जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार
जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार
दिल्ली चुनाव के बाद बिहार में बड़ा उलटफेर होने वाला है. सूचना यह है कि जीतनराम मांझी को बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. यह बहुत जल्द हो सकता है. जेडीयू के कुछ बड़े नेताओं के मुताबिक, इसी महीने जीतनराम मांझी को नमस्कार कह दिया जाएगा.
नीतीश कुमार को करीब से जानने वालों का मानना है कि मांझी को जाना होगा यह तो करीब-करीब तय हो चुका है, लेकिन नीतीश खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे, यह पक्का नहीं है. वे महादलित समुदाय से आने वाले जीतनराम मांझी को हटाकर किसी दलित को ही सीएम की कुर्सी पर बिठाना चाहते हैं. नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी श्याम रजक और रमई राम का नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है. बताया जाता है कि इनमें से एक नेता ही मांझी के खिलाफ खबरें प्लांट कर रहे हैं. मांझी इससे नाराज़ हैं. वे नीतीश के लिए तो कुर्सी छोड़ सकते हैं. लेकिन किसी और के लिए नहीं. कल पटना में नीतीश कुमार और शरद यादव की मीटिंग हुई जिसमें मांझी को मनाने की जिम्मेदारी शरद यादव को दे दी गई.
नीतीश कुमार महादलित समुदाय से आने वाले जीतनराम मांझी को हटाकर किसी दलित को ही सीएम की कुर्सी पर बिठाना चाहते हैं.
इस बीच एक बड़ा हृदय परिवर्तन हुआ है. अब लालू यादव भी मांझी को हटाने की बात पर सहमत हो गए हैं. लालू पहले मांझी को हटाने पर तैयार नहीं हो रहे थे (पढ़ें - मंझधार में जीतन राम मांझी नहीं नीतीश कुमार हैं). लालू को शरद यादव ने ही मनाया है. लेकिन इसके लिए उन्होंने एक शर्त भी रखी है - मांझी को नाराज़ न किया जाए और उन्हें बागी बनने से रोका जाए.
अब तक के रुझान देखें तो साफ है जीतनराम मांझी को मनाना आसान नहीं है. वे आसानी से कुर्सी नहीं छोड़ने वाले. मांझी की कुर्सी पर पहले तो नीतीश को ही बैठाना आसान नहीं है और अगर उनके अलावा किसी दूसरे नेता को बिठाया गया तो मांझी बागी बन जाएंगे. इसके बाद सूत्रों के मुताबिक या तो वे सीधे गवर्नर से मिलेंगे. या बिहार विधानसभा भंग करने की सिफारिश करेंगे या फिर पार्टी को तोड़ देंगे. ऐसे में भाजपा मांझी का समर्थन करने के लिए तैयार है. बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने तो यहां तक कह दिया कि 'जीतन राम मांझी को हिम्मत दिखानी चाहिए...और अगर उनको हटाने की कोई भी कोशिश होती है...तो विधानसभा भंग करके फिर से चुनाव कराने चाहिए.' भाजपा को लगता है कि इससे नीतीश के कोर मतदाताओं में से महादलितों का वोट उसे मिल मिलेगा. रामविलास पासवान की वजह से दलित वोट पर उसकी नजर पहले से ही है. उधर मांझी ने भी मोदी की तारीफ शुरू कर दी है. उमा भारती उन्हें दलितों का मसीहा कह चुकी हैं. दिल्ली के बाद बिहार की सियासत भी अब पॉलिटिकल थ्रिलर बनती जा रही है.