हंगरी सहित कई देशों की सीमाएं बंद होने के बाद सीरिया और दूसरे अस्थिर देशों से आ रहे शरणार्थी अब यूरोप में घुसने के लिए नए रास्ते खोजने की कवायद में लगे हैं. उदाहरण के लिए प्रवासियों का एक जत्था क्रोएशिया पहुंच गया है. दरअसल एक दिन पहले ही हंगरी ने सर्बिया से लगी अपनी सीमा बंद कर दी थी. उसने यह भी कहा था कि अवैध रूप से उसकी सीमा में घुसने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा. उधर, क्रोएशिया का कहना है कि वह इन शरणार्थियों की मदद करने या उन्हें दूसरे देशों तक पहुंचाने में मदद करने के लिए तैयार है. उसने शरणार्थियों का पंजीकरण करना शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि इन शरणार्थियों के मुद्दे पर यूरोप दो धड़ों में बंट गया है. जर्मनी और फ्रांस उन्हें शरण देने के पक्ष में हैं तो हंगरी और पोलैंड जैसे कई देश इसके विरोध में.


'यह उत्तरी इराक और पूर्वी सीरिया में आईएस को कमजोर और नष्ट करने के लिए चल रही लड़ाई का विस्तार है.'

ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री केविन एंड्रयूज
आईएस के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के पहले हवाई हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए



पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की चेतावनी
पाकिस्तान में उच्च सदन (सीनेट) के अध्यक्ष रजा रब्बानी ने कहा है कि वहां का संविधान लोकतंत्र की रक्षा करने में सक्षम नहीं है. अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर सदन में हुई एक चर्चा के मौके पर रब्बानी ने यह बात कही. इससे पहले विपक्षी नेताओं ने शक्तिशाली सेना और सरकार के बीच बढ़ते अलगाव को लेकर आशंका जताई थी. पाकिस्तान में सेना द्वारा तख्ता पलट किए जाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. उसकी आजादी के बाद अब तक के 68 साल में से लगभग आधे सैन्य शासन में गुजरे हैं. रब्बानी ने कहा कि सिर्फ जनता सेना को सत्ता पर कब्जा करने से रोक सकती है.
लीबिया में दो भारतीय अगवा
लीबिया में दो भारतीयों को अगवा कर लिया गया है. यह घटना सिरते शहर में हुई है. इन दो में से एक ओडिशा का और दूसरा आंध्र प्रदेश का रहने वाला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप कहा है कि त्रिपोली में मौजूद भारतीय दूतावास घटना की पुष्टि करने के लिए आगे जांच कर रहा है और मामले पर राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है. उन्होंने यह भी कहा है कि इन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा जल्द से जल्द उनकी रिहाई के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं. 2011 में कर्नल गद्दाफी को अपदस्थ किए जाने के बाद से लीबिया अशांत बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता प्राप्त वहां के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अल थानी मिलिशिया द्वारा 2014 में राजधानी त्रिपोली से निकाले जा चुके हैं और अब वे टोबुर्क शहर से देश चलाने की कोशिश कर रहे हैं. त्रिपोली में  एक दूसरा समूह खुद को वैधानिक सरकार बताते हुए अल थानी की सरकार को चुनौती देता रहा है.