शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे की वाराणसी यात्रा से लोगों की उम्मीदों के तार क्योटो से लेकर मेट्रो तक जुड़ते हैं.
इस शनिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बनारस यात्रा का औपचारिक मकसद जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे को यहां की संस्कृति से परिचित कराना है. यही वजह है कि इस दौरे के लिए जो भी कार्यक्रम तय किए गए हैं, उनमें कोई साझा प्रेस वार्ता या विकास को लेकर किसी साझे आयोजन का जिक्र नहीं है. दोनों प्रधानमंत्रियों को गंगा आरती में शामिल होना है. इसके बाद वे शहर में ही तकरीबन घंटे भर के एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. इसके बावजूद बनारस के लोगों से बातचीत की जाए तो पता चलता है कि दोनों प्रधानमंत्रियों की इस यात्रा से लोगों को कई उम्मीदें हैं.
क्योटो का क्या हुआ?
पहली उत्सुकता तो इस बात को लेकर है कि वाराणसी को क्योटो की तर्ज पर विकसित करने का जो समझौता हुआ था उस पर क्या हो रहा है. काशी हिंदू विश्वविद्यालय की शोध छात्रा अर्चना राय कहती हैं, दोनों प्रधानमंत्रियों को अपने इस दौरे में आम लोगों के बीच इस बात को स्पष्ट करना चाहिए कि वाराणसी को जापान के क्योटो के तर्ज पर विकसित करने के लिए दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ था, उसकी अभी की स्थिति क्या है.' उनकी तरह और भी कई लोग हैं जो जानना चाहते हैं कि इस परियोजना पर कम से कम कागजी स्तर पर ही सही कोई काम आगे बढ़ा है या नहीं, क्योंकि इस बारे में घोषणा होने के बावजूद जमीनी स्तर पर बनारस की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.
'मोदी के सांसद बनने के बाद शहर और आसपास के इलाकों का विकास करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा हुई है. लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश समस्याएं बनी हुई हैं.'
यहां कुछ नौजवान ऐसे भी हैं जिन्होंने इस बारे में घोषणा होने के बाद क्योटो शहर की सुविधाओं को गूगल करके देखा और इसके मुकाबले जब ये अपने शहर की स्थिति देखते हैं तो कहते हैं कि अब तक तो कुछ काम नहीं हुआ है. वे चाहते हैं कि जापानी प्रधानमंत्री खुद यहां आ रहे हैं तो इस बात को लेकर स्पष्टता हो जानी चाहिए कि बनारस को क्योटो बनाने के सपने की हकीकत क्या है.
घोषणाओं पर रिपोर्ट कार्ड
राजेश पटेल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांव जयापुर के रहने वाले हैं. लेकिन वे काम करते हैं बनारस में. वे कहते हैं, 'वाराणसी से मोदी के सांसद बनने के बाद इस शहर और आसपास के इलाकों का विकास करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा हुई है. लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश समस्याएं बनी हुई हैं.' पटेल आगे कहते हैं, 'ऐसे में यह पता ही नहीं चलता कि ये घोषणाएं सिर्फ हवा—हवाई ही साबित होंगी या फिर जमीन पर भी उतरेंगी.' उनके मुताबिक मोदी को अपने इस दौरे में यह बताना चाहिए कि उनके संसदीय क्षेत्र के लिए अब तक जिन परियोजनाओं की घोषणा हुई है, उनकी स्थिति क्या है. कई लोगों की बातों से यह पता चलता है कि उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि बनारस के लिए जिन परियोजनाओं की घोषणा अब तक हुई है उनमें से किसी पर काम चल भी रहा है या नहीं.
उनकी मोदी से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि वे इस क्षेत्र के सांसद होने के नाते वाराणसी में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना में निजी दिलचस्पी लें और इसे दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर विकसित कराएं.
मेट्रो परियोजना
शहर के युवाओं से मुलाकात में एक बात मुख्य तौर पर समझ में आती है. उनकी प्रधानमंत्री मोदी से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि वे इस क्षेत्र के सांसद होने के नाते वाराणसी में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना में निजी दिलचस्पी लें और इसे दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर विकसित कराएं. कॉलेज जाने वाली अंकिता कहती हैं कि उन्होंने दिल्ली में मेट्रो का सफर किया है और वे इसे परिवहन का सबसे बढ़िया और सुरक्षित माध्यम मानती हैं. उन्हें यह भी मालूम है कि दिल्ली मेट्रो परियोजना विकसित करने में जापान की बेहद अहम भूमिका रही है. इसलिए भी उन्हें दोनों प्रधानमंत्रियों के इस दौरे में मेट्रो परियोजना को लेकर अहम घोषणा की उम्मीद है. वे कहती हैं, 'अगर बनारस में भी मेट्रो चलने लगे तो मुझ जैसी काफी लड़कियों के लिए कॉलेज आना-जाना आसान हो जाएगा. महिलाओं की जिंदगी का एक झंझट कम होगा.'
वाराणसी की सबसे बड़ी समस्याओं में एक सड़कों पर रोज लगने वाला जाम है. शहर की मुख्य सड़कों पर भी कई बार लोग घंटों जाम में फंसे रहने के लिए मजबूर हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर शहर में मेट्रो बनाने का प्रस्ताव है और अभी इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार हो रही है.
दोनों प्रधानमंत्रियों को अपने इस दौरे में कुछ ऐसी औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा करनी चाहिए जिनसे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें
औद्योगिक परियोजनाएं
जापान की पहचान एक औद्योगिक देश की रही है जिसने अपना विकास तकनीक के क्षेत्र में काम करके किया है. ऐसे में वाराणसी के लोगों को यह उम्मीद है कि दोनों प्रधानमंत्रियों को अपने इस दौरे में कुछ ऐसी औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा करनी चाहिए जिनसे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें. देश के ज्यादातर इलाकों की तरह इस क्षेत्र में भी बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है. लोगों ने जब लोकसभा चुनावों में मोदी के पक्ष में मतदान किया था तो उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वे कुछ ऐसा करेंगे जिससे बनारस और आसपास के इलाके के युवाओं की बेरोजगारी कुछ कम होगी. लेकिन इस मोर्चे पर भी अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है. अब एक बार फिर यहां के लोग यह उम्मीद लगा रहे हैं कि दोनों प्रधानमंत्रियों के इस दौरे में जापान के सहयोग से कुछ औद्योगिक परियोजनाएं विकसित करने की घोषणा होनी चाहिए.
थोड़ा और वक्त
थोड़ी अधिक उम्र के लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपने संसदीय क्षेत्र में अभी के मुकाबले थोड़ा और वक्त देना चाहिए. मोदी के संसदीय कार्यालय में अपनी एक समस्या लेकर आए मदन तिवारी के मुताबिक अपनी इस यात्रा में मोदी जी को यह घोषणा करनी चाहिए कि वे अपने संसदीय क्षेत्र में और वक्त देंगे. वे कहते हैं, 'हमें मालूम है कि वे प्रधानमंत्री हैं और उनके लिए बार—बार बनारस आना संभव नहीं है लेकिन फिर भी उन्हें वक्त निकालकर महीने-दो महीने में एक बार यहां जरूर आना चाहिए.' तिवारी का मानना है कि प्रधानमंत्री को अपनी ये यात्राएं सिर्फ बनारस शहर तक सीमित नहीं रखनी चाहिए बल्कि कभी-कभार ग्रामीण इलाकों में भी जाना चाहिए. वे बताते हैं, 'कहने के लिए तो हमारे प्रतिनिधि देश के प्रधानमंत्री हैं लेकिन अगर वे क्षेत्र की जनता से बहुत दूर हो जाएंगे तो हम जैसे लोगों को शायद धीरे-धीरे यह लगने लग सकता है कि किसी बड़े नेता का चुनाव जीतने से अच्छा है कि किसी ऐसे आदमी को वोट दिया जाए जो लोगों की पहुंच में रहे और उनकी परेशानियों को समझे.'