पति और बच्चों को भेज कर दो से ढाई घंटे शरीर से कड़ी मेहनत करवाने वाली उन स्त्रियों से जब बातचीत होती स्त्री समाज की नियति पर क्रोध आता
हे भगवान हमें मोटी होने का हक दो. हमें अपनी बांहों पर बाल उगाने की हिम्मत दो. हमें देह को सजाने और न भी सजाने का फैसला लेने की बुद्धि दो. हमें साहस दो कि हमसे आइना जब सवाल करे हम उसे उलट दें. हमें हिम्मत दो कि हम छाती को छिपाती न फिरें. हे भगवान हमें हमारी देह से ऊपर उठा दो .
पिछले साल जिम जाकर हुलिया और सेहत सुधारने का भूत सर पर सवार हुआ! वजन में दो चार किलो का इजाफा मुझे नाकाबिले बर्दाश्त था! मैं सोचती उम्र बढ़ रही है, शरीर ढल रहा है, स्टेमिना कम हो रहा है. शायद जिम का व्यायाम मुझे कोई लाभ पहुंचाए. मुझे लगता था एक लंबी उम्र परिवार के लिए दौड़-दौड़कर बिता दी, खुद को खपा दिया. सीढियां चढने में हांफना, वर्क लोड से सांसों का तेज हो जाना, शरीर में भारीपन महसूस होना...अब कुछ समय खुद को और अपने स्वास्थ्य को भी दूं !
जिम में जाकर पता चला मैं बहुत पतली और स्वस्थ थी ! वहां पतली होने आई कई महिलाएं अपने 80, 100 और 120 किलो के शरीर से युद्ध कर रही थीं !
जिम में जाकर पता चला कि मैं बहुत पतली और स्वस्थ थी ! वहां पतली होने आई कई महिलाएं अपने 80, 100 और 120 किलो के शरीर से युद्ध कर रही थीं ! सोनिया, मोना, अनीता...कोई विवाहित तो कोई अविवाहित. ट्रेडमिल, साइकिल, ऎलिप्टेकल पर पसीने से लथपथ, बिना नाश्ता किए घर का बहुत सा काम निपटाकर. पति और बच्चों को भेज कर दो से ढाई घंटे शरीर से कड़ी मेहनत करवाने वाली उन स्त्रियों से जब बातचीत होती स्त्री समाज की नियति पर क्रोध आता.
अनीता की उम्र अभी 22 साल है और वजन 80 किलो! ऊपर से गालों पर फुंसियां और वह कमाती भी नहीं. उसके पापा अपनी बेटी की बदसूरती और नाकाबिलियत से परेशान होकर रातों को सोते तक नहीं! एक दिन वह बोली कि 'मैंने नर्सरी टीचर का एग्ज़ाम दिया हुआ है, अगर उसमें मेरा नाम नहीं आया तो मैं सूसाइड कर लूंगी. पापा कहते रहते हैं कि तू पतली तो हो ही सकती है कि नहीं ! इतना तो मेरे पर उपकार कर ही सकती होगी ! मैं कहां से हो जाऊं पतली? सब कुछ करके देख लिया.' जब वह मुझे अपनी बिखरी कहानियां सुन रही होती मैं सोच रही होती कि ये कोई उपन्यास या कहानी में से उडकर आई हुई घटनाएं हैं! इनकी जिंदगियों में कोई रोशनी, कोई चमक नहीं, कोई लडाई का भाव भी नहीं ! काश ये सोती न होतीं, जाग जातीं!
सोनिया अपनी आधी अधूरी आपबीती सुनाते हुए कभी रो पड़ती तो कभी गुस्से से आंख लाल करके फड़कते होंठों से कहती कि आज तो मन किया कि अपने हस्बेंड के पेट में चक्कू मार दूं!
सोनिया से साइकिल चलाते हुए अक्सर बात होती. बेहद पढी-लिखी, पिता की लाडली बेटी है. उसके पिता और उसने 34 लडके रिजेक्ट किए. उसके पिता को अपनी बेटी के मेंटल प्रोफाइल से मैच करता लडका नहीं मिला. आखिर में पडोस के बचपन के साथी से शादी की. हाइली क्वालिफाइड, बारीक समझ वाली सोनिया अपनी आधी-अधूरी आपबीती सुनाते हुए कभी रो पड़ती तो कभी गुस्से से आंख लाल करके फड़कते होंठों से कहती, 'आज तो मन किया कि अपने हस्बेंड के पेट में चक्कू मार दूं!'
कॉर्पोरेट जगत के उस पति को बच्चे की पैदाइश के बाद मोटी हो गई पत्नी नहीं चाहिए. दोनों के बीच लडाई के ढेर सारे मुद्दे हैं. नौबत तलाक तक आई हुई है पर असल बात आकर मोटापे तक पहुंच जाती है. पति पर्फेक्शनिस्ट है - ईगोइस्टिक, मैनेजमेंट गुरू जिसे अपनी पत्नी बच्चा जनते ही मोटी, भद्दी, गंवार और जंगली लगने लगी है. साल-छ महीने में आने वाली सास और कुंवारी ननद के साथ मिलकर पति उसके गंवारपन का मातम मनाते हैं. उसने अपनी पत्नी को हर साल तोहफों में पतले होने की मशीनें लाकर दी हैं. 45,000 वाला ट्रेडमिल, स्टेशनरी साइकिल, टमी ट्रेनर, तरह तरह के वेट्स. वह कहता है, 'बाकी सब तो तू छोड़, 5 साल से तू पतली तक तो हो नहीं सकी!'
सोनिया रोज बिना खाए 3 घंटे की कड़ी एक्सरसाइज करती है. उसने जिम में तीन महीने की पेमेंट की है. उतना समय खुद को पतला होने के लिए रखा है और साथ साथ स्कूलों में नौकरी के लिए इंटरव्यू भी दे रही है. शायद उसके बाद वह पति को छोड़ने या न छोड़ने के बारे में कोई फैसला ले पाएगी ! ( सोनिया से माफी, पिछ्ले सितम्बर में उसने मुझसे मेरे ब्लॉग में अपनी आपबीती लिखने के लिए कहा था पर मैं आज जाकर लिख रही हूं.)
ऎसी ही और भी कहानियां हैं जो दुख देती हैं. सोनिया की तरह 'चक्कू' मार देने जितना गुस्सा पैदा करती हैं. पर कहीं कुछ नहीं बदलता. न प्यार से न ही क्रोध से. और अंत में मेरे हाथ प्रार्थना में खुद-ब-खुद उठ जाते हैं - हे भगवान ! हमें खुद को समझने और खुद के लिए जीने का मौका दो. हमें हमारे हिस्से की खाद दो , हवा दो, पानी दो. हमें भी इंसानों की पंक्ति में जगह दो.
आमीन.
(यह लेख मूल रूप से आंख की किरकिरी नामक ब्लॉग पर प्रकाशित हुआ है)