तुर्की ने रूस और अमेरिका से कहा है कि वे सीरियाई कुर्द लड़ाकों को हथियार देने से बाज आएं. खबरों के मुताबिक उसने दोनों देशों के राजदूतों को तलब किया और उन्हें चेताया कि वे सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के ख़िलाफ़ लड़ रहे कुर्द विद्रोही गुटों को हथियार देकर उनकी मदद न करें. एक दिन पहले खबर आई थी कि अमेरिका ने सीरिया के हास्काह प्रान्त में सीरियाई विद्रोही गुटों के लिए पैराशूट के ज़रिए सैन्य हथियार और गोला-बारूद पहुंचाए हैं. बीते हफ्ते रूस के एक अधिकारी ने सीरिया के कुर्द गुट वाईपीजी के नेता सालिह मुस्लिम के साथ बातचीत की थी.
तुर्की सीरिया में रूसी हमलों का कड़ा विरोध कर रहा है. रूस सीरिया में आईएस के ठिकानों पर हमला करते हुए दो बार तुर्की की हवाई सीमा का अतिक्रमण भी कर चुका है जिसके बाद तुर्की की सरकार ने उसे कड़ी चेतावनी दी थी. तुर्की सीरिया में आईएस के खिलाफ समानांतर अभियान चला रहे अमेरिकी खेमे के साथ है.


'हाल की भयानक बाढ़ और भूस्खलन के चलते चुनाव टालने का प्रस्ताव था, लेकिन वे पहले से तय तारीख यानी आठ नवंबर को ही होंगे.'

तिन अए, म्यामांर के मुख्य चुनाव आयुक्त
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में



पूर्व पाक रक्षा मंत्री का बयान, हम सबको लादेन के पाकिस्तान में होने का पता था
पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तार ने एक विवादास्पद बयान दिया है. एक चैनल को दिए गए साक्षात्कार में उनका कहना है कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी, सैन्य मुखिया अशफाक परवेज कयानी और आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल शुजा पाशा को यह पता था कि ओसामा एबटाबाद में रह रहा है. 2011 में अमरीकी नेवी सील ने ऐबटाबाद में एक विशेष अभियान चलाकर आतंकी संगठन अल कायदा के मुखिया ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. मुख्तार के मुताबिक इस हमले से काफी पहले ही वहां सबको इस बात की जानकारी थी कि लादेन पाकिस्तान में ही रह रहा है. मुख़्तार 2008 से 2012 के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री थे. पाकिस्तान कहता रहा है कि अमेरिका के अभियान से पहले उसे ओसामा के पाकिस्तान में होने की कोई जानकारी नहीं थी.
जमैका के लेखक मार्लोन जेम्स को मैन बुकर पुरस्कार
जमैका के लेखक मार्लोन जेम्स को 2015 का प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार मिला है. यह सम्मान उन्हें उनकी किताब 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ सेवन किलिंग्स' के लिए दिया गया है. वे जमैका के पहले साहित्यकार हैं जिन्हें मैन बुकर मिला है. पुरस्कार की दौड़ में उन्होंने ब्रिटिश- भारतीय लेखक संजीव सहोता की 'द ईयर ऑफ रनवे' सहित पांच अंतरराष्ट्रीय दावेदारों को पीछे छोड़ा. 44 साल के जेम्स का यह तीसरा उपन्यास है जो 1970 के दशक में जमैका के मशूहर गायक, गीतकार और संगीतकार बॉब मार्ले की हत्या के प्रयास की वास्तविक घटना से प्रेरित है.