बिहार विधानसभा चुनावों में रामविलास पासवान, जीतन राम मांझी और लालू प्रसाद यादव जैेसे दिग्गज अपने दामादों के निशाने पर हैं.
भारतीय समाज में दामाद जी की नाराजगी मशहूर है. बिहार विधानसभा चुनावों के माहौल में कई हाई प्रोफाइल दामाद नाराज चल रहे हैं. कोई टिकट न मिलने से खफा होकर बागी हो गया है तो किसी के विरोध का कारण कुछ और है.
भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को ही ले लीजिए. इसकी मुख्य सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान के दामाद अनिल कुमार साधु ने बगावत कर दी है. वे पार्टी से जुड़े संगठन दलित सेना की बिहार इकाई के अध्यक्ष थे. पार्टी ने अनिल को निकाल दिया है और उन्होंने सांसद राजेश रंजन पप्पू यादव के नेतृत्व वाली जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) का दामन थाम लिया है. कई चैनलों पर वे रोते और अपने ससुर रामविलास पासवान को कोसते नजर आए.
रामविलास पासवान के एक और दामाद मृणाल भी नाराज बताए जाते हैं. हालांकि उन्होंने अभी सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.
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खबरों के मुताबिक अनिल कुमार साधु औरंगाबाद जिले में सुरक्षित सीट कुटुंबा से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन यह सीट हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को दे दी गई. इसके बाद अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि लोजपा में पैसे लेकर टिकट बांटे गए हैं. उन्होंने रामविलास के बेटे और लोजपा सांसद चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए कहा, 'चिराग अहंकार में डूबे हुए हैं. वे बिहार के बेटे नहीं, फ्लॉप 'हीरो' हैं.' उनका यह भी कहा था कि पासवान पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन गए हैं.  रामविलास पासवान के एक और दामाद मृणाल भी नाराज बताए जाते हैं. हालांकि उन्होंने अभी सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.
हम के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी भी नाराज हैं. उनकी नाराजगी का कारण भी वही है, यानी टिकट न मिलना. देवेंद्र का कहना है कि वे 1995 से राजनीति में हैं, फिर भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया. उन्होंने बोधगया विधानसभा क्षेत्र से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. क्या उन्होंने जीतनराम मांझी से टिकट मांगा था, इस सवाल के जवाब में उनका एक समाचार वेबसाइट से कहना था, 'मांगने की क्या बात है. बात समझने की है. मैं लंबे समय से राजनीति में हूं. मेरी भी कुछ तमन्ना है.'
तेज प्रताप बिहार में लालटेन को बुझाने की बात भी कह चुके हैं. संकेत साफ है कि उन्हें लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधने से कोई गुरेज नहीं है.
बिहार चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सबसे छोटे दामाद तेज प्रताप सिंह यादव भी अपने ससुर के खिलाफ दिखेंगे. हालांकि उनके इस विरोध का कारण उन दामादों से अलग है जिनका अब तक जिक्र आया है. वे उत्तर प्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं. सपा पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन से जुड़कर बिहार चुनाव में उतरने जा रही थी. लेकिन पार्टी को महज तीन सीटें मिलने से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव नाराज हो गए और पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया. सपा अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), समरस समाज पार्टी और समाजवादी जनता दल (राष्ट्रीय) के साथ चुनाव मैदान में उतरी है. इस गठबंधन में सबसे अधिक 85 सीटें उसी के पास हैं.
सपा ने प्रदेश प्रवक्ता उमेश राय का कहना है, 'हमने केंद्रीय नेतृत्व से मांग की है कि तेजप्रताप को बिहार चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया जाए.' खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हुई एक बैठक में वे बिहार में लालटेन को बुझाने की बात भी कह चुके हैं. संकेत साफ है कि उन्हें लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधने से कोई गुरेज नहीं है.