सिद्धार्थ माल्या, सनी लियोनी, साजिद खान और हमारी सहिष्णुता!
सिद्धार्थ माल्या, सनी लियोनी और साजिद खान ‘स’ शब्द से शुरू होने वाले तीन ऐसे नाम हैं जो अपनी-अपनी फिल्मों और विचारों-बातों से दर्शकों पर शनि की साढ़े साती चढ़ाने का दमखम रखते हैं! लेकिन अगर आप अभी तक यही सोच रहे हैं कि सिद्धार्थ माल्या कहां फिल्मों से जुड़े आदमी हैं, वे तो सुरा को सुराही से कैन में शिफ्ट करने वाली पीढ़ी के व्यवसायी हैं, तो आप गलत हैं. उनकी डेब्यू प्रयोगधर्मी फिल्म ‘ब्राह्मण नमन’ एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली है और हम उस भविष्य को लेकर डरे हुए हैं जब वे मुख्यधारा की मसाला हिंदी फिल्में करेंगे.लेकिन इससे ज्यादा हम सनी लियोनी की बातों से डरे हुए हैं. ट्विटर पर उनके एक ट्वीट का आमिर खान ने जवाब क्या दे दिया, अब लियोनी चाहती हैं कि आमिर खान बड़े परदे पर उनके साथ रोमांस करें. वे शाहरुख और सलमान के साथ तीन पत्ती भी खेलना चाहती हैं. खुदा खैर करे! और साजिद खान को भी बोलने से बैन करे. क्योंकि महीनों शांत रहने के बाद अब साजिद खान का कहना है कि ‘हमशकल्स’ के बाद उन्हें ‘बेवजह’ गालियां पड़ी क्योंकि लोग उनकी फिल्म की नहीं, उनकी समीक्षा कर रहे थे. यहां पाठकों को इन घटनाओं की जानकारी सिर्फ इसलिए दी जा रही है ताकि सनद रहे और भविष्य में इनकी जो भी हरकतें हों वे उन्हें अपनी सहिष्णुता की परीक्षा समझें.


'बॉलीवुड के लोग हमेशा ही चाहते हैं कि हीरोइन प्लास्टिक सर्जरी कराए. जब वो करवा लेती है तो लोग उसकी आलोचना करते हैं कि क्यों करवाई. आखिर अभिनेत्रियां करें तो क्या करें?'

संध्या मृदुल



सुशांत सिंह राजपूत, सैफ अली खान के वारिस बनने वाले हैं

हम आपको हमेशा से बताते रहे हैं कि नवाब सैफ अली खान फिल्में साइन कर उन्हें छोड़ने की आदत के मारे रहे हैं. अब लगता है कि नवाब साहब को अपना वारिस भी मिल गया है! सुशांत सिंह राजपूत के रूप में. इन दिनों राजपूत साहब कुछ निर्माता-निर्देशकों के लिए पूत-सपूत की जगह कपूत बने हुए हैं. सबसे पहले उन्होंने अपने मेंटर और उन्हें फिल्मों में लाने वाले ‘काई पो छे’ के निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म ‘फितूर’ छोड़ी. इसके बाद अब उन्होंने मोहित सूरी की ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ छोड़ दी है जिसकी निर्माता एकता कपूर हैं. वो भी पहली दफा निर्देशन करने जा रहे दिनेश विजन की फिल्म के लिए.
खबर है कि इससे एकता कपूर बेहद नाराज हैं क्योंकि उनकी फिल्म फ्लोर पर जाने को तैयार है और फिल्म का मुख्य नायक ही फिल्म से बाहर निकल लिया है!  सबसे मजेदार है कि सुशांत ने एकता कपूर के साथ ऐसा पहले भी किया है. ‘पवित्र रिश्ता’ के दौरान उन्होंने एकता के लाख मना करने के बावजूद ये सीरियल छोड़ दिया था और फिल्मों में आने का प्रयास शुरू कर दिया था. सारांश ये है कि फिल्मों में लाने वाले अभिषेक कपूर और धारावाहिकों में लाने वाली एकता कपूर दोनों को, उनके प्यारे सपूत ने ही पीड़ा का रसपान कराया है.


फ्लैशबैक – ‘एक चतुर नार’ गीत का कॉमिक अतीत 
अशोक कुमार
अशोक कुमार
यदि हम हिंदी फिल्मों के कुछ सर्वकालिक कॉमिक गीतों की बात करें तो सबसे पहले ‘इक चतुर नार बड़ी होशियार’ गीत ही याद आता है. यह तो सब जानते हैं कि किशोर कुमार और मन्ना डे ने इसे ‘पड़ोसन (1968)’ फिल्म के लिए गाया था लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि आरडी बर्मन का संगीतबद्ध किया यह कल्ट गीत ओरिजनल नहीं है.
ओरिजनल ‘इक चतुर नार कर कर श्रृंगार’ बोल वाला गीत आजादी से पहले एक पारसी महिला संगीतकार सरस्वती देवी ने तैयार किया था. यह गीत 1941 में आई ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म ‘झोला’ में शामिल हुआ था. इससे जुड़ी एक और दिलचस्प बात है कि तब ‘झोला’ में इसे गाया था अशोक कुमार यानी किशोर कुमार के बड़े भाई ने! वे ‘झोला’ के नायक थे और उन्होंने भी नहाते वक्त गुनगुनाने के लिए बने चार-पांच पंक्तियों वाले इस छोटे-से गीत को तब मजाकिया अंदाज में ही गाया था.
‘इक चतुर नार कर कर श्रृंगार’ बोल वाला गीत आजादी से पहले एक पारसी महिला संगीतकार सरस्वती देवी ने तैयार किया था
कहते हैं उस दौरान मुंबई आए किशोर कुमार अपने बड़े भाई और स्टार अशोक कुमार के साथ साये की तरह साथ रहा करते थे. इस गाने की धुन और बोल शायद उसी समय से उनके दिमाग में कहीं हमेशा के लिए बस गए थे. जब ढाई दशक बाद ‘पड़ोसन’ के लिए आरडी बर्मन को एक मजेदार गीत बनाना था, किशोर कुमार ने ही उन्हें इस गीत का सुझाव दिया था. फिर पंचम दा ने गीत के शुरुआती बोल और अंदाज लेकर एक बिलकुल ही अलग गीत तैयार किया और ओरिजनल गीत को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने दो गायकों और एक अनोखी सिचुएशन के आस-पास ऐसा गीत बनाया जो आज भी अलहदा और अद्धुत है, बस इस गंगोत्री का गोमुख ढाई दशक पहले सरस्वती देवी के हाथों से निकला संगीत है. वो सरस्वती देवी जिन्हें जद्दनबाई के बाद हमारी फिल्म इंडस्ट्री की दूसरी महिला संगीतकार होने का रुतबा हासिल है. एक और बात, पहली महिला संगीतकार जद्दनबाई को अभिनेत्री नरगिस की मां होने का भी रुतबा हासिल है!