आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख का संदेश देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने कहा है कि जिन्हें ऑस्ट्रेलियाई मूल्य कड़वे लगते हैं वे देश छोड़कर चले जाएं. अपने एक संदेश में टर्नबुल ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया में रहना अनिवार्य नहीं है...बाहर एक बड़ी दुनिया है और लोगों को आने-जाने की आजादी है.' उन्होंने लोगों से कहा कि वे हिंसक उग्रवाद के रास्ते पर न चलें. टर्नबुल की यह टिप्पणी कुछ दिन पहले हुई उस घटना के संदर्भ में आई है जिसमें 15 साल के एक किशोर फरहाद जब्बार ने एक पुलिस अधिकारी को गोली मार दी थी. फरहाद बाद में पुलिस के साथ गोलीबारी में मारा गया.
गौरतलब कि ऑस्ट्रेलिया अपने यहां बढ़ रहे इस्लामी कट्टरपंथ से चिंतित है. खबरों के मुताबिक वहां के 100 से भी ज्यादा लोग सीरिया और इराक जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ रहे हैं.


'इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से सीरियाई इलाके को वापस लेने के लिए अमेरिका अब एक अलग रास्ता अपनाने के बारे में सोच रहा है.'

एश्टन कार्टर, अमेरिकी रक्षामंत्री
एक प्रेस वार्ता में



नोबेल शांति पुरस्कार ट्यूनीशिया की झोली में
2015 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्यूनीशिया के नेशनल डायलॉग क्वार्ट्रेट को चुना गया है. उसे यह सम्मान लोकतंत्र की स्थापना में उसके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है. 2011 में ट्यूनीशिया में हुए 'जैस्मिन रिवॉल्यूशन' के बाद वहां फैली अराजकता के बीच 2013 में इस चौगुटे का गठन किया गया था. इसमें ट्यूनीशिया जनरल लेबर यूनियन, ट्यूनीशिया कन्फेडेरेशन ऑफ़ इंडस्ट्री, ट्रेड एंड हैंडीक्राफ्ट, ट्यूनीशिया ह्यूमन राइट लीग और ट्यूनीशियन ऑर्डर ऑफ़ लॉयर्स नाम की चार संस्थाएं शामिल थीं. नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा है कि इसने ट्यूनीशिया के लोगों को उस वक्त एक नया विकल्प और शांति स्थापित हो सकने का भरोसा दिया, जब देश गृहयुद्ध के कगार पर था. इस पुरस्कार के तहत 10 लाख डॉलर की ईनामी राशि दी जाती है.
इराक में मोर्टार हमला, 35 की मौत
इराक में हुए एक मोर्टार हमले में 35 लोगों की मौत हो गई है. देश के पूर्वी प्रांति दियाला की राजधानी के करीब हुए इस हमले में दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं. हालांकि अभी तक किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है. यह बर्बर आतंकी संगठन हाल में इराक में हुए कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है. आईएस का इराक के एक बड़े इलाके पर कब्जा है.