करीना और अर्जुन कपूर का 'ये दोस्ती' वाला दोस्ताना
करीना कपूर अपनी फिल्मों के को-स्टार्स के साथ कम ही घुलती-मिलती हैं. अपने इस एटीट्यूड के लिए वे फिल्म इंडस्ट्री में कुख्यात हैं. लेकिन अर्जुन कपूर की बात कुछ और है. वे रणवीर सिंह से भी दोस्ती कर लेते हैं और करीना कपूर से भी! खबर है कि ‘की एंड का’ की शूटिंग के दौरान हाल ही में 35 की हुईं करीना और अर्जुन के बीच सेट पर रॉकिंग दोस्ताना रहा. करीना के साथ पहली फिल्म शूट कर रहे अर्जुन उनसे इतने प्रभावित हुए कि दोस्तों से उनकी तारीफ करते नहीं थकते. वे उन्हें वर्तमान में इंडस्ट्री की एकमात्र ‘डीवा’ भी मान चुके हैं और करीना भी उनके चलताऊ जोक्स पर ठहाके लगाकर हंसती हैं. दोनों के इस दोस्ताने की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में जलन नाम का कोहरा भी इन दिनों खूब घना छाया हुआ है. करीना कपूर के वे पुराने को-स्टार्स जो उनके साथ दोस्ताना रखना चाहते थे लेकिन करीना के कोल्ड-एटीट्यूड की वजह से नहीं रख पाए, इस खबर पर आजकल रोज अपना खून जला रहे हैं. वे अर्जुन कपूर से टिप्स लेने के लिए उन्हें वॉट्सएप भी कर रहे हैं लेकिन अंदर की खबर है कि इन सारे संदेशों पर ब्लू टिक का निशान कभी आने वाला नहीं है!


'मैं पहली फिल्म के वक्त 89 किलो की थी और अब 57 किलो की हूं. बहुत मेहनत लगी लेकिन इतना वजन कम करना असंभव नहीं होता, ये आप मुझसे सीख सकते हैं.'

भूमि पेडणेकर




मलाला और जैकी भगनानी का मलाल
आप मानें या न मानें, ट्विटर के ट्रोल्स और जैकी भगनानी में एक समानता तो है ही. दोनों ही किसी एक ट्वीट के पीछे पड़ जाएं तो उसे बड़ी मुश्किल से छोड़ते हैं. जैकी भगनानी तो एक कदम आगे जाकर उस ट्वीट में वर्णित व्यक्ति को ही छोड़ने को तैयार नहीं होते. यहां बात जांबाज मलाला यूसुफजई की हो रही है. उन्हें पिछले साल जब नोबेल का शांति पुरस्कार मिला तो जैकी भगनानी ने बधाई देते हुए ट्वीट में उनका नाम मलाला की जगह मसाला लिख दिया था. एक तब का दिन था और एक आज का, जैकी अपनी उस गलती पर ऐसा पश्चाताप कर रहे हैं कि पिछले एक साल से मलाला का पीछा ही नहीं छोड़ रहे. पहला पश्चाताप उन्होंने मलाला के 18वें जन्मदिन पर एक वीडियो बनाकर किया था. इसे देखने के बाद मलाला ने उन्हें फोन करके धन्यवाद दिया और अपनी वेबसाइट पर उनके बारे में एक आर्टिकल भी पोस्ट किया. जैकी सातवें आसमान पर चढ़कर बेहद खुश हुए लेकिन उनका पश्चाताप करना खत्म नहीं हुआ! कुछ समय बाद वे मलाला से मिलने लंदन पहुंच गए और इत्मीनान से उनसे लंबी बातचीत की. ना...ना प्रायश्चित अभी भी पूरा नहीं हुआ! अभी दो दिन पहले ही पहले वे न्यूयार्क में मलाला पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘ही नेम्ड मी मलाला’ के प्रीमियर पर भी पहुंच गए थे. जैकी की किस्मत देखिए कि वहां पर स्कारलेट जोहानसन से भी मिल लिए.
ये बात वैसे कहने की तो नहीं है लेकिन समाजसेवा में हम कह देते हैं कि जैकी भगनानी को इस नेवर एंडिंग पश्चाताप के काफी फायदे हो रहे हैं. हर पश्चाताप को उन्होंने ट्विटर पर डाला और ट्रैंड करवाया. खुद के फालोअर्स बढ़ाए और बिना पैसे खर्च किए खुद की तगड़ी पीआर भी कर डाली. स्कारलेट जोहानसन से मिल लिए, सो अलग!


फ्लैशबैक –नसीरुद्दीन शाह और जगजीत सिंह की डेब्यू फिल्म एक ही थी!
अमन फिल्म में जगजीत सिंह
अमन फिल्म में जगजीत सिंह
1967 में राजेंद्र कुमार की एक फिल्म आई थी, ‘अमन’. इस युद्ध विरोधी फिल्म का एक बड़ा हिस्सा जापान में शूट हुआ था और ये हिरोशिमा-नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद की कहानी थी. इस फिल्म को तीन कारणों से खास माना जाना है. पहला, इसमें ब्रिटेन के नोबेल पुरस्कार प्राप्त युद्धविरोधी, गणितज्ञ और दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल का किसी बॉलीवुड फिल्म के लिए पहला और आखिरी कैमियो था. तब वे 95 साल के थे और फिल्म में नायक राजेंद्र कुमार को अमन के रास्ते पर चलने का ज्ञान देते हुए नजर आए थे.
नीले रंग की पगड़ी और सफेद रंग का कोट पहने जगजीत सिंह को फिल्म के उस एक मिनिट वाले सीन में पहचानना लगभग असंभव सा है
दूसरी दिलचस्प वजह हैं नसीरुद्दीन शाह. ‘अमन’ पहली फिल्म थी जिसमें वे एक ‘एक्सट्रा’ आर्टिस्ट के रूप में कैमरे के सामने आए. फिल्म के अंत में हीरो राजेंद्र कुमार के अंतिम संस्कार वाले दृश्य में वे शोक मनाने वाले दर्जन भर लोगों में शामिल थे. ये उनकी डेब्यू फिल्म थी लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो वो छोटा-सा सीन फिल्म में था ही नहीं. इसलिए किसी को पता ही नहीं है कि ‘अमन’ उनकी डेब्यू फिल्म थी हालांकि इसका जिक्र खुद उन्होंने पिछले साल आई अपनी आत्मकथा में किया है.
तीसरी और सबसे दिलचस्प वजह है गजल सम्राट जगजीत सिंह का फिल्म में होना. ये बॉलीवुड में उनकी भी डेब्यू फिल्म थी और शायद एकमात्र बॉलीवुड फिल्म जिसमें उन्होंने अपने वास्तविक सिख रूप में एक बेहद छोटा-सा रोल किया था. ये क्लीन-शेव्ड जगजीत सिंह से पहले वाले दौर की बात है और नीले रंग की पगड़ी और सफेद रंग का कोट पहने जगजीत सिंह को फिल्म के उस एक मिनट वाले सीन में पहचानना लगभग असंभव सा है.