दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्भया मामले में नाबालिग़ अपराधी की रिहाई पर रोक लगाने से मना कर दिया है. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि नाबालिग़ अपराधी को पहले से तय समय के मुताबिक़ 20 दिसंबर को ही रिहा किया जाएगा. चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ ने कहा कि दोषी को रिहा न करने के लिए जो भी तर्क दिए गए वे सब सही हैं, लेकिन कोर्ट के हाथ कानून से बंधे हैं. अदालत के मुताबिक मौजूदा क़ानून के तहत किसी नाबालिग के बड़े से बड़े गुनाह की अधिकतम सजा भी सिर्फ तीन साल ही हो सकती है और उसे सज़ा की मियाद से ज़्यादा समय तक सुधार गृह में नहीं रखा जा सकता है.
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा है कि एक मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी जो दो साल तक जुवेनाइल की मानसिक स्थिति पर निगाह रखेगी. निर्भया की मां ने कोर्ट के फैसले पर दुःख जताया है. उन्होंने कहा कि उन्हें इंसाफ़ नहीं मिला है.



'एक सीबीआई अधिकारी ने मुझे बताया है कि सीबीआई से विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधने और जो सरकार की बात न मानें, उन्हें ख़त्म करने के लिए कहा गया है.'

अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री
एक ट्वीट के जरिये



समलैंगिकों के समर्थन बिल को सांसदों ने नकारा
समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाने के लिए पेश किए गए कांग्रेस सांसद शशि थरूर के निजी विधेयक को लोकसभा ने ख़ारिज कर दिया है. लोकसभा में सत्तापक्ष ने इस विधेयक को पेश होने से रोक दिया. विधेयक लोकसभा में 24 के मुक़ाबले 71 वोटों से गिर गया. इस विधेयक में थरूर ने 1860 की भारतीय दंड संहिता की धारा 377 में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा था. इसके मुताबिक, बालिग़ों के बीच सहमति के बाद समलैंगिक संबंधों की इजाज़त दी जानी चाहिए. वहीं विधेयक के पेश न हो पाने के बाद थरूर ने कहा कि वे भाजपा के सांसदों का ऐसा विरोध देखकर निराश हैं. उन्होंने इस विधेयक को भविष्य में फिर पेश करने की बात कही है. दरअसल, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित कर कहा था कि केवल संसद ही धारा 377 में संशोधन कर सकती है.
सर्वदलीय बैठक कुछ हद तक सफल, लेकिन जीएसटी पर कोई फ़ैसला नहीं
राज्यसभा में जारी गतिरोध को सुलझाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों को थोड़ी सफलता मिलती दिख रही है. राज्यसभा अध्यक्ष हामिद अंसारी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने बचे हुए दिनों में कोई बाधा न पहुचाने की बात कही है. हालांकि, वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) पर सहमति नहीं बनी है लेकिन, इस सत्र के बचे तीन दिनों में अन्य विधेयकों को पारित कराने के लिए कांग्रेस ने हामी भर दी है. इस बैठक के बाद विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, 'कुछ विधेयकों जैसे अनुसूचित जाति/जनजाति को पारित करने के लिए हमने प्रतिबद्धता जताई है. मगर जीएसटी पर अभी कोई फ़ैसला नहीं हुआ है.' बता दें कि इस सत्र की शुरुआत से ही सदन कई मुद्दों को लेकर बाधित रहा है. जिसके कारण जीएसटी सहित कई प्रमुख विधेयक पारित नहीं हो पा रहे हैं. इसी को लेकर गुरूवार को नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस को समझाने को कहा था. इसके बाद हामिद अंसारी ने यह सर्वदलीय बैठक बुलायी थी.