पंजाब में अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस की जैसी हालत है और आम आदमी पार्टी जिस तरह की तैयारियों में जुटी है, उनसे निकलने वाले संकेत अब स्पष्ट होते जा रहे हैं.

शुक्रवार को पंजाब के मुक्तसर में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की रैली में जो भारी भीड़ उमड़ी उसे सूबे में आप के अब तक के अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक केजरीवाल की इस रैली में तकरीबन एक लाख लोग आए थे. हालांकि, आम आदमी पार्टी इस संख्या को और अधिक बता रही है.
अपनी इस रैली में केजरीवाल ने वही आक्रामकता दिखाई है जिस तरह की आक्रामकता वे दिल्ली के चुनावों में पहले शीला दीक्षित के खिलाफ और बाद में नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिखाते थे. पंजाब में एक तरह से आप के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने न सिर्फ प्रदेश में सत्ताधारी बादल परिवार पर जमकर हमले बोले बल्कि नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के नेताओं को भी नहीं छोड़ा.
दो बार विधानसभा चुनावों में आप को जिताने वाली दिल्ली तक में तब पार्टी का खाता नहीं खुल सका था. उस समय आम आदमी पार्टी को पंजाब में 24.4 फीसदी वोट मिले थे.
चुनावी रैली को संबोधि‍त करते हुए केजरीवाल ने यहां तक कहा कि वह राज्य में सत्तासीन बादल परिवार से नहीं डरते और जरूरत पड़ी तो पंजाब के लिए शहीद भी हो जाएंगे. उन्होंने कहा, 'मैं बादलों से कहना चाहता हूं कि जब मैं तुम्हारे ताऊजी मोदी से नहीं डरा तो तुम से क्या डरूंगा.' उन्होंने पीएम को संबोधि‍त करते हुए कहा, 'मोदी जी, सीबीआई से बादल, कांग्रेसी डरते होंगे, मैं नहीं डरता.' अपनी इस रैली में केजरीवाल ने जो मुद्दे उठाए उनसे साफ है कि उनकी पार्टी 2017 की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में किन मुद्दों पर अपने पक्ष में वोट जुटाने की कोशिश करेगी.
इससे पहले नवंबर, 2015 में दिल्ली में आयोजित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में पार्टी के कर्ताधर्ता अरविंद केजरीवाल का अपने कार्यकर्ताओं से कहना था कि पंजाब में भी पार्टी को दिल्ली जैसा मौका मिल सकता है. उनका कहना था, 'दिल्ली की जीत एक चमत्कार थी. हमें बस ईमानदारी से कठिन काम करते रहना है. चुनाव के पीछे मत भागें. सभी संकेत हैं कि आप पंजाब में भी इसी तरह का अवसर पाने जा रहे हैं.'
देश की राजधानी में केजरीवाल जो बात कह रहे हैं, उसके लिए उन्हें हिम्मत पंजाब से मिल रही खबरों से मिल रही है. 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को जो चार सीटें मिलीं, वे सभी पंजाब से ही थीं. दो बार विधानसभा चुनावों में आप को जिताने वाली दिल्ली तक में तब पार्टी का खाता नहीं खुल सका था. उस समय आम आदमी पार्टी को पंजाब में 24.4 फीसदी वोट मिले थे. वहां पार्टी को मिली सफलता के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि लोग कांग्रेस के साथ-साथ अकाली-भाजपा गठबंधन से भी तंग हैं. यही वजह है कि सूबे के लिए एक अनजान सी पार्टी को भी चार सीटें मिल गईं.
पंजाब की राजनीति को करीब से देखने वाले पत्रकारों और लोगों की मानें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाते दिख रही है.
यहीं से आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह लग गया कि पंजाब में पार्टी के लिए बड़ी संभावनाएं हो सकती हैं. इसके बाद से वह वहां अलग-अलग ढंग से लगातार काम कर रही है. पंजाब की राजनीति को करीब से देखने वाले पत्रकारों और लोगों की मानें तो पंजाब में आप अपने पक्ष में माहौल बनाते दिख रही है. इन लोगों के मुताबिक 2017 के चुनाव में अकाली और भाजपा के लिए तो कोई खास संभावनाएं नहीं हैं और कांग्रेस भी हाल तक आंतरिक मतभेद से जूझ रही थी. अब कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं तो माना जा रहा है कि पार्टी में आंतरिक खींचतान में कमी आएगी. वहीं प्रदेश में बादल के खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी की बात भी कही जा रही है. प्रकाश सिंह बादल की सरकार पर कई तरह के आरोप भी लगते रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल को पंजाब में इन्हीं बातों का फायदा होते दिख रहा है. पंजाब के पत्रकारों के मुताबिक आम आदमी पार्टी की सभाओं में जिस तरह से लोग आ रहे हैं, उससे यह संकेत स्पष्ट तौर पर मिल रहा है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में यह पार्टी न सिर्फ अकाली-भाजपा को बल्कि कांग्रेस को भी जोरदार टक्कर देने जा रही है. हाल के दिनों में पार्टी की तकरीबन तीन दर्जन सभाएं हुई हैं. जब पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की एक सभा हुई तो इसमें तकरीबन 35,000 लोग जमा हो गए.
