नेपाल में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे मधेसियों ने वहां की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के काफिले पर हमला बोल दिया. पुलिस और मधेसियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 12 पुलिसकर्मियों सहित 35 लोग घायल हो गए. यह घटना नेपाल के जनकपुर में राम की बारात कार्यक्रम के दौरान घटी. कहते हैं कि भगवान् राम और जनकपुर की सीता का आज ही के दिन विवाह हुआ था. इसी की याद में हर साल यहां बड़ा उत्सव मनाया जाता है जिसमें नेपाल के कई बड़े नेता भी शामिल होते हैं. इस बार राष्ट्रपति भी इस कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं. खबरों के मुताबिक मधेसी मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ता राष्ट्रपति को काले झंडे दिखाकर विरोध कर रहे थे. फिर अचानक भीड़ ने राष्ट्रपति के कारों के काफिले पर पथराव शुरू कर दिया. इसके बाद नेपाली सेना ने राष्ट्रपति को उपद्रवियों से बचाते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया. बताया जाता है कि भारतीय राजदूत रंजीत राय भी जनकपुर जाने वाले थे लेकिन, उपद्रव के बाद उन्होंने कार्यक्रम रद्द कर दिया.
नेपाल के नए संविधान में बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर मधेसियों का आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक होता जा रहा है. यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के दक्षिणी हिस्से में मधेसियों के विरोध के चलते हुई हिंसा में अब तक तीस से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.


'आतंकवाद के लिए सिर्फ़ मुसलमानों को ज़िम्मेदार ठहराने से मुस्लिम युवाओं में कट्टरपंथ को और बढ़ावा मिलेगा. अगर आतंकवाद को रोकना है तो मुस्लिमों का साथ दें.'

मलाला यूसुफ़जई, सामाजिक कार्यकर्ता
पत्रकारों से बातचीत में



जिनपिंग ने इंटरनेट पर नियंत्रण की मांग उठायी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नें एक बार फिर इंटरनेट को नियंत्रण में रखने की बात उठायी है. उन्होंने साइबर खतरों का हवाला देते हुए सभी देशों से सहयोग की मांग की है. जिनपिंग के मुताबिक वक्त आ गया है कि सभी देश आगे आकर एक वैश्विक गवर्नेंन्स सिस्टम की स्थापना करें जो सभी देशों की इच्छाओं और हितों का प्रतिनिधित्व कर सके. उनके मुताबिक यह सिस्टम ऑनलाइन हो रहे अपराधों और आतंकवाद से निपटने में सहयोगी होगा. राष्ट्रपति बनने के बाद जिनपिंग ने चीन में इंटरनेट पर नियंत्रण से जुड़े कानूनों को काफी सख्त बना दिया है. चीनी सरकार के इस कदम का मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई आईटी कम्पनियां भी विरोध करती रहीं हैं. इनका कहना है कि सुरक्षा के बहाने चीनी सरकार इंटरनेट के नियमों में मनमुताबिक बदलाव कर हर किसी की निगरानी करना चाहती है.
जापान में महिलाओं के उपनाम से संबंधित मिजी युग का कानून बना रहेगा
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को झटका देते हुए जापान के सुप्रीम कोर्ट ने उस कानून को बरकरार रखा है जिसके तहत महिलाओं के लिए अपने पति का उपनाम (सर नेम) रखना जरूरी है. अदालत नें एक याचिका की सुनवाई करते हुए उपनाम से संबंधित मिजी युग के इस कानून को बरकरार रखा है. दरअसल, जापान के कुछ महिला अधिकार संगठनों से जुड़े याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे बदलने की मांग की थी. इनकी इस मांग के विरोध में भी एक याचिका दायर की गयी थी जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. हालांकि, भले ही कोर्ट नें पुराने फैसले को कायम रखा लेकिन, खुद जज का मानना था कि महिलाओं को अपना उपनाम चुनने की आजादी होनी चाहिए. जापान में 1898 से पहले तक शादी के बाद महिलाओं को अपना उपनाम बनाये रखने की स्वतंत्रता थी. लेकिन, 19 वीं सदी में मिजी युग के समय पितृ सत्तात्मक परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाने के चलते इस नए कानून को बनाया गया था.