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कला की कल्पना जब विज्ञान की जुगत के साथ मिलती है तो नतीजा कितना अनूठा हो सकता है यह थियो जॉनसन दिखाते हैं.
पहली नजर में इन जीवों को देखकर हैरत भी हो सकती है. कुछ को डर भी लग सकता है. लेकिन ये दरअसल असाधाऱण कलाकृतियां हैं जो डच कलाकार थियो जॉनसन की 25 साल की कोशिशों का नतीजा हैं. कला और विज्ञान के इस मेल को जॉनसन ने स्ट्रैंडबीस्ट्स नाम दिया है. समंदर के किनारे मंडराती इन आकृतियों को देखकर ऐसा लगता है मानो दूसरे ग्रह के कुछ जीव धरती पर उतर आए हों.
हल्के पीवीसी पाइपों से बनीं इन कलाकृतियों की चाल का राज एक जटिल मोशन सिस्टम है जो हवा की ऊर्जा का इस्तेमाल करके इन्हें चलाता है. इसके लिए जॉनसन ने इनमें विशेष पंख लगाए हैं. इन स्ट्रैंडबीस्ट्स का पेट कुछ इस तरह से बनाया गया है कि जब हवा न भी हो तो ये पहले से संचित ऊर्जा का इस्तेमाल करके हिलती-डुलती रहें.
हल्के पीवीसी पाइपों से बनीं इन कलाकृतियों की चाल का राज एक जटिल मोशन सिस्टम है जो हवा की ऊर्जा का इस्तेमाल करके इन्हें चलाता है.
समंदर से आती हवा भले ही स्ट्रैंडबीस्ट्स के लिए चारा हो, लेकिन उसी समंदर का पानी इनके लिए खतरा भी है. इसलिए इनमें कुछ सेंसर भी लगे हैं जिनकी मदद से ये न सिर्फ लहरों से दूर रहते हैं बल्कि उनके संपर्क में आने पर उलटी दिशा में भी चलने लगते हैं.
अभी तो जॉनसन इन कलाकृतियों पर निगरानी रखते हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें इनके भरोसे ही समंदर किनारे छोड़ा जा सकेगा. वे इन्हें जीवन का ही एक रूप मानते हैं और उनकी योजना है कि आगे इन्हें झुंड के रूप में रखा जाए. जॉनसन स्ट्रैंडबीस्ट्स को अपने बच्चों की तरह देखते हैं. उनके मुताबिक अब वे सुकून से मर सकते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अपनी कलाकृतियों के जरिये वे हमेशा समंदर किनारे रहेंगे.