालों से हाथ-रिक्शा चलाना सीखा. कहते हैं कि रिक्शा चलाना सीखने के बाद बलराज साहनी ने दो हफ्तों तक कलकत्ता की ट्रैफिक से लदी सड़कों पर अपने बेटे परीक्षित और बेटी शबनम को हाथ-रिक्शे पर बिठाकर घुमाया था. शायद यही मेहनत वजह थी कि फिल्म का वह दृश्य जिसमें हाथ से रिक्शा खींचते बलराज साहनी को मजबूरी में एक घोड़ागाड़ी से रेस करनी पड़ती है, भारतीय फिल्मों के महान दृश्यों की श्रेणी में आता है.