नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने नेपाल में बिगड़े हालात के लिए भारत को जिम्मेदार बताया है. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल को एक खुशहाल हिमालयी राष्ट्र बनाने के उनके सपने को भारत की नाकेबंदी ने तबाह कर दिया है. ओली के अनुसार नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने देश को विकसित राष्ट्र बनाने को लेकर कई सपने देखे थे. लेकिन, पहले भूकंप की त्रासदी और अब सीमा पर चल रही नाकेबंदी के कारण वे देश में कोई विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं. दरअसल, नेपाल के कुछ शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी है. इसमें कहा गया है कि यदि इस संकट को जल्द न रोका गया तो इसके भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं. बीते शनिवार को संयुक्त राष्ट्र ने भी नेपाल को आगाह करते हुए कहा था कि अगर ये संकट जल्द न सुलझा तो नेपाल के लोग कुपोषण का शिकार हो सकते हैं. हालांकि, ओली का कहना है, 'मैं इस संकट से निपटने के हर संभव प्रयास कर रहा हूं और उम्मीद है कि जल्द सबकुछ सही हो जाएगा.'
दरअसल, नेपाल के नए संविधान में बेहतर प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण मधेसी समुदाय इसका विरोध कर रहा है. इसके चलते मधेसियों ने महीनों से भारतीय सीमा पर नाकेबंदी कर रखी है. इस वजह से नेपाल में ईंधन और गैस सहित कई जरूरी चीजों की किल्लत हो गई है. नेपाल सरकार ‘मधेसी नाकेबंदी’ के पीछे भारत का हाथ होने की बात कह रही है. उनका कहना है कि जिन सीमाओं पर मधेसी आंदोलन नहीं हो रहा वहां से भी भारत सरकार नेपाल में सामान नहीं आने दे रही है. हालांकि, भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है.


'भारत के अल्पसंख्यकों की तकलीफ का असर पाकिस्तान में भी महसूस किया जाता है. भारतीय नेतृत्व को अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव खत्म करने का स्पष्ट संदेश देना चाहिये.'

इमरान खान, पाकिस्तानी राजनेता और पूर्व क्रिकेटर
मीडिया से बातचीत में



स्वीडन को जूलियन असांजे से पूछताछ करने की इजाजत मिली
जूलियन असांजे से पूछताछ करने को लेकर इक्वाडोर और स्वीडन के बीच एक समझौता हुआ है. इसके मुताबिक़ स्वीडन के अधिकारी लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास में विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे से पूछताछ कर सकेंगे. छह महीने की लंबी जद्दोजहद के बाद इस समझौते पर इक्वाडोर में दस्तख़त किए गए. असांजे पर स्वीडन में दो महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये हैं. हालांकि, असांजे इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इसी प्रत्यर्पण से बचने के लिए उन्होंने लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास में शरण ले रखी है. उनका कहना है कि अगर वे स्वीडन गए तो स्वीडन सरकार उन्हें अमेरिका के हवाले कर देगी. जहां उन पर दस्तावेज़ लीक करने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा. दरअसल, असांजे की कंपनी विकीलीक्स ने 2010 में बड़ी तादात में अमेरिका के गुप्त सरकारी दस्तावेज़ सार्वजनिक कर खलबली मचा दी थी. इसके बाद से अमेरिका असांजे की तलाश में है.
ग्रीस सरकार शरणार्थियों को आवास उपलब्ध कराएगी
युद्ध की विभीषका से जूझते सीरिया और इराक से भागकर यूरोप जा रहे शरणार्थियों को जल्द ही एक राहत मिल सकती है. उन्हें लेकर ग्रीस एक बड़ा समझौता करने जा रहा है. यह समझौता ग्रीस सरकार, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और यूरोपीय समिति के बीच होगा. इसके तहत ग्रीस एथेंस में आए 23 हज़ार नए शरणार्थियों को रियायती दर पर आवास उपलब्ध कराएगा. इन आवासों का किराया चुकाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी प्रवासियों की मदद करेगी. दरअसल, बाल्कन देशों के द्वारा अपनी सीमायें बंद करने के बाद एथेंस में बड़ी संख्या में शरणार्थी पहुंच रहे हैं और ग्रीस भी उनकी पूरी मदद कर रहा है.