बिहार चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार और पार्टी की आगे की योजनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वह बातचीत जो कभी हुई ही नहीं.
बिहार चुनाव से पहले भाजपा उम्मीद से भरी थी. परिणाम आया तो पता चला यह उम्मीद तो बस गैस थी, वो भी बिना सब्सिडी वाली जो पार्टी को काफी महंगी पड़ती दिख रही है. ऐसे में हमने सोचा कि क्यों न बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक रहे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से बात-बेबात की जाए. मगर जब इसके लिए हमने उनके पीए से संपर्क साधा तो उसने हमें बताया कि मोदी जी हमेशा काम की बात करते हैं. बात-बेबात तो कतई नहीं करते. फिर हमें उसे तर्क देकर समझाना पड़ा कि बात-बेबात, दरअसल मन की बात का ही एक तरीका है. ‘मन की बात’ बात का संदेश जब प्रधानमंत्री तक पहुंचा तो वे भाजपा की इस दुखभरी घड़ी में भी बात-बेबात के लिए तैयार हो गए और हमारे साथ खुलकर मन की बात की.
बिहार में ये क्या हो गया?
अभी कहां हुआ! मितरों!
मोदी जी, यहां हमारे और आप के अलावा और कोई नहीं है.
ओह! अभी तो हम बिहार में विकास को पैदा करने की सोच ही रहे थे...
हम ये सवाल पूछ रहे हैं कि भाजपा वहां कैसे हार गई?
मेरी समझ में तो यह नहीं आ रहा है कि महागठबंधन की जीत कैसे हो गई!
इसमें न समझने जैसा क्या है!
गाय को चारा हमने खिलाया और दूध उसने उनके पाले में दे दिया. आदमी का विश्वास तो पहले ही नहीं था अब तो जानवर पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता.
इस चुनाव से क्या सबक मिला.
यही कि एक्जिट पोल पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
आपको नहीं लगता आप का प्रचार काफी आक्रामक हो गया था.
आक्रामक नहीं धुआंधार कहो. यही हमारी शैली है और हम इसीलिए ही जाने जाते हैं.
फिर भी हार की कोई खास वजह?
एक तो पप्पू यादव और ओवैसी वोट नहीं काट पाए. दूसरे,  हमारे सहयोगी दल वोट ले नहीं पाए.
सहयोगी से याद आया कि शिवसेना के संजय राउत ने बिहार चुनाव नतीजों को एक बड़े नेता के पराभव का प्रतीक बताया है.
वे सही कह रहे हैं. इस चुनाव से मुलायम सिंह यादव का कद घटा है.
लालू जी कह रहे हैं कि लालटेन लेकर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएंगे! इसपर क्या कह कहेंगे?
भाइयो और बहनो!
मोदी जी आप फिर भूल गए! हम यहां अकेले हैं.
(यह सुनकर मोदी जी अपना चश्मा साफ करने लग जाते हैं)
मोदी जी आपने जवाब नहीं दिया.
अगर बिहार में विकास होता तो वहां शौचालय की इतनी समस्या नहीं होती.
जी!
इसे कहते हैं हास्यबोध! गला बैठा है दिल नहीं! हमारे संसदीय क्षेत्र में बिजली की समस्या नहीं है. वे बिना लालटेन के ही जा सकते हैं.
बिहार की हार के लिए अमित शाह पर गाज गिरेगी?
मेरा गला बैठा हुआ है. मुझसे ज्यादा न बुलवाइए.
गले में इन्फेक्शन हो गया है क्या!
ओवरस्ट्रैस के कारण ऐसा हुआ है. आप तो जानते ही हैं कि बिहार में खूब बोलना पड़ा.
पर ये तो आपकी आदत है.
वो बात तो सही है, पर हर चीज की एक लिमिट होती है. शास्त्रों में कहा भी गया है कि अति सर्वत्र वर्जयेत. मगर विकास के लिए हम अति करने को भी तैयार हैं...
आप बोले तो खूब मगर बिहार की जनता ने सुना नहीं.
सुना भाई. अच्छे से सुना. रैलियों में भीड़ नहीं देखी आपने!
फिर ऐसा नतीजा क्यों?
लोगों ने सुनी मेरे मन की, पर की अपने मन की. ये स्टेट मेरी समझ से बाहर है.
क्या अब मोदी मैजिक चल नहीं पा रहा है?
मैजिक तो है मेरे पास, मगर वह क्या है कि जनता एक ही चीज को बार-बार देखकर बोर हो जाती है. निकट भविष्य में आप मैजिक की कुछ और ट्रिक्स देख पाएंगे...ऐसा मुझे पूरा विश्वास है.
नीतीश जी ने कहा है कि कटुता से भरे चुनाव अभियान के बावजूद वे किसी से शत्रुता नहीं रखेंगे.
वे क्यों रखने लगे भई! हमारे दल में तो पहले से ही ‘शत्रु’ हैं.
आप मानेंगे कि दाल ने बिहार में आपकी दाल नहीं गलने दी?
यह आकलन सरासर गलत है. हमें मालूम है कि बिहार में नॉनवेज ज्यादा खाया जाता है. वहां रिकॉर्ड रैलियां करने के बाद बिहार को मैं इतना तो समझ ही गया हूं.
जी, तब तो आप यह भी जान गए होंगे कि नॉनवेज में प्याज का इस्तेमाल भी ज्यादा होता है...
(बात काटते हुए) असल में जीतने के बाद आपकी कमजोरी भी ताकत बताई जाने लगती है और हारने पर आपकी ताकत में कमजोरी ढूढ़ ली जाती है.
चुनाव में आपने जी-जान लगाकर मेहनत की थी, अब आगे की क्या योजना है?
रिकॉर्ड रैलियां करके थक गया हूं. पूरी श्रद्धा के साथ अब ‘भागवत’ कथा सुनने का विचार है.
बिहार चुनाव में आपके नेताओं के बड़बोलेपन, बिहारी बनाम बाहरी, दादरी जैसे मुद्दों से पार्टी को नकुसान...
(बात को काटते हुए) दरअसल यह पूरा चुनाव दृष्टिकोण की लड़ाई थी.
जी, मैं कुछ समझा नहीं!
दृष्टि हमारे पास थी और कोण वहां की जनता के पास.
थोड़ा विस्तार से बताएंगे?
देखिए, हमारे पास सफाई अभियान को लेकर दृष्टि है, मगर वहां की जनता ने इसे दूसरे कोण से ले लिया और हमें ही साफ कर दिया. हमने पैकेज की बात की, मगर उसने इस बात को कोण बदल कर देखा और हमें पैक कर दिया. हमने बात की विकास की, उसने बदले हुए कोण से इसे निकास समझ लिया.
माफ कीजिएगा मोदी जी बात अभी-भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई.
इतने सारे उदाहरणों के बाद भी!
जी!
यही तो सारी समस्याओं की जड़ है. हमारे देश में विजन नाम की चीज ही नहीं है.
है न मोदी जी, आपकी पार्टी का घोषणापत्र जिसे आप लोग विजन डाक्यूमेंट कहते हैं.
रुको मैं समझाता हूं. भविष्य किसी ने नहीं देखा, यह जानते हुए भी हमारी पार्टी ने पटाखे पहले से ही खरीद लिए थे. जीतते तो फोड़ते, नहीं जीते तो अब हमारे लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं को दीवाली की भीड़-भाड़ में पटाखे खरीदने की जरूरत ही नहीं पडे़गी. दूसरे उनके पैसे भी बचे. इसे कहते है विजन! यह कहलाती है दृष्टि!
जी अब समझ में आ गया. जैसे आपने कहा पैकेज और हमने समझा पैकेजिंग यह हुआ कोण और शादी होने के पहले ही बेटे का नाम – विकास, सोच लेना, यह हुआ विजन.
बेटा ही क्यों भाई! अगर बेटी हुई तो?
तब उसका नाम प्रगति.
शाबाश! चलो बात-बेबात में कोई तो सार्थक बात हुई (लंबी सांस छोड़ते हुए).
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जी ने कहा था कि भाजपा बिहार में हारी तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे. लोगों का कहना है कि इस बयान की वजह से पार्टी को बहुत नुकसान हुआ.
ऐसा नहीं है. उन्होंने बिलकुल ठीक कहा था.
जी!
पहले यह प्लान था कि अगर हम हारे तो पटाखे पाकिस्तान एक्सपोर्ट कर दिए जाएंगे ताकि वहां हमारे हिंदू भाइयों के काम आ सकें. मगर फिर कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए वह प्लान हमने चेंज कर दिया.
मोदी जी पाकिस्तान का तो पता नहीं पर यहां हिंदुस्तान में खूब पटाखे फूटे हैं.
(आवेश में आते हुए) तो आपके मन में क्यों लड्डू फूट रहे हैं.
ऐसी कोई बात नहीं मोदी जी. अच्छा, क्या आप इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं?
कैसे ले सकता हूं!
क्यों!
मैं तो चाय बेचकर आगे बढ़ा हूं. मेरा तो कोई परिवार भी नहीं हैं. मेरा पूरा जीवन भारत माता के चरणों में अर्पित है. अब तक मैंने सिर्फ और सिर्फ देने का काम किया है. मैं इतना स्वार्थी नहीं हूं कि कुछ लूं.
दीवाली के पर्व पर देशवासियों से कुछ कहना चाहेंगे?
अब तुमने काम की बात की है. भाइयो और बहनो! दीवाली की हार्दिक...
(बात पूरी करते- करते मोदी जी अचानक से रुक गए. वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि हार्दिक से हार्दिक पटेल की याद आ गई. इसके तुरंत बाद उनका मूड कुछ बदल सा गया और वे हाथ हिलाते हुए वहां से ऐसे रुखसत हुए जैसे किसी रैली को संबोधित करने आए हों)