आप पंजाब में इस स्थिति में है कि उसे 2017 के चुनावों में एक मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जाए तो इसकी वजह अकाली-भाजपा और कांग्रेस के योगदान के अलावा पिछले कुछ महीनों में पार्टी द्वारा की गई जबर्दस्त मशक्कत भी है.
आज अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में इस स्थिति में है कि उसे 2017 के चुनावों में एक मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जाए तो इसकी वजह अकाली-भाजपा और कांग्रेस के योगदान के अलावा पिछले कुछ महीनों में पार्टी द्वारा की गई जबर्दस्त मशक्कत भी है. हालांकि इस दौरान पार्टी को आंतरिक मतभेद से भी जूझना पड़ा है. उसने अपने चार में से दो सांसदों - धर्मवीर गांधी और हरिंदर सिंह खालसा - पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की. इसके अलावा भी पार्टी से जुड़े कई तरह के मतभेद और विवाद मीडिया की सुर्खियों में रहे. इसके बावजूद कई स्तरों पर लगातार प्रयास आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से हो रहे हैं.
अगर रैलियों की बात करें तो अपनी 'पंजाब जोड़ो' रैलियों में न सिर्फ अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंजाब की बदहाली का मसला आम आदमी पार्टी उठा रही है बल्कि कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर भी लगातार हमले बोल रही है.
इसके अलावा आप पंजाब में भी दिल्ली की तरह लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की योजना के तहत काम कर रही है. हालांकि यहां ऐसा करना बेहद मुश्किल है. दिल्ली में जहां 36 लाख घर हैं, वहीं पंजाब में यह आंकड़ा 70 लाख है. बताया जा रहा है कि पार्टी घर—घर जाने का अभियान अगली साल जनवरी से शुरू करने वाली है. इसके लिए उसने बूथ स्तर के 23,000 कार्यकर्ताओं को लगाने की योजना बनाई है. ये कार्यकर्ता घर—घर जाकर लोगों से संवाद बनाने की कोशिश करेंगे.
केजरीवाल सरकार दिल्ली में जो भी अच्छे काम कर रही है, पार्टी कार्यकर्ता पंजाब में उसका प्रचार—प्रसार करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
पंजाब में पार्टी के पक्ष में अगर माहौल बनते दिख रहा है तो इसके लिए बिसात बिछाने का काम दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भी किया है. जब वे दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने 1984 के दंगों की एसआईटी जांच के आदेश दिए. इसके अलावा केजरीवाल ने 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों के लिए पांच लाख रुपये का मुआवजा भी घोषित किया. दिल्ली में केजरीवाल के इन फैसलों का भी पंजाब में असर बताया जा रहा है. केजरीवाल सरकार दिल्ली में जो भी अच्छे काम कर रही है, पार्टी कार्यकर्ता पंजाब में उसका प्रचार—प्रसार करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पंजाब का दिल्ली से नजदीक होना भी पार्टी के लिए सकारात्मक साबित हो रहा है.
केजरीवाल के करीबी समझे जाने वाले और पंजाब में पार्टी के प्रभारी संजय सिंह पार्टी संगठन को प्रदेश में मजबूत करने के लिए न सिर्फ लगातार पंजाब के दौरे कर रहे हैं बल्कि पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए उन्होंने पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता आशुतोष के साथ कनाडा तक के चक्कर लगा लिए. एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में 50 लाख से अधिक पंजाबी रहते हैं.
देश के बाहर रहने वाले पंजाब के ये लोग न सिर्फ सियासी दलों को चंदा देते हैं बल्कि जमीनी स्तर पर उनके पक्ष में माहौल तैयार करने में भी इनकी बड़ी भूमिका होती है. उधर खबरों के मुताबिक पिछले दिनों जब अकाली दल के प्रतिनिधि इनके बीच गए थे तो उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा था.
इन सबका मिला-जुला प्रभाव यह दिख रहा है कि अब पार्टी के विरोधियों तक में से कुछ मानने लगे हैं कि अगर कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार औपचारिक तौर पर नहीं घोषित किया तो पंजाब की अगली सरकार आम आदमी पार्टी की भी बन सकती है.