चीन ने साढ़े चार दशक पुरानी अपनी ‘एक संतान नीति’ को खत्म करने का फैसला किया है. देश की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक अब किसी भी दंपति को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति होगी. हालांकि दो से ज्यादा बच्चों पर पाबंदी जारी रहेगी. बीजिंग में पिछले चार दिनों से कम्यूनिस्ट पार्टी की मीटिंग चल रही थी जिसमें यह फैसला लिया गया है. शिन्हुआ ने पार्टी के वक्तव्य के हवाले से लिखा है कि सरकारी नीति में यह ऐतिहासिक बदलाव जनसंख्या के संतुलित विकास और बूढ़ी होती आबादी की चुनौती से निपटने में मददगार साबित होगा. कहा जा रहा है कि बीते महीनों में अर्थव्यवस्था की सुस्ती और भविष्य में कार्यशील जनसंख्या के कम होने की आशंकाओं के बीच चीन सरकार पर इस नीति में बदलाव का भारी दबाव था.
चीन ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए 1979 में ‘एक संतान नीति’ लागू की थी. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक बीते दशकों में इस नीति को बर्बरता से लागू किया गया और इसके चलते लाखों महिलाओं का जबर्दस्ती गर्भपात करवाया गया. 2013 में सरकार ने इस नीति में आंशिक ढील देते हुए दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी लेकिन इसके लिए यह शर्त तय की गई थी कि अभिभावकों में से कोई अपने मां-बाप की इकलौती संतान होना चाहिए.


‘उन्हें (सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद) पद छोड़ना होगा. यह राजनीतिक प्रक्रिया के तहत होगा या फिर उन्हें बलपूर्वक हटाया जाएगा’

अदेल अल जुबैर, सऊदी अरब के विदेशमंत्री
विएना में सीरिया संकट के समाधान के लिए आयोजित बैठक के पहले मीडिया से बातचीत में



पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का चुनाव हारा
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वर्तमान मानवाधिकार परिषद के सदस्य पाकिस्तान के एक बार फिर से इसका सदस्य बनने की संभावना खत्म हो गई है. पाकिस्तान दिसंबर तक इसका सदस्य है और यूएन में नए सदस्यों के लिए हुए चुनाव में उसे अगली बार के लिए नहीं चुना गया. कल हुए गुप्त मतदान में सामान्य सभा ने मानवाधिकार परिषद के 18 नए सदस्यों का चुनाव किया है. इस परिषद में कुल 47 सदस्य होते हैं और एक सीमित अवधि के बाद नए सदस्यों का चुनाव होता है. भारत भी इस परिषद का सदस्य है और उसका कार्यकाल 2017 में खत्म हो रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान के लिए यह हार बहुत बड़ा झटका है क्योंकि वह अपनी जीत के प्रति आश्वस्त था और इसके जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहना चाहता था. यह भी महत्वपूर्ण है कि चुनाव के ठीक पहले यूएन के बाहर कई मानवाधिकार संगठनों ने वेनेजुएला, यूएई और पाकिस्तान के इस संस्था में निर्वाचन का विरोध किया था.
दक्षिण चीन सागर विवाद पर अमेरिका और चीनी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत
दक्षिण चीन सागर विवाद पर तनाव के बीच अमेरिका और चीन के नौसेना प्रमुखों ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की है. अमेरिका नौसेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट टिम हाकिंस ने इस मुलाकात के बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि यह काफी सकारात्मक थी. हालांकि उन्होंने बातचीत के मुद्दों का कोई भी विवरण मीडिया में जारी नहीं किया.
पिछले दिनों अमेरिका का एक युद्धपोत चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में निर्मित एक कृत्रिम द्वीप के नजदीक पहुंच गया था. चीन ने इसे अपनी संप्रभुता पर चुनौती बताते हुए धमकी दी थी कि वह ऐसी हरकतों का जैसे को तैसा वाली शैली में जवाब देगा. माना जा रहा है कि दोनों देशों के नौसेना प्रमुखों की यह बातचीत इसी तनाव को कम करने की कोशिश है.