चिकित्सा का नोबेल चीन, जापान और आयरलैंड की झोली में | सोमवार, 05 अक्टूबर 2015
चिकित्सा के नोबेल का ऐलान कर दिया गया. इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान संयुक्त रूप से तीन लोगों को दिया गया है. इसमें आधे की हकदार चीन की तू यूयू हैं जिन्हें यह पुरस्कार मलेरिया के खिलाफ एक नई और सबसे कारगर दवा आर्टेमाइसिनिन की खोज के लिए दिया गया है. पुरस्कार की आधी रकम राउंडवर्म से होने वाले संक्रमणों का नया उपचार खोजने वाले विलियम सी कैम्पबेल तथा सतोशी ओमुरा को मिलेगी. कैंप्पबेल आयरलैंड के रहने वाले हैं जबकि ओमुरा जापान के. इस पुरस्कार की घोषणा स्टॉकहोम में चिकित्सा पर नोबेल समिति की सचिव अरबन लेन्डल ने की. समिति ने अपने बयान में कहा कि इन दोनों खोजों ने मानवता को इन बीमारियों से लड़ने का नया और शक्तिशाली जरिया दिया है जिनसे हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं.
कैलीफोर्निया इच्छा मृत्यु की मंजूरी देने वाला अमेरिका का पांचवां राज्य बना | मंगलवार, 06 अक्टूबर 2015
कैलीफोर्निया डॉक्टरों की मदद से आत्महत्या यानी इच्छामृत्यु को अनुमति देने वाला अमेरिका का पांचवां राज्य बन गया. वहां के गर्वनर ने इस आशय के एक विवादास्पद विधेयक पर दस्तखत कर दिए जिससे लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त मरीज डॉक्टरों की मदद से अपनी जान दे सकेंगे. खबरों के मुताबिक गवर्नर जेरी ब्राउन ने एक बयान में कहा है कि उन्होंने फैसला करने से पहले कैथोलिक चर्च के सदस्यों और डॉक्टरों से परामर्श किया. कैथोलिक चर्च के सदस्यों ने इस प्रावधान पर ऐतराज जताया. 77 वर्षीय गर्वनर ने कहा, ‘अंत में मैंने वह किया जो मैं मौत का सामना करने पर करता.’
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता का फरमान, अमेरिका से आगे कोई बातचीत नहीं होगी | बुधवार, 07 अक्टूबर 2015
लंबे समय से विश्व समुदाय से अलग-थलग पड़े ईरान के मुख्यधारा में लौटने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा. वहां के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामेनई ने ईरान और अमेरिका के बीच आगे किसी भी बातचीत पर प्रतिबंध लगा दिया. गौरतलब है कि हाल ही में ईरान का विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौता हुआ है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नेवी कमांडरों को संबोधित करते हुए खामेनई ने कहा, ‘अमेरिका के साथ समझौते आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रभावों के दरवाजे खोल देते हैं.’ खामेनई का फैसला ईरान में अंतिम माना जाता है. बीते महीने भी उन्होंने कहा था कि परमाणु समझौते के बाद अमेरिका के साथ कोई बात नहीं होगी, लेकिन सीधे-सीधे प्रतिबंध की उम्मीद किसी को नहीं थी.
फॉक्सवैगन के हेडक्वार्टर पर पुलिस का छापा | गुरुवार, 08 अक्टूबर 2015
जर्मन कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन पर छाया संकट बढ़ता जा रहा है. खबरों के मुताबिक बर्लिन में पुलिस ने कंपनी के मुख्यालय सहित कई दफ्तरों पर छापे मारे. यह कार्रवाई प्रदूषण संबंधी धोखाधड़ी से जुड़े विवाद के सिलसिले में हुई. छापों में कई दस्तावेज जब्त किए गए. जर्मन पुलिस के मुताबिक इनसे यह जानने में मदद मिल सकती है कि कंपनी की डीजल गाड़ियों में प्रदूषण की मात्रा को कम करके दिखाने वाला सॉफ्टवेयर लगाने के लिए कौन दोषी है. गौरतलब है कि अमेरिका सहित कई देशों में फॉक्सवैगन जांच एजेंसियों के निशाने पर है. कंपनी ने खुद माना है कि दुनिया भर में सड़कों पर दौड़ रही इसकी करीब एक करोड़ से भी ज्यादा गाड़ियों में ऐसा सॉफ्टवेयर लगा हुआ है जो प्रदूषण जांच के दौरान गाड़ी से निकल रही नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा को बेहद कम करके दिखाता है.
आस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के मूल्य नहीं सुहाते वे देश छोड़ दें | शुक्रवार, 09 अक्टूबर 2015
आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख का संदेश देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने कहा कि जिन्हें ऑस्ट्रेलियाई मूल्य कड़वे लगते हैं वे देश छोड़कर चले जाएं. अपने एक संदेश में टर्नबुल ने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया में रहना अनिवार्य नहीं है…बाहर एक बड़ी दुनिया है और लोगों को आने-जाने की आजादी है.’ उन्होंने लोगों से कहा कि वे हिंसक उग्रवाद के रास्ते पर न चलें. टर्नबुल की यह टिप्पणी कुछ दिन पहले हुई उस घटना के संदर्भ में आई है जिसमें 15 साल के एक किशोर फरहाद जब्बार ने एक पुलिस अधिकारी को गोली मार दी थी. फरहाद बाद में पुलिस के साथ गोलीबारी में मारा गया. गौरतलब कि ऑस्ट्रेलिया अपने यहां बढ़ रहे इस्लामी कट्टरपंथ से चिंतित है. खबरों के मुताबिक वहां के 100 से भी ज्यादा लोग सीरिया और इराक जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ रहे हैं.
तुर्की में दो बम धमाके, 86 की मौत | शनिवार, 10 अक्टूबर 2015
तुर्की में हुए दो बम धमाकों में 86 लोगों की मौत हो गई. ये धमाके अंकारा में तब हुए जब लोग एक शांति रैली के लिए इकट्ठा हो रहे थे. धमाकों में करीब 200 लोग घायल भी हुए हैं. इस रैली का आयोजन कई ट्रेड यूनियनों ने किया था जो देश में फैली हिंसा और कुर्द विद्रोहियों पर हो रहे तुर्की सरकार के हमलों का विरोध कर रही हैं. कहा जा रहा है कि इस हमले का मकसद ही वामपंथियों और कुर्द समर्थक विपक्षी समूहों को निशाना बनाना था और इसलिए कई लोगों ने इन धमाकों के लिए तुर्की की सरकार को दोषी ठहराया है. उधर, सरकार ने इसे आतंकवादी घटना बताया है. गौरतलब है कि इराक से लगते तुर्की के दक्षिणी हिस्से में कुर्दों की एक बड़ी आबादी रहती है. ये लोग लंबे समय से एक अलग देश की मांग कर रहे हैं.