अमेरिका की दो टूक पर पाकिस्तान की सफाई | सोमवार, 31 अगस्त 2015
अमेरिका से मिली चेतावनी पर सफाई देते हुए पाकिस्तान ने कहा कि वह अपनी जमीन से चल रही आतंकी गतिविधियों का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है. पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि वे अमेरिका की चिंताओं को अच्छी तरह समझते हैं और कार्रवाई भी कर रहे हैं. उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तानी सेना की आक्रामक कार्रवाई के चलते आतंकी संगठन बेहद कमजोर हो चुके हैं और पाकिस्तान से भागने पर मजबूर हो गए हैं. उन्होंने अमेरिका के उस आरोप का भी खंडन किया जिसके मुताबिक पाकिस्तान आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा है. अमेरिका ने इससे दिन पहले ही पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए उसे अपनी जमीन से चल रही आतंकी गतिविधियों (खास तौर पर हक्कानी नेटवर्क ) पर लगाम लगाने को कहा था.
हिलेरी के ईमेल से खुलासा, आईएसआई ने मुल्ला उमर को पनाह दी थी | मंगलवार, एक सितंबर 2015
2001 में आतंकी संगठन तालिबान के नेताओं के अफगानिस्तान छोड़कर भागने के बाद उसके मुखिया मुल्ला उमर को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने पनाह दी थी. यह खुलासा अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को मिले एक ई-मेल से हुआ है. यह ई-मेल हिलेरी को उनके विदेश मंत्री रहते हुए सिड नाम के एक शख्स से मिला था. सिड नाम के इस लेखक का पूरा नाम नहीं बताया गया है. मेल में लिखा गया है, ‘मुझे यकीन है कि आपको गहराई के साथ लिखे गए इस लेख के तथ्यों के बारे में पता होगा कि कैसे आईएसआई ने मुल्ला उमर को बचाया.’ आशय चर्चित लेखक विलियम डेलरिंपल के एक लेख से है जो द मिलिट्री एंड द मुल्ला के शीर्षक के साथ एक अखबार में छपा था. माना जाता है कि मुल्ला उमर की दो साल पहले कराची के एक हॉस्पिटल में मौत हो चुकी है. पाकिस्तान आईएसआई और मुल्ला उमर के बीच किसी सीधे जुड़ाव से इनकार करता रहा है.
पाकिस्तान को अब कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल नहीं | बुधवार, दो सितंबर 2015
पाकिस्तान को अब कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल नहीं है. अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने यह बात कही है. उनके मुताबिक इस बात की संभावना भी नहीं है कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस क्षेत्र में जनमत संग्रह कराने की मंजूरी मिलेगी. हक्कानी चर्चित अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट से जुड़े हुए हैं. इस थिंक टैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में उन्होंने कहा है कि कश्मीर पाकिस्तान में एक भावनात्मक मुद्दा है, लेकिन उसके नेता अपने लोगों को यह बताने में असफल रहे हैं कि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता. हक्कानी ने कहा कि व्यापार बढ़ाकर और सीमा पार यात्रा के जरिए संबंधों को सामान्य करने के बजाय पाकिस्तान के नेता पहले कश्मीर जैसी अवास्तविक जिद पर अटके हुए हैं जो पाकिस्तान को कहीं लेकर नहीं जाएगी.
चीन तीन लाख सैनिकों की छंटनी करेगा | गुरुवार, तीन सितंबर 2015
चीन ने अपनी सेना के आकार में बड़ी कटौती का ऐलान किया. वह करीब तीन लाख जवानों की छंटनी करेगा. यह ऐलान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एशिया में दूसरे विश्व युद्ध के 70 वर्ष पूरे होने पर आयोजित एक भव्य सैन्य परेड के दौरान किया. हालांकि कई जानकार मानते हैं कि चीन की सेना में इस कटौती से उसकी सैन्य ताकत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. उनकी मानें तो चीन ने पिछले कुछ समय के दौरान अपनी वायु सेना और नौसेना को बहुत मजबूत बना दिया है. इसके चलते इस बात से काई खास फर्क नहीं पड़ता है कि उसके कितने सैनिक जमीन पर मौजूद हैं. सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों की सूची में चीन दुनिया में दूसरे नंबर पर है. भारत इस सूची में आठवें स्थान पर है. चीन का सालाना रक्षा बजट करीब 129 अरब डालर है.
यमन में यूएई के 22 सैनिकों की मौत | शुक्रवार, चार सितंबर 2015
यमन में हथियारों के एक डिपो में हुए धमाके में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के 22 सैनिकों की मौत हो गई. यमन में शिया हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन के बीच जंग जारी है. धमाका कैसे हुआ, इस बारे में विरोधाभासी खबरें आ रही हैं. हूती विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने हथियार डिपो पर रॉकेट से हमला किया था जबकि गठबंधन सेना का कहना है कि यह धमाका एक दुर्घटना है. इसी साल मार्च में इरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति ए मंसूर हादी को देश से खदेड़ दिया था. तब से वे रियाद में हैं. इसके बाद जारी संघर्ष में अब तक संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक साढ़े चार हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें सैकड़ों बच्चे शामिल हैं.
ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने शरणार्थियों के लिए दरवाजे खोले | शनिवार, पांच सितंबर 2015
सीरिया, लीबिया और इराक जैसे देशों से यूरोप की तरफ आ रहे हजारों शरणार्थियों को शरण देने के लिए ऑस्ट्रिया और जर्मनी तैयार हो गए . शनिवार को करीब चार हजार शरणार्थी हंगरी की सीमा से ऑस्ट्रिया में दाखिल हुए. यह संख्या 10 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है. इनमें ज्यादातर सीरियाई नागरिक बताए जाते हैं हैं. ऑस्ट्रिया के चांसलर वर्नेन फेमन ने कहा है कि हंगरी की सीमा पर बनी आपात स्थिति को देखते हुए उन्होंने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल से चर्चा की थी जिसके बाद दोनों देश शरणार्थियों को अपने यहां आने की इजाजत देने पर सहमत हो गए. समुद्र में डूबने से मरे तीन साल के मासूम अयलान कुर्दी की तस्वीरें वायरल होने के बाद यूरोपीय देशों पर इन लोगों को शरण देने का दबाव बढ़ गया है. यूरोपीय देश बीते 25 साल के सबसे बड़े शरणार्थी संकट से जूझ रहे हैं. इससे पहले 1990 में युगोस्लाविया में छिड़े गृहयुद्ध के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी. खबरों के मुताबिक इस साल अब तक करीब साढ़े तीन लाख शरणार्थी यूरोपीय संघ में दाखिल हो चुके हैं.