बिहार विधानसभा चुनाव के पांचवें और आखिरी चरण में 9 जिलों की 57 सीटों के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में सर्वाधिक 59.46 प्रतिशत मतदान हुआ है. इस तरह पांचों चरण मिला कर बिहार में कुल 56.47 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2.5 प्रतिशत ज्यादा है. वोटरों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़े इस चरण में नीतीश कुमार के छह मंत्रियों समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं की किस्मत ईवीएम में बंद हुई.
उधर, मतदान संपन्न होने के बाद आये एग्जिट पोल के नतीजों में महागठबंधन और भाजपा गठबंधन (एनडीए) के बीच कांटे का मुकाबला बताया जा रहा है. टाइम्स नाउ-इंडिया टीवी-सीवोटर के एग्जिट पोल में महागठबंधन को 122 और एनडीए को 111 सीटें मिल रही हैं तो इंडिया टुडे-सिसेरो वोटर सर्वे में एनडीए को 120 और महागठबधन को 117 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. टुडेज़ चाणक्य के एग्जिट पोल में एनडीए को 155 तो महागठबंधन को 83 सीटें मिलने का अनुमान है. उधर, न्यूज एक्स-सीएनएक्स के एग्जिट पोल में एनडीए को 95 तथा महागठबंधन को 135 सीटें मिलती नजर आ रही हैं. वोटों की गिनती आठ नवंबर को होगी.


'मैं बहुत खुश हूं, क्यूंकि अब मैं अपनी धरती मां के पास भारत जा रहा हूं'

छोटा राजन,माफिया डॉन
इंडोनेशिया से भारत रवाना होते समय मीडिया से बातचीत में 



अब सोने को बैंक में जमा कर ब्याज पाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोने से जुड़ी तीन योजनाओं की शुरुआत की है. दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने स्वर्ण मौद्रीकरण योजना 2015, सावरेन स्वर्ण बॉंड योजना और अशोक चक्र के चिन्ह वाले सोने के सिक्के तथा बुलियन योजनाओं का अनावरण किया. स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमस) 2015 के जरिये लोग अपने पास रखे सोने को बैंकों में जमा कर सकेंगे. इस पर उन्हें 2.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा. सावरेन स्वर्ण बांड योजना के तहत निवेशक बांड पत्र खरीदकर सालाना 2.75 प्रतिशत ब्याज प्राप्त कर सकेंगे. दरअसल, इन योजनाओं का मकसद देश में सोने के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने और बेकार पड़े सोने को उपयोग में लाना है. केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 800 अरब डालर कीमत का 20,000 टन सोना घरों और अन्य जगहों पर बिना उपयोग के रखा रहता है.
कुंदन शाह, अरुंधति रॉय सहित 24 फिल्मकारों ने अपने पुरस्कार लौटाए
देश में बढ़ती असहिष्णुता पर बहस के बीच मशहूर फिल्मकार कुंदन शाह और लेखिका अरुंधति रॉय सहित 24 फिल्मकारों ने आज अपने पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है. इस दौरान 'जाने भी दो यारों' जैसी कॉमेडी फिल्म बना चुके शाह ने कहा,'आज के माहौल में नेशनल फिल्म अवार्ड जीतने वाली 'जाने भी दो यारों' बनाना नामुमकिन है, देश में एक अंधकार-सा बढ़ता जा रहा है, हमें आवाज़ बुलंद करनी होगी. मेरी लड़ाई कांग्रेस या बीजेपी से नहीं है. मेरा सीरियल 'पुलिस स्टेशन' कांग्रेस ने बैन किया था.' वहीं, बुकर प्राइज जीतने वाली लेखिका अरुंधति रॉय का कहना था, 'पूरी जनता, लाखों दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक आतंक में जीने को मजबूर हैं. अगर हमारे जैसे लोग अब एक साथ नहीं खड़े हुए तो बिगड़ते माहौल को संभालना मुश्किल हो जाएगा.' बता दें कि लेखक कलबुर्गी की हत्या और दादरी कांड के विरोध में कई साहित्यकार, फिल्मकार और इतिहासकार सरकार को अपना सम्मान लौटा चुके हैं.