वाराणसी शहर से तकरीबन 30 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव जयापुर में पहुंचने के बाद पहला खयाल यही आता है कि इस गांव को आदर्श ग्राम योजना में सोच-समझकर चुना गया होगा. आम तौर पर देश की या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस के आसपास के गांवों की जो स्थिति है, उसके मुकाबले जयापुर काफी आगे दिखता है. अच्छी पिच सड़क के किनारे बसे इस गांव में लोगों के बड़े-बड़े पक्के घर दिखते हैं. गांव के पास ही एक बड़ा निजी स्कूल है और उसमें बड़ी संख्या में आसपास के बच्चे पढ़ते हैं. ये सुविधाएं इस गांव के पास पहले से हैं न कि नरेंद्र मोदी द्वारा इसे आदर्श गांव के तौर पर विकसित करने के लिए चुने जाने के बाद यहां के लोगों तक पहुंची हैं.

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत इस गांव में काम ही नहीं हुआ है. साल भर के समय के हिसाब से जयापुर में काफी काम दिखते हैं. इन कामों के अलावा लोगों में एक उम्मीद दिखती है कि प्रधानमंत्री उनके गांव का पूरा विकास करेंगे. गांव के लोग अब भी यह नहीं भूले हैं कि पिछले साल नवबंर में इस योजना की शुरुआत के वक्त प्रधानमंत्री खुद उनके यहां आए थे. हर आदमी उस जगह की पहचान कराना चाहता है जहां मोदी का मंच तैयार हुआ था. यहां के लोग इस बात से खुश दिखते हैं कि उनके गांव की पहचान ‘मोदी जी के गांव’ के तौर पर हो रही है.

साल भर के समय के हिसाब से जयापुर में काफी काम दिखते हैं. इन कामों के अलावा लोगों में एक उम्मीद दिखती है कि प्रधानमंत्री उनके गांव का पूरा विकास करेंगे

नरेंद्र मोदी द्वारा इस गांव को गोद लिए जाने के बाद यहां दो बैंकों की शाखाएं खुली हैं. एक है यूनियन बैंक और दूसरा सिंडिकेट बैंक. इन दोनों बैंकों की शाखाओं के साथ एटीएम भी लगे हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि ये दोनों एटीएम चालू हालत में हैं. आदर्श ग्राम योजना में जयापुर के शामिल होने के बाद यहां भारतीय स्टेट बैंक का एक ग्राहक सेवा केंद्र भी खुला है. तकरीबन चार हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों के लिए ये बैंक बड़ी राहत लेकर आए हैं.

यूनियन बैंक की शाखा में किसी काम से आए गांव के ही अरुण कुमार सिंह कहते हैं, ‘इन बैंकों से लोगों को काफी सुविधा हो गई है. अब न सिर्फ लोग अपना खाता खोलकर पैसा जमा कर पा रहे हैं बल्कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज भी ले पा रहे हैं. इसके अलावा जिनके बच्चे बाहर पढ़ते हैं, उनके लिए अपने बच्चों को पैसा भेजना आसान हो गया है.’ यह पूछे जाने पर कि बैंक से कर्ज की तो अपनी प्रक्रिया होती है और आम तौर पर गरीबों को कर्ज मिलने में दिक्कत होती है, वे कहते हैं, ‘इसके बावजूद यहां बहुत कम दिक्कत के साथ लोगों को कर्ज मिल रहा है.’

गांव में एक डाकघर भी आदर्श ग्राम योजना के तहत खुला है. इंटरनेट से जुड़े होने के कारण इस डाकघर में स्पीड पोस्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां मुख्य सड़क पर दो यात्री प्रतीक्षालय बने हैं. ये देखने में बड़े खूबसूरत हैं. लेकिन आश्चर्यजनक यह जानना है कि जिस सड़क पर ये दो यात्री प्रतीक्षालय बने हैं, उस पर कोई यात्री बस चलती ही नहीं. ऐसे में इन दोनों यात्री प्रतीक्षालय का औचित्य समझ नहीं आता. इस बारे में पूछने पर गांव के ही संजय पटेल बताते हैं, ‘आने वाले दिनों में जब बस सेवा शुरू होगी तो ये दोनों बस स्टैंड काम आएंगे.’

गांव की जरूरत और यहां होने वाले कामों के बीच ऐसा असंतुलन और भी कुछ चीजों में दिखता है. इसकी मूल वजह है कि ये काम सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की योजना से नहीं कई गैर सरकारी संगठनों के द्वारा किये गए हैं. इनमें से स्थानीय कोई नहीं है. कोई गुजरात से है, तो कोई दिल्ली से, तो कोई मुंबई से. गांव वालों की मानें तो एनजीओ वाले प्रधानमंत्री की नजर में खुद को लाने के मकसद से आ रहे हैं और यहां कोई न कोई काम करके जा रहे हैं.

यहां मुख्य सड़क पर दो यात्री प्रतीक्षालय बने हैं. ये देखने में बड़े खूबसूरत हैं. लेकिन आश्चर्यजनक यह जानना है कि जिस सड़क पर ये दो यात्री प्रतीक्षालय बने हैं, उस पर कोई यात्री बस चलती ही नहीं
जयापुर में यात्री प्रतीक्षालय
जयापुर में यात्री प्रतीक्षालय

इसी वजह से बगैर जरूरत का यात्री प्रतीक्षालय बन गया और सीमेंटेड ईंटों से बनी एक ऐसी सड़क भी जो कि गांव के हिसाब से ठीक नहीं है. चूंकि इस तरह की सड़कों के नीचे मिट्टी होती है जिसके दबने के साथ ईंटें बैठ जाती हैं और सड़क खराब हो जाती है. यही जयापुर में भी हुआ है. अब ये ईंटें उखाड़ी जा रही हैं और इसकी जगह ढलाई वाली सड़क बनाने की योजना है.

जयापुर के राजू पटेल बताते हैं, ‘गांव की गली बनाने में दो बार पैसे खर्च हो रहे हैं. जब सीमेंटेड ईंट की सड़क बन रही थी तो उस वक्त भी गांव के लोगों ने मना किया था कि यह सड़क यहां नहीं चलेगी. लेकिन जो लोग सड़क बनाने आए थे, उन्होंने इसे अनसुना कर दिया. अब फिर से सड़क बनेगी. इस तरह से दो बार लाखों रुपये खर्च होंगे. यही पैसा अगर किसी दूसरे काम में लगता तो इससे गांव को दोहरा फायदा होता.’

नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं, वहां स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र करते हैं. जयापुर में भी इस योजना के तहत काफी काम दिखता है. सात टोलों के इस गांव में तकरीबन हर घर के बाहर बायोटॉयलेट दिखते हैं. ग्राम प्रधान दुर्गावती पटेल बताती हैं, ‘जयापुर में इस योजना के तहत 525 शौचालय बने हैं. इसका सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिला है जो गरीब हैं और जिनके लिए खुद से शौचालय बनाना आसान नहीं था.’

हालांकि, गांव के ग्राम पंचायत भवन के पास लगाए गए दो सार्वजनिक बायोटॉयलेट की दशा कुछ ही दिनों में बिगड़ी दिखती है. एक शौचालय बंद है तो दूसरा इस्तेमाल करने लायक नहीं. वजह पूछे जाने पर पंचायत भवन के पास ही चाय बेचने वाले हंसराज कहते हैं, ‘घरों में जो शौचालय हैं, वे सही हालत में हैं लेकिन ये खराब हो गए हैं. अगर किसी ने एक बार आकर शौचालय बना दिया तो इसकी देखरेख तो यहीं के लोगों को करनी होगी लेकिन लोग ऐसा नहीं करते.’

नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं, वहां स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र करते हैं. जयापुर में भी इस योजना के तहत काफी काम दिखता है. सात टोलों के इस गांव में तकरीबन हर घर के बाहर बायोटॉयलेट दिखते हैं


यूनियन बैंक, जयापुर
यूनियन बैंक, जयापुर

आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव में एक और बड़ा काम दिखता है सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइटिंग. ग्राम प्रधान बताती हैं, ‘पिछले कुछ महीनों में गांव में तकरीबन 135 जगहों पर सोलर लाइटें लगाई गई हैं. इससे रात में भी यहां अंधेरा नहीं रहता. बिजली अगर नहीं भी रहे तो गांव की गलियों में रौशनी रहती हैं.’ अब गांव में सौर ऊर्जा की आपूर्ति घरों में करने की योजना पर भी काम हो रहा है. यहां 25 किलोवॉट का एक सोलर संयंत्र लगाया गया है. पेशे से शिक्षक अश्विनी कुमार सिंह बताते हैं, ‘इस संयंत्र से लोगों के घरों में कनेक्शन देने का काम शुरू भी हो गया है. आने वाले दिनों में यह और तेजी से बढ़ेगा. हम लोग तो यह भी सुन रहे हैं कि कुछ दिनों में ऐसे और भी प्लांट गांव में लगेंगे.’

‘पिछले कुछ महीनों में गांव में तकरीबन 135 जगहों पर सोलर लाइटें लगाई गई हैं. इससे रात में भी यहां अंधेरा नहीं रहता. बिजली अगर नहीं रहे तो भी गांव की गलियों में रौशनी रहती हैं.’ मोदी द्वारा गोद लिए जाने के बाद जयापुर में एक और बड़ा काम यह हुआ है कि तकरीबन हर घर में पाइप के जरिए पेयजल की आपूर्ति होने लगी है. इसके लिए गांव में दो पंप हाउस बनाए गए हैं. हालांकि, गांव की बसावट कुछ ऐसी है कि कुछ घर मुख्य बसावट से कुछ दूरी पर हैं इसलिए इन घरों में अभी पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है लेकिन ग्राम प्रधान के मुताबिक जल्दी ही इन घरों में भी पाइप से पानी पहुंच जाएगा.

जयापुर में प्राथमिक विद्यालय तो पहले से था लेकिन इसके आदर्श ग्राम योजना में शामिल होने के बाद यहां एक कन्या विद्यालय का भवन भी बनकर तैयार है. इस काशी आदर्श कन्या विद्यालय पर एक पत्थर लगा है जिस पर लिखा है कि केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह और हरसिमरत कौर बादल ने 13 जुलाई, 2015 को इसका लोकार्पण कर दिया है. लेकिन हकीकत में अभी तक इस विद्यालय में पढ़ाई शुरू नहीं हुई है. इस बारे में ग्राम प्रधान बस इतना बताते हैं कि बहुत जल्दी यहां पढ़ाई शुरू होगी.

गांव के कई लोगों से बातचीत में एक बात समान दिखती है. हर कोई नरेंद्र मोदी की तो तारीफ करता दिखता है लेकिन साथ ही यह भी जोड़ देता है कि उनकी योजनाओं को जो लोग यहां लागू कर रहे हैं, वे ठीक नहीं हैं. लोगों को लगता है कि योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले लोग पैसे बना रहे हैं और इस वजह से अच्छा काम नहीं हो रहा है. हर कोई यह बात भी दोहराता हुआ दिखता है कि प्रधानमंत्री को यहां चल रहे कार्यों पर निगरानी रखने के लिए कोई एक ऐसा आदमी रखना चाहिए जो स्थानीय नहीं हो. उन्हें लगता है कि अगर किसी स्थानीय व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलेगी तो वह अपने निजी हित-अहित को ध्यान में रखकर काम करेगा